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Birla Fertility & IVF
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आईयूआई क्या है – प्रक्रिया, फायदे, नुकसान और खर्च (IUI Treatment in Hindi)

  • Published on March 05, 2022
आईयूआई क्या है – प्रक्रिया, फायदे, नुकसान और खर्च (IUI Treatment in Hindi)

निःसंतानता यानी इनफर्टिलिटी के मामले बहुत तेजी बढ़ रहे हैं। अस्वास्थ्य खान-पान, निष्क्रिय जीवनशैली, शराब और सिगरेट का सेवन, पर्सनल और प्रोफेशनल जीवन में उत्पन्न तनाव पुरुष और महिला दोनों की प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।

प्रजनन क्षमता यानी फर्टिलिटी प्रभावित होने पर, गर्भधारण करने में अनेकों परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालाँकि, मेडिकल टेक्नोलॉजी में प्रगति होने के कारण आज हमारे पास आईयूआई (iui treatment in hindi) जैसे मॉडर्न और एडवांस इलाज का विकल्प मौजूद है।

Table of Contents

आईयूआई क्या होता है  (What is IUI Treatment in Hindi)

इंट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन को आम बोलचाल की भाषा में आईयूआई और हिंदी में अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान (IUI in Hindi) के नाम से जाना जाता है। यह एक मॉडर्न और एडवांस बांझपन उपचार यानी इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट है।

आईयूआई उन लोगों को संतान का सुख प्राप्त करने में मदद कर सकता है जो किसी कारणवश गर्भधारण करने में असमर्थ हैं। स्पर्म से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित पुरुष और फैलोपियन ट्यूब में ब्लॉकेज से पीड़ित महिलाओं के लिए यह एक प्रभावशाली इलाज है।

इलाज की इस प्रक्रिया के दौरान, फर्टिलिटी डॉक्टर पुरुष के वीर्य से शुक्राणु को अलग करके लैब में उसका शुद्धिकरण करते हैं। उसके बाद, विशेष रूप से तैयार किए गए स्पर्म को एक कैथेटर की मदद से महिला के गर्भाशय में रखा जाता है।

आमतौर पर, आईयूआई को ओव्यूलेशन बढ़ाने वाली दवा के साथ किया जाता है। यह प्रक्रिया अकेली महिलाओं और समलैंगिग जोड़ों को दान किए गए स्पर्म से गर्भधारण करने में मदद कर सकती है।

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आईयूआई की प्रक्रिया (IUI Process in Hindi)

आईयूआई एक दर्द रहित प्रक्रिया है। कुछ मामलों में आईयूआई को प्राकृतिक मेंस्ट्रुअल साइकिल के दौरान किया जाता है जिसमें दवाओं की आवश्यकता नहीं पड़ती है। जब आप प्राकृतिक रूप से ओव्युलेट करती है तो डॉक्टर क्लिनिक सेटअप में ओव्यूलेशन के दौरान स्पर्म को आपके गर्भाशय में रखते हैं।

साथ ही, आईयूआई को ओवेरियन स्टिमुलेशन के साथ भी किया जा सकता है। डॉक्टर क्लोमीफीन साइट्रेट, ह्यूमन कोरिओनिक गोनाडोट्रोपिन (एचसीजी) और फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हार्मोन (एफएसएच) दवा निर्धारित कर सकते हैं ताकि ओवरी एक या एक से अधिक अंडे को मैच्योर करके उन्हें रिलीज कर सके।

ओव्यूलेशन के दौरान एक से अधिक अंडे रिलीज होने पर गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। आईयूआई की प्रक्रिया क्लिनिक, हॉस्पिटल और डॉक्टर के अनुसार बदल सकती है।

आईयूआई के लिए आपको निम्न प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है:-

  • आपको डॉक्टर के साथ कई बार फॉलो-अप मीटिंग करनी पड़ती है जिसमें अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट और दवाओं का निर्धारण आदि शामिल है।
  • दवाएं निर्धारित होने पर आप अपनी पीरियड के दौरान इसका सेवन कर सकती हैं।
  • दवाओं का सेवन शुरू करने के एक सप्ताह बाद आपको दोबारा अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट के लिए क्लिनिक बुलाया जाता है।
  • टेस्ट के परिणामों के आधार पर डॉक्टर इस बात की पुष्टि करते हैं कि आप कब ओव्युलेट करेंगी।
  • आईयूआई वाले दिन पुरुष पार्टनर क्लिनिक में अपना सीमेन सैम्पल प्रदान करते हैं या डोनर स्पर्म को तैयार किया जाता है।
  • स्पर्म मिलने के बाद, लैब में स्पर्म का शुद्धिकरण किया जाता है ताकि यूटेरस में जलन या दूसरी कोई समस्या न हो।

आईयूआई के लिए एनेस्थीसिया की आवश्यकता नहीं पड़ती है। आईयूआई की प्रक्रिया में निम्न बिंदुएं शामिल हैं।

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  • सबसे पहले आपको एक एक्जाम टेबल पर लेटने को कहा जाएगा।
  • डॉक्टर स्पेकुलम नामक उपकरण का इस्तेमाल कर योनि (वजाइना) को खोलते हैं ताकि यूटेरस को देख सकें।
  • एक लंबी और पतली ट्यूब का इस्तेमाल करके डॉक्टर स्पर्म को सर्विक्स से होते हुए गर्भाशय (यूट्रस) में प्रवेश करते हैं।
  • उसके बाद, आपको एक्जाम टेबल पर लगभग 20-30 मिनट तक लेटे रहने का सुझाव दिया जाता है।
  • प्रक्रिया खत्म होने के कुछ ही घंटों बाद आपको क्लिