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Birla Fertility & IVF
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प्रेगनेंट कैसे होते हैं (How To Get Pregnant in Hindi)

  • Published on May 18, 2022
प्रेगनेंट कैसे होते हैं (How To Get Pregnant in Hindi)

प्रेगनेंसी एक जटिल प्रक्रिया है जिसके दौरान एक गर्भवती महिला को अनेक बातों का ध्यान रखना होता है। प्रेगनेंसी को हिंदी में गर्भावस्था कहते हैं। यह हर महिले के जीवन की सभी खूबसूरत पलों में से एक होता है।

गर्भधारण करने के लिए महिला और पुरुष दोनों का फर्टाइल होना आवश्यक है। गर्भधारण करने, शिशु को जन्म देने और माता-पिता का बनने का सपना पूरा करने के लिए महिला का गर्भाशय, ओवरी और अंडा आदि का स्वस्थ होना महत्वपूर्ण है।

साथ ही, पुरुष के स्पर्म की संख्या और गुणवत्ता (Spert quantity and quality) का बेहतर होना भी आवश्यक है। इन सबके अलावा, महिला और पुरुष के प्रजनन अंग के ऐसे अनेक हिस्से हैं जो गर्भधारण में अहम भूमिका निभाते हैं।

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Table of Contents

प्रेगनेंट कैसे होते हैं (How to Get Pregnant in Hindi)

गर्भावस्था तब होती है जब पुरुष का शुक्राणु महिला के अंडाणु को निषेचित करता है। आमतौर पर यह एक महिला के मासिक धर्म चक्र के दौरान होता है जब वह ओव्यूलेशन करती है, जो उसके अंडाशय में से एक परिपक्व अंडे का रिलीज होना यानी बाहर निकलकर फैलोपियन ट्यूब में जाना है। निषेचन प्रक्रिया आमतौर पर फैलोपियन ट्यूब में होती है, जहां शुक्राणु और अंडाणु मिलते हैं।

गर्भधारण की संभावना बढ़ाने के लिए, महिला की फर्टाइल पीरियड के दौरान असुरक्षित यौन संबंध बनाना महत्वपूर्ण है, जो आमतौर पर ओव्यूलेशन के समय के आसपास होता है। ओव्यूलेशन एक महिला के मासिक धर्म चक्र के बीच में होता है, लेकिन यह हर महिला में अलग-अलग हो सकता है। कैलेंडर ट्रैकिंग, बेसल शरीर के तापमान की निगरानी, ​​या ओव्यूलेशन भविष्यवाणी किट का उपयोग करने जैसी विधियों के माध्यम से ओव्यूलेशन को ट्रैक करने से गर्भधारण के लिए सबसे अच्छा समय निर्धारित करने में मदद मिल सकती है।

एक बार निषेचन होने के बाद, निषेचित अंडा (जाइगोट) फैलोपियन ट्यूब से नीचे चला जाता है और अंततः महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित हो जाता है, जहां यह एक भ्रूण के रूप में विकसित होना शुरू होता है। यह गर्भावस्था की शुरुआत का प्रतीक है, और महिला का शरीर गर्भावस्था के दौरान बच्चे के जन्म तक विभिन्न परिवर्तनों और चरणों से गुजरता है।

और पढ़े : प्रेग्नेंट होने के लक्षण 

 

प्रेगनेंसी के लिए महिला और पुरुष के कौन से अंग महत्वपूर्ण हैं? 

Pregnancy Kaise Hoti Hai – प्रेगनेंसी या गर्भावस्था की प्रक्रिया एक महिला के शरीर में पूरी होती है। जैसा कि हमने आपको ऊपर ही बताया कि प्रेगनेंसी में एक महिला के प्रजनन अंगों की खास भूमिका होती है।

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महिला के प्रजनन अंगों में मुख्य रूप से ओवरी, फैलोपियन ट्यूब और गर्भाशय शामिल हैं।

 

ओवरी क्या है (What is Ovary in Hindi)

ओवरी को हिंदी में अंडाशय कहते हैं। एक महिला में दो ओवरी होती है। गर्भधारण में ओवरी की मुख्य भूमिका होती है।

ओवरी में अंडों का निर्माण होता है जो आगे पुरुष स्पर्म के साथ फर्टिलाइज होते हैं। ओवरी में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का निर्माण होता है। 

प्रेगनेंसी में ओवरी का आकार महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि छोटी ओवरी में अंडों की संख्या कम होती है जिससे गर्भधारण की संभावना घट सकती है। 

 

ओवरी से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points Related to Ovary):-

अनेक कारक ओवरी को प्रभावित करते हैं जिसमें निम्न शामिल हो सकते हैं:-

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  • ओवरी का आकार महिला की उम्र के साथ बदलता रहता है
  • पीरियड्स साईकिल के दौरान ओवरी के आकार में बदलाव आता है
  • ओवरी जब एग्स (अंडों) का निर्माण करती है तब इसका आकार लगभग 5 सेंटीमीटर होता है
  • ओवरी में किसी प्रकार का गांठ बनने पर इसके आकार में फर्क आता है
  • मेनोपॉज के बाद ओवरी का आकार सिकुड़ने लगता है
  • ओवरी पर तनाव का बुरा असर पड़ता है
  • तनाव के कारण ओवरी अंडों का निर्माण बंद कर सकती है
  • ओवरी में सिस्ट होने की स्थिति को मेडिकल भाषा में ओवेरियन सिस्ट कहते हैं
  • ओवेरियन सिस्ट कई बार कुछ महीनों के अंदर अपने आप ही ठीक हो जाता है

फैलोपियन ट्यूब क्या है (What is Fallopian Tube in Hindi)

हर महिला में दो फैलोपियन ट्यूब होते हैं। अंडे मैच्योर होने के बाद ओवरी से रिलीज होकर फैलोपियन ट्यूब में चले जाते हैं जहां पुरुष स्पर्म अंडा को फर्टिलाइज करता है। 

जब किसी कारण से एक फैलोपियन ब्लॉक हो जाता है तो प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने की संभावना लगभग 50% कम हो जाती है।

जब दोनों फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक होते हैं तो प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना खत्म हो जाती है। प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने के लिए दोनों फैलोपियन ट्यूब का खुला होना आवश्यक है। 

फैलोपियन ट्यूब बंद होने का कोई सटीक कारण नहीं है। कई कारणों से इसमें ब्लॉकेज हो सकता है।

फैलोपियन ट्यूब से संबंधित बिंदु (Points Related to Fallopian Tube):-

  • फैलोपियन ट्यूब की सामान्य लंबाई 8-10 सेंटीमीटर होती है
  • फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक होने पर डॉक्टर आईवीएफ उपचार करते हैं
  • सोनोग्राफी, ट्यूब टेस्ट और एक्स-रे की मदद से फैलोपियन ट्यूब की जांच की जाती है
  • बांझपन से पीड़ित 20 महिलाओं में लगभग 10-12 महिलाओं के फैलोपियन ट्यूब में किसी प्रकार की संसय होती है

बांझपन से पीड़ित लोगों के लिए आईवीएफ एक वरदान की तरह है। इस उपचार की मदद से बांझपन से पीड़ित दंपति अपने माता-पिता बनने का सपना पूरा कर सकते हैं।

अगर आप आईवीएफ क्या है, क्यों किया जाता है और इसके क्या फायदे हैं आदि के बारे में जानने के लिए आईवीएफ क्या है – प्रक्रिया, फायदे और साइड इफेक्ट्स को पढ़ सकते हैं।

गर्भाशय क्या है (What is Uterus in Hindi)

गर्भाशय को अंग्रेजी में यूट्रस कहते हैं। यह महिला की प्रजनन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। गर्भाशय में भ्रूण का प्रत्यारोपण (इम्प्लांटेशन) होकर शिशु का विकास होता है।

जब किसी कारण गर्भाशय में कोई समस्या पैदा होती है तो महिला की प्रजनन क्षमता बुरी तरह से प्रभावित होती है। 

गर्भाशय में कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं जिसमें मुख्य रूप से निम्न शामिल हैं:-

  • पॉलिप्स
  • फाइब्रॉइड्स
  • इंट्रयूटरीन आसंजन
  • पतला एंडोमेट्रियल अस्तर
  • जन्मजात गर्भाशय असामान्यताएं

गर्भाशय से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु (Points Related to Uterus):-

  • गर्भाशय एक नाशपाती के आकार (70 मिमी लंबा और 45 मिमी चौड़ा) का होता है 
  • गर्भाशय मलाशय और मूत्राशय के बीच में स्थित होता है
  • गर्भधारण करने के बाद गर्भ के साथ-साथ गर्भाशय का आकार बढ़ता है
  • गर्भाशय अत्यंत लचीली पेशी-तंतुओं से बना होता है
  • गर्भ की अवधि में गर्भाशय फैलकर एक फुट तक बढ़ जाता है
  • मासिक धर्म की शुरुआत गर्भाशय से होती है
  • गर्भस्थ शिशु नौ महीने तक गर्भाशय में ही रहता है
  • सेक्स का अंतिम परिणाम गर्भाशय में ही पोषित होता है, यही कारण है कि यह महिला की प्रजनन अंगों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

महिला के साथ-साथ पुरुष के प्रजनन अंग भी गर्भधारण में अहम् भूमिका निभाते हैं। पुरुष के प्रजनन अंगों में मुख्य रूप से लिंग और अंडकोष शामिल हैं।

लिंग क्या है (What is Penis in Hindi)

लिंग पुरुष की प्रजनन प्रणाली का एक खास अंग है जो तीन भाग में होता है। लिंग का पहला भाग पेट से जुड़ा होता है, दूसरा भाग शरीर यानी शाफ्ट और तीसरा सिर होता है।

लिंग का सिर एक पतली त्वचा से ढका होता है जिसे मेडिकल की भाषा में फोरस्किन कहते हैं। पुरुष सेक्स के दौरान जब एजाकुलेशन करता है तो उसके लिंग से स्पर्म निकलता है।

स्पर्म में सीमेन मौजूद होता है। जब पुरुष एक स्त्री के साथ संबंध बनाता है तो स्पर्म लिंग से बाहर निकलकर योनि में प्रवेश करता है।

स्पर्म योनि में प्रवेश करने के बाद, गर्भाशय से होते हुए फैलोपियन ट्यूब में चला जाता है। फैलोपियन ट्यूब में महिला का अंडा पुरुष स्पर्म के साथ फर्टिलाइज होता है और गर्भधारण की प्रक्रिया शुरू होती है।

लिंग से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बिंदु (Points Related to Penis in Hindi):-

  • छोटे लिंग में बड़ा इरेक्शन हो सकता है
  • लिंग एक मांसपेशी नहीं है
  • अगर लिंग पूरी तरह टाइट है तो बुरी तरह घूमने पर टूट सकता है
  • लिंग कम उत्तेजित होने या संभोग नहीं करने पर सिकुड़ने लगता है 
  • लिंग की ऊपरी त्वचा को फोरस्किन कहते हैं
  • खतना (सरकमसिजन) के दौरान लिंग के सिर की ऊपरी त्वचा को काटकर हटा दिया जाता है
  • लिंग को शेप में रखने के लिए नियमित रूप से संभोग करना आवश्यक है
  • उम्र बढ़ने पर धीरे-धीरे लिंग की संवेदनशीलता कम होने लगती है
  • एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग 37% से 39% पुरुषों का खतना हो चूका है।

लिंग में कई प्रकार की समस्याएं पैदा होती हैं जो पुरुष की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। इसमें मुख्य रूप से निम्न शामिल हो सकते हैं:-

  • इरेक्टाइल डिस्फंक्शन
  • प्रियपिज्म
  • हायपोस्पेडियस
  • फाइमोसिस
  • बैलेनाइटिस
  • बालानोपोसथेटिस
  • चोरडी
  • लिंग का टेढ़ापन
  • यूरेथ्राइटिस
  • गोनोरिया 
  • क्लैमाइडिया
  • सिफलिस
  • हर्पीस 
  • माइक्रोपेनिस (छोटा लिंग) 
  • लिंग के अग्रभाग पर मस्सा (पेनिस वार्ट्स)
  • लिंग का कैंसर

अंडकोष क्या है (What is Testicle in Hindi)

अंडकोष को वृषण और अंग्रेजी में टेस्टिकल नाम से जाना जाता है। यह भी पुरुष के प्रजनन प्रणाली का एक खास अंग है। 

हर पुरुष में दो अंडकोष होते हैं जिनका काम स्पर्म और टेस्टोस्टेरोन का निर्माण करना है। अंडकोष एक पतली थैली में मौजूद होते हैं जिसे स्क्रोटम कहा जाता है। 

स्क्रोटम गर्मी में अधिक बढ़कर लटक जाती है और सर्दी में सिकुड़कर छोटी हो जाती है। एक पुरुष में दो अंडकोष होते हैं और एक अंडकोष का आकार लगभग 5 सेमी लंबा और 2.5 सेमी चौड़ा होता है।

अंडकोष से जुड़े कुछ बिंदु (Points Related to Testicles in Hindi):-

  • एक अंडकोष में लगभग 700-900 ट्यूब होते हैं
  • एक अंडकोष की लंबाई 5 सेमी और चौड़ाई 2.5 सेमी होती है 
  • हर पुरुष में दो अंडकोष होते हैं
  • अंडकोष स्क्रोटम नाम थैली में स्थित होते हैं
  • अंडकोष स्पर्म और टेस्टोस्टेरोन का निर्माण करते हैं
  • टेस्टोस्टेरोन को सेक्स हार्मोन के नाम से भी जाना जाता है
  • टेस्टोस्टेरोन की कमी के कारण स्पर्म की संख्या और गुणवत्ता में कमी आती है
  • अंडकोष में कई तरह की बीमारियां होती हैं
  • अंडकोष की बीमारी के कारण पुरुष को बांझपन हो सकता है
  • जब स्पर्म का उत्पादन विर्योत्पादक नलिकाओं में होता है तो यह अधिवृषण (Epididymis) से गुजरते हैं
  • अधिवृषण एक लंबे कुंडलित नलिका है जिसमें स्पर्म मैच्योर होते हैं
  • स्पर्म मैच्योर होने के बाद वास डेफरेंस के जरिए स्खलन के दौरान रिलीज होने के लिए तैयार होते हैं
  • वास डेफरेंस में वीर्य पुटिकाओं और प्रोस्टेट ग्रंथि द्वारा तरल पदार्थ, स्पर्म कोशिकाओं के साथ मिलकर वीर्य (सीमेन) का निर्माण होता है
  • यही वीर्य स्खलन के दौरान लिंग के माध्यम से शरीर से बाहर निकलता है

अंडकोष में कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं जो पुरुष की प्रजनन क्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं। इसमें मुख्य रूप से निम्न शामिल हो सकते हैं:-

  • हाइड्रोसील
  • वैरीकोसेल
  • रिट्रैकटाइल टेस्टिकल
  • अनडिसेंडेड वृषण या गुप्तवृषणता
  • वृषण मरोड़
  • अंडकोष में सूजन
  • अंडकोष में कैंसर
  • हाइपोगोनैडिज्म
  • क्लाइनफेक्टर सिंड्रोम

प्रेगनेंसी के स्टेज (What are the Stages of Pregnancy in Hindi)

प्रेगनेंसी को मुख्य रूप से चार स्टेज में बांटा जा सकता है जिसमें ओवुलेशन, फर्टिलाइजेशन और इम्प्लांटेशन शामिल हैं।

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गर्भावस्था (प्रेगनेंसी) का पहला स्टेज — ओवुलेशन (What is Ovulation in Hindi)

औसतन 28-दिवसीय मासिक धर्म चक्र में, ओव्यूलेशन आमतौर पर अगले मासिक धर्म की शुरुआत से लगभग 14 दिन पहले होता है।

मैच्योर होने के बाद अंडा के ओवरी से बाहर आने की प्रक्रिया को ओवुलेशन कहते हैं। आमतौर पर ओवुलेशन के दौरान एक, दो या तीन अंडे रिलीज होते हैं।

गर्भावस्था (प्रेगनेंसी) का दूसरा स्टेज — फर्टिलाइजेशन (What is Fertilization in Hindi)

ओवुलेशन हर महीने रिपीट होता है और इस दौरान एक महिला के गर्भधारण करने की संभावना सबसे अधिक होती है।

ओवुलेशन के दौरान अंडा ओवरी से बाहर निकलकर फैलोपियन ट्यूब में जाता है जहां स्पर्म उसे फर्टिलाइज करता है।

फैलोपियन ट्यूब में अंडा लगभग 24 घंटे और स्पर्म लगभग 5-7 दिनों तक जीवित रहते हैं। अगर इस दौरान अंडा और स्पर्म मिल जाते हैं तो फर्टिलाइजेशन की संभावना बढ़ जाती है। फर्टिलाइजेशन के बाद महिला गर्भवती हो जाती है।

गर्भावस्था (प्रेगनेंसी) का तीसरा और आखिरी स्टेज — इम्प्लांटेशन (What is Implantation in Hindi)

फर्टिलाइजेशन के 24 घंटे के भीतर फर्टिलाइज्ड अंडे की कोशिकाएं तेजी से विभाजित होने लगती हैं और धीरे-धीरे फैलोपियन ट्यूब से गर्भाशय की ओर जाने लगती हैं। फिर गर्भाशय के अस्तर से जुड़ने लगती हैं। इस प्रक्रिया को इम्प्लांटेशन कहते हैं।

गर्भावस्था (प्रेगनेंसी) से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु (Points Related to Pregnancy in Hindi):-

  • प्रेगनेंसी के दौरान गर्भाशय का आकार बड़ा हो जाता है
  • अब तक दर्ज की गई सबसे लंबी गर्भावस्था 375 दिन लंबी थी
  • सबसे छोटी प्रेगनेंसी 21 सप्ताह चार दिन की थी
  • गर्भवती महिला के रक्त की मात्रा 40-50% बढ़ जाती है
  • गर्भवती होने पर आपके दिल का आकार बढ़ जाता है
  • गर्भावस्था के दौरान आपकी आवाज में बदलाव आ सकता है
  • बच्चे गर्भ के अंदर से अपनी मां की आवाज सुन सकते हैं
  • कुछ गर्भवती महिलाओं को मधुमेह (डायबिटीज) हो सकता है
  • गर्भावस्था के दौरान आपके जोड़ (Joints) ढीले हो जाते हैं
  • आपके सूंघने की क्षमता में बदलाव आ सकता है
  • आपके शरीर के कुछ अंगों में बदलाव आता है
  • शिशु गर्भ में कुछ खाद्य पदार्थों का स्वाद चख सकते हैं  
  • 30 साल की उम्र में एक जोड़े के गर्भधारण करने की 20% संभावना होती है
  • बच्चे गर्भ में रो सकते हैं
  • आपके मसूड़े में सूजन और सांसों में दुर्गंध हो सकती है
  • जन्म के दौरान, श्रोणि की हड्डी अलग हो जाती है

सेक्सुअल इंटरकोर्स और गर्भाधान 

सेक्सुअल इंटरकोर्स यानी संभोग मानव प्रजनन का एक मूलभूत पहलू है और इसमें पुरुष और महिला प्रजनन अंगों का शारीरिक मिलन शामिल है। संभोग का प्राथमिक उद्देश्य गर्भधारण को सुविधाजनक बनाना है, वह प्रक्रिया जिसके द्वारा पुरुष के शुक्राणु कोशिका महिला के अंडाणु को निषेचित करती है, जिससे युग्मनज (zygote) का निर्माण होता है।

संभोग के दौरान, घटनाओं की एक जटिल श्रृंखला सामने आती है। पुरुष शुक्राणु को महिला की योनि में स्खलित करता है, जहां वे गर्भाशय ग्रीवा से होते हुए गर्भाशय में चले जाते हैं। यदि महिला ओवुलेशन कर रही है, जिसका अर्थ है कि अंडाशय से अंडा निकल चुका है, तो शुक्राणु फैलोपियन ट्यूब में अंडे को निषेचित कर सकता है। यह मिलन एक युग्मनज बनाता है, जो भ्रूण के विकास की शुरुआत का प्रतीक है।

सफल गर्भाधान विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है, जिसमें महिला के मासिक धर्म चक्र से संबंधित संभोग का समय, शुक्राणु और अंडे का स्वास्थ्य और व्यवहार्यता और दोनों भागीदारों का समग्र प्रजनन स्वास्थ्य शामिल है। गर्भाधान आमतौर पर उपजाऊ खिड़की (fertile window) के दौरान होता है, जो ओवुलेशन के आसपास एक विशिष्ट अवधि होती है जब निषेचन की संभावना सबसे अधिक होती है।

परिवार शुरू करने के इच्छुक लोगों के लिए संभोग और गर्भधारण के तंत्र यानी मेकेनिज्म को समझना महत्वपूर्ण है। गर्भधारण में चुनौतियों का सामना करने वाले व्यक्तियों के लिए, सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकियां गर्भावस्था प्राप्त करने के लिए वैकल्पिक मार्ग प्रदान कर सकती हैं। कुल मिलाकर, संभोग मानव प्रजनन प्रक्रिया का एक प्राकृतिक और आवश्यक घटक बना हुआ है, जो मानव प्रजाति की निरंतरता में योगदान देता है।

ओवुलेशन और प्रजनन क्षमता

ओवुलेशन और प्रजनन क्षमता महिला प्रजनन चक्र के अभिन्न पहलू हैं, जो गर्भधारण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ओवुलेशन अंडाशय से एक परिपक्व अंडे का निकलना है, जो आमतौर पर 28 दिनों के नियमित चक्र वाली महिलाओं में मासिक धर्म चक्र के बीच में होता है। यह घटना ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (एलएच) में वृद्धि के कारण शुरू होती है और मासिक धर्म चक्र की सबसे उपजाऊ अवधि को चिह्नित करती है।

ओवुलेशन के दौरान, जारी अंडा फैलोपियन ट्यूब से नीचे चला जाता है, जहां उसे निषेचन के लिए शुक्राणु का सामना करना पड़ सकता है। प्रजनन क्षमता की खिड़की को ओवुलेशन से पहले और बाद में कुछ दिनों तक विस्तारित माना जाता है, जो उपजाऊ खिड़की का निर्माण करती है। शुक्राणु महिला प्रजनन पथ में कई दिनों तक जीवित रह सकते हैं, जिससे इस अवधि के दौरान निषेचन की संभावना बढ़ जाती है।

गर्भधारण करने की कोशिश करने वालों के लिए ओवुलेशन को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि उपजाऊ खिड़की के आसपास समयबद्ध संभोग गर्भावस्था की संभावना को बढ़ाता है। विभिन्न तरीके, जैसे मासिक धर्म चक्र को ट्रैक करना, बेसल शरीर के तापमान की निगरानी करना और ओवुलेशन प्रेडिक्टर किट का उपयोग करना, ओवुलेशन के समय की पहचान करने में मदद कर सकते हैं।

प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाले कारक ओवुलेशन से आगे बढ़कर समग्र प्रजनन स्वास्थ्य, शुक्राणु और अंडे की व्यवहार्यता और जीवनशैली कारकों को शामिल करते हैं। हार्मोनल असंतुलन, उम्र और कुछ चिकित्सीय स्थितियां जैसे मुद्दे प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे मामलों में जहां प्राकृतिक गर्भाधान चुनौतीपूर्ण साबित होता है, सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकियां गर्भावस्था प्राप्त करने के लिए वैकल्पिक रास्ते प्रदान कर सकती हैं।

ओवुलेशन और प्रजनन क्षमता जटिल रूप से जुड़े हुए हैं, जो गर्भधारण की दिशा में यात्रा में प्रमुख तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं। मासिक धर्म चक्र और प्रजनन कारकों की व्यापक समझ व्यक्तियों और जोड़ों को उनके परिवार नियोजन प्रयासों में सशक्त बनाती है।

प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाले कारक

प्रजनन क्षमता विभिन्न कारकों से प्रभावित होती है। उम्र एक महत्वपूर्ण निर्धारक है, क्योंकि अंडे की मात्रा और गुणवत्ता में कमी के कारण उम्र के साथ महिला प्रजनन क्षमता में गिरावट आती है। पुरुषों में, उम्र के साथ शुक्राणु की गुणवत्ता भी कम हो सकती है। प्रजनन स्वास्थ्य, जिसमें महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) या पुरुषों में कम शुक्राणुओं की संख्या जैसी स्थितियां शामिल हैं, प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। हार्मोनल असंतुलन, अनियमित मासिक चक्र और प्रजनन अंगों की संरचनात्मक असामान्यताएं गर्भधारण करने में कठिनाइयों का कारण बन सकती हैं।

जीवनशैली के कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खराब पोषण, अत्यधिक तनाव, धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन और मोटापा पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन क्षमता को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। इसके अतिरिक्त, अगर इलाज न किया जाए तो यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) प्रजनन संबंधी जटिलताओं का कारण बन सकता है। पर्यावरणीय कारक, जैसे विषाक्त पदार्थों और प्रदूषकों के संपर्क में आना, प्रजनन स्वास्थ्य में हस्तक्षेप कर सकते हैं। कुछ दवाएं, कीमोथेरेपी और विकिरण थेरेपी भी प्रजनन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं।

गर्भधारण करने में चुनौतियों का सामना करने वालों के लिए इन कारकों को समझना महत्वपूर्ण है। चिकित्सीय सलाह लेना, स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखना और अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान प्रजनन क्षमता को अनुकूलित करने और सफल गर्भावस्था की संभावना को बढ़ाने में योगदान दे सकता है। ऐसे मामलों में जहां प्राकृतिक गर्भधारण मुश्किल साबित होता है, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) जैसी सहायक प्रजनन तकनीकों पर विचार किया जा सकता है।

सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (एआरटी)

सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (एआरटी) में प्राकृतिक गर्भधारण चुनौतीपूर्ण साबित होने पर गर्भावस्था प्राप्त करने में सहायता के लिए डिज़ाइन की गई चिकित्सा प्रक्रियाएं शामिल हैं। ये प्रौद्योगिकियां निषेचन और आरोपण की सुविधा के लिए अंडे, शुक्राणु या भ्रूण के हेरफेर (manipulation) में सहायता करती हैं।

 

  • आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन)

आईवीएफ में शरीर के बाहर एक प्रयोगशाला डिश में अंडे और शुक्राणु का निषेचन होता है। परिणामी भ्रूण को फिर आरोपण के लिए गर्भाशय में स्थानांतरित कर दिया जाता है। आईवीएफ विभिन्न बांझपन समस्याओं के लिए व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला एआरटी है, जैसे अवरुद्ध फैलोपियन ट्यूब, पुरुष कारक इनफर्टिलिटी, या अस्पष्टीकृत इनफर्टिलिटी।

 

  • आईयूआई (अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान)

आईयूआई में महिला की उपजाऊ अवधि के दौरान कैथेटर का उपयोग करके शुक्राणु को सीधे गर्भाशय में रखना शामिल है। इस विधि का उपयोग अक्सर तब किया जाता है जब पुरुष इनफर्टिलिटी कारक मौजूद होते हैं, या गर्भाशय ग्रीवा में कोई समस्या होती है।

 

  • अन्य एआरटी विधियाँ

अन्य एआरटी विधियों में इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) शामिल है, जहां एक शुक्राणु को सीधे अंडे में इंजेक्ट किया जाता है, और गैमीट इंट्राफैलोपियन ट्रांसफर (जीआईएफटी), जहां अंडे और शुक्राणु को मिश्रित किया जाता है और निषेचन के लिए फैलोपियन ट्यूब में रखा जाता है।

 

  • एआरटी की आवश्यकता किसे हो सकती है और वे कैसे काम करते हैं?

उम्र से संबंधित गिरावट, प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं या अस्पष्टीकृत कारकों सहित विभिन्न कारणों से निःसंतानता का सामना करने वाले दम्पतियों के लिए एआरटी की सिफारिश की जाती है। इन विधियों का उद्देश्य विशिष्ट प्रजनन चुनौतियों को दरकिनार या संबोधित करके गर्भधारण की संभावनाओं को बढ़ाना है, जिससे दम्पतियों को एक सफल गर्भावस्था प्राप्त करने की अवसर प्राप्त होता है।

 

  • एआरटी की सफलता दर और उसपर विचार

एआरटी की सफलता दर उम्र, स्वास्थ्य और उपयोग की जाने वाली विशिष्ट विधि जैसे कारकों के आधार पर भिन्न होती है। आमतौर पर, कम उम्र और स्वस्थ व्यक्ति उच्च सफलता दर से संबंधित होते हैं। विचारों में एआरटी से गुजरने के भावनात्मक, शारीरिक और वित्तीय पहलुओं के साथ-साथ संभावित जोखिम और नैतिक विचार भी शामिल हैं। एआरटी पर विचार करने वाले या उससे गुजरने वालों के लिए उनकी प्रजनन यात्रा के बारे में सूचित निर्णय लेने के लिए परामर्श और व्यापक चिकित्सा मूल्यांकन आवश्यक कदम हैं।

गर्भावस्था की योजना और तैयारी

परिवार शुरू करने के इच्छुक दम्पतियों के लिए गर्भावस्था की योजना और तैयारी आवश्यक कदम हैं। इस प्रक्रिया में स्वस्थ गर्भावस्था और भविष्य के बच्चे की भलाई की संभावनाओं को अनुकूलित करने के लिए शारीरिक और भावनात्मक दोनों तरह के विचार शामिल हैं।

शारीरिक रूप से, भावी माता-पिता को अच्छा समग्र स्वास्थ्य प्राप्त करने और बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इसमें संतुलित आहार बनाए रखना, नियमित व्यायाम करना और तंबाकू, अत्यधिक शराब और मनोरंजक दवाओं जैसे हानिकारक पदार्थों से बचना शामिल है। विकासशील भ्रूण में न्यूरल ट्यूब दोष के जोखिम को कम करने के लिए महिलाएं फोलिक एसिड सहित प्रसवपूर्व विटामिन लेने पर भी विचार कर सकती हैं।

भावनात्मक रूप से, भागीदारों के बीच खुला संचार महत्वपूर्ण है। अपेक्षाओं, पालन-पोषण की शैलियों पर चर्चा करना और किसी भी चिंता या चिंताओं को संबोधित करना एक सहायक वातावरण को बढ़ावा दे सकता है। एक्सपर्ट से गर्भधारण पूर्व परामर्श लेने से प्रजनन क्षमता, संभावित जोखिमों और स्वस्थ गर्भावस्था की संभावनाओं को अनुकूलित करने के कदमों के बारे में बहुमूल्य जानकारी मिल सकती है।

प्रजनन क्षमता या गर्भावस्था को प्रभावित करने वाली किसी भी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या की पहचान करने और उसका समाधान करने के लिए दोनों भागीदारों के लिए चिकित्सा जांच आवश्यक है। मासिक धर्म चक्र को समझना, ओव्यूलेशन पर नज़र रखना और उपजाऊ खिड़की को जानना गर्भधारण के समय को बढ़ा सकता है।

गर्भावस्था की योजना में पारिवारिक चिकित्सा इतिहास और आनुवंशिक कारकों के बारे में जागरूक होना भी शामिल है जो भविष्य के बच्चे के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। बच्चे के लिए भावनात्मक और शारीरिक रूप से स्वागत योग्य और सुरक्षित वातावरण बनाना तैयारी का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

प्रजनन क्षमता और गर्भधारण से संबंधित मिथक और तथ्य

मिथक: आप केवल ओव्यूलेशन वाले दिन ही गर्भवती हो सकती हैं।

तथ्य: ओव्यूलेशन सबसे उपजाऊ अवधि है, शुक्राणु महिला प्रजनन पथ में कई दिनों तक जीवित रह सकते हैं। उपजाऊ खिड़की ओव्यूलेशन से कुछ दिन पहले और बाद में फैलती है, जिससे गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है।

मिथक: हर दिन सेक्स करने से गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है।

तथ्य: बार-बार स्खलन से शुक्राणुओं की संख्या कम हो सकती है। महिला की उपजाऊ अवधि के दौरान, आमतौर पर ओव्यूलेशन के आसपास, समय पर संभोग करना गर्भधारण के लिए अधिक प्रभावी होता है।

मिथक: कुछ यौन स्थितियां शिशु के लिंग को प्रभावित कर सकती हैं।

तथ्य: शिशु का लिंग अंडे को निषेचित करने वाले शुक्राणु (एक्स या वाई क्रोमोसोम) द्वारा निर्धारित होता है। कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण इस विचार का समर्थन नहीं करता है कि विशिष्ट स्थिति लिंग परिणाम को प्रभावित करती है।

मिथक: तनाव गर्भावस्था को रोक सकता है।

तथ्य: हालांकि, पुराना तनाव समग्र स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है, लेकिन कभी-कभार तनाव से गर्भधारण में बाधा आने की संभावना नहीं है। हालाँकि, गर्भाधान यात्रा के दौरान समग्र कल्याण के लिए तनाव का प्रबंधन महत्वपूर्ण है।

मिथक: महिलाएं मासिक धर्म के दौरान गर्भवती नहीं हो सकतीं।

तथ्य: हालांकि, संभावना कम है, शुक्राणु प्रजनन पथ में कई दिनों तक जीवित रह सकते हैं, जिससे मासिक धर्म के तुरंत बाद ओव्यूलेशन होने पर गर्भधारण करना संभव हो जाता है।

मिथक: यदि किसी महिला का अतीत में गर्भपात हुआ हो तो उसे हमेशा प्रजनन संबंधी समस्याओं का अनुभव होगा।

तथ्य: अधिकांश गर्भपात भविष्य की प्रजनन क्षमता को प्रभावित नहीं करते हैं। जटिलताएँ दुर्लभ हैं, और गर्भपात के बाद महिलाएँ आमतौर पर गर्भधारण कर सकती हैं और स्वस्थ गर्भधारण कर सकती हैं।

मिथक: जन्म नियंत्रण स्थायी रूप से प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है।

तथ्य: अधिकांश गर्भनिरोधक विधियाँ प्रतिवर्ती हैं। जन्म नियंत्रण बंद करने के बाद प्रजनन क्षमता आमतौर पर वापस आ जाती है, हालांकि, समय सीमा अलग-अलग व्यक्तियों में अलग-अलग होती है।

मिथक: एक महिला को गर्भधारण करने के लिए ऑर्गेज्म की आवश्यकता होती है।

तथ्य: गर्भावस्था का निर्धारण शुक्राणु द्वारा अंडे को निषेचित करने से होता है। महिला ऑर्गेज्म गर्भधारण के लिए आवश्यक जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित नहीं करता है।

गर्भधारण और गर्भावस्था के बारे में सटीक जानकारी चाहने वालों के लिए इन मिथकों को दूर करना महत्वपूर्ण है। विज्ञान समर्थित तथ्यों को समझने से आपको सूचित निर्णय लेने और आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रजनन यात्रा को आगे बढ़ाने में सशक्त बनाया जा सकता है। व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर व्यक्तिगत मार्गदर्शन के लिए एक्सपर्ट से परामर्श करना उचित है।

जो लोग निःसंतानता की जटिलताओं से जूझ रहे हैं, उनके लिए प्रजनन विशेषज्ञों से परामर्श करना माता-पिता बनने की राह पर एक महत्वपूर्ण और सशक्त निर्णय है। प्रजनन विशेषज्ञ व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुरूप सहायता और साक्ष्य-आधारित समाधान प्रदान करने के लिए विशिष्ट रूप से सुसज्जित हैं। इन विशेषज्ञों के साथ बातचीत शुरू करने से प्रजनन स्वास्थ्य के व्यापक मूल्यांकन का द्वार खुलता है, जिससे मौजूदा चुनौतियों की गहरी समझ संभव हो पाती है। 

प्रजनन विशेषज्ञ दम्पतियों को सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकियों (एआरटी) की एक श्रृंखला के माध्यम से मार्गदर्शन कर सकते हैं, जिसमें इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) और अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान (आईयूआई) शामिल हैं, जो गर्भधारण की संभावनाओं को अनुकूलित करने के लिए व्यक्तिगत उपचार योजनाओं में शामिल हैं। 

 

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महिलाएं गर्भावस्था के लिए अपने शरीर को कैसे तैयार कर सकती हैं — How Can Women Prepare Their Body For Pregnancy

जल्दी प्रेगनेंट होने के लिए क्या करें (How to Get Pregnant Fast)

अगर आप गर्भधारण करने की योजना बना रही हैं तो आपको यह मालूम होना चाहिए कि एक सफल गर्भावस्था के लिए आपका स्वस्थ होना आवश्यक है। आपके स्वास्थ्य का सीधा असर आपके शिशु पर पड़ता है।

यही कारण है कि एक महिला के गर्भधारण करने से पहले डॉक्टर उसे अपनी सेहत और खान-पान पर खास ध्यान देने के सुझाव देते हैं। 

अगर आप एक महिला हैं और आप खुद को गर्भधारण के लिए तैयार कर रही हैं तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जिसमें निम्न शामिल हैं:-

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01. डॉक्टर से मिलें

अगर आप गर्भधारण करने की सोच रही हैं तो सबसे पहले डॉक्टर से मिलें। डॉक्टर जांच करके आपकी प्रजनन क्षमता और ओवुलेशन आदि की पुष्टि कर सकते हैं जिसके बाद आवश्यकता होने पर वह कुछ टिप्स और सुझाव भी दे सकते हैं।

02. विटामिन बी से भरपूर चीजों को अपनी डाइट में शामिल करें

अपनी डाइट में विटामिन बी से भरपूर चीजें जैसे कि हरी पत्तेदार सब्जियों, साबुत अनाज, अंडे और मांस को शामिल करें।

03. फोलिक एसिड से भरपूर चीजों का सेवन करें

फोलिक एसिड से भरपूर चीजें जैसे कि सोयाबीन, आलू, गेंहू, चुकंदर, केला और ब्रोकली आदि का सेवन करने। ये आपके गर्भधारण करने की क्षमता को बढ़ाने का काम करते हैं।

04. पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं

अगर आप गर्भधारण करने यानी बच्चा पैदा करने की सोच रही हैं तो आपको पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आपके शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन न हो।

05. डेयरी उत्पादों का करें सेवन

डेयरी उत्पाद कैल्शियम से भरपूर होते हैं जो आपकी प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ आपकी हड्डियों को भी मजबूत बनाते हैं। 

अगर आपकी प्रजनन क्षमता कमजोर है तो आप दूध, दही, अंडे और मछली आदि को अपनी डाइट में शामिल कर सकती हैं।

06. ओमेगा 3 फैटी एसिड है जरूरी

अगर आप मां बनने का प्लान बन रही हैं तो आपको ओमेगा 3 से भरपूर चीजों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। बादाम, अखरोट और मछली ओमेगा 3 फैटी एसिड के बड़े स्रोत हैं।

इन सबके आलावा, आपको ताजा फलों का सेवन करना चाहिए। अपने शरीर को चुस्त और दुरुस्त रखने के लिए आप रोजाना सुबह या शाम में हल्का-फुल्का व्यायाम कर सकती हैं। 

साथ ही, मन को शांत और मजबूत बनाने के लिए आप मेडिटेशन कर सकती हैं।

निष्कर्ष

प्रेगनेंसी एक लंबी प्रक्रिया है जिसके दौरान एक महिला में अनेक बदलाव आते हैं। अगर आप गर्भधारण करने का प्लान बना रही हैं तो आपके मन में ऐसे ढेरों प्रश्न हो सकते हैं कि गर्भधारण कैसे करते हैं, गर्भधारण की सबसे शुरुआती स्टेज क्या है और प्रेगनेंट होने के लिए पुरुष और महिला की प्रजनन शक्ति किस हद तक मायने रखती है आदि।

अगर आपके मन में pregnant kaise hote hai, pregnancy kaise hoti hai ya pregnancy ke shuruati stage आदि से संबंधित प्रश्न हैं तो हम उम्मीद करते हैं कि इस ब्लॉग को पढ़ने के बाद आपको अपने प्रश्नों के उत्तर मिल गए होंगे।

अगर आप बांझपन से पीड़ित हैं या आपको किसी कारणवश गर्भधारण करने में समस्याएं आ रही हैं तो आप अभी अपॉइंटमेंट बुक कर हमारे फर्टिलिटी एक्सपर्ट से परामर्श कर अपनी परेशानियों का समाधान प्राप्त कर सकती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:-

  • जल्दी गर्भ ठहरने के लिए क्या करना चाहिए?

जल्दी गर्भधारण के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और उचित तनाव प्रबंधन के साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। अपने मासिक धर्म चक्र पर नज़र रखें, फर्टाइल पीरियड के दौरान नियमित यौन गतिविधियों में शामिल रहें और धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें। अगर किसी तरह की परेशानी बनी रहती हैं, तो मार्गदर्शन के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ या प्रजनन विशेषज्ञ से परामर्श करें।

  • प्रेगनेंसी का पहला संकेत क्या है?

प्रेगनेंसी के सबसे आम संकेतों में पीरियड नहीं आना, मतली और उल्टी होना, स्तनों में कोमलता आना, चक्कर आना और कमजोरी होना आदि शामिल हैं। कुछ महिलाऐं अन्य लक्षण भी अनुभव कर सकती हैं। हालाँकि, कुछ महिलाओं को शुरुआती लक्षण अनुभव भी नहीं होते हैं।

  • प्रेग्नेंट कैसे होते हैं कितने दिन में?

गर्भधारण की संभावना को अधिकतम करने के लिए, ओव्यूलेशन के आसपास, महिला की उपजाऊ अवधि के दौरान नियमित, असुरक्षित संभोग करने से प्रेग्नेंट होने की संभावना सबसे अधिक होती है। ओव्यूलेशन अगले मासिक धर्म से लगभग 14 दिन पहले होता है। उपजाऊ दिन ओव्यूलेशन से कुछ दिन पहले और बाद में होते हैं। हालाँकि, गर्भधारण का समय अलग-अलग होता है, लेकिन इस अवधि के दौरान लगातार प्रयास करने से गर्भवती होने की संभावना बढ़ जाती है।

  • पीरियड्स के कितने दिन बाद आप प्रेग्नेंट हो सकती हैं?

एक महिला की उपजाऊ अवधि के दौरान गर्भावस्था होने की सबसे अधिक संभावना होती है, जो आमतौर पर ओव्यूलेशन के आसपास होती है, अगले मासिक धर्म से लगभग 14 दिन पहले। उपजाऊ दिन ओव्यूलेशन से कुछ दिन पहले और बाद तक बढ़ते हैं। जबकि सटीक समय महिलाओं और मासिक धर्म चक्रों के बीच भिन्न हो सकता है, इस अवधि के दौरान असुरक्षित संभोग में शामिल होने से गर्भवती होने की संभावना बढ़ जाती है।

Written by:
Dr Prachi Benara

Dr Prachi Benara

Consultant
Dr Prachi Benara is a skilled infertility specialist with more than a decade of experience. Trained from some of the most premier institutes in the field in India which include Maulana Azad Medical College, BJ Medical College (Ahmedabad), PG Diploma in Reproductive and Sexual Health. She further trained in the United Kingdom to pursue her interest in Reproductive medicine and IVF. Her focus areas include advanced laparoscopic and hysteroscopic surgery, IVF, IUI, Frozen embryo transfer and correction of uterine anomalies including uterine septum to improve chances of pregnancy.

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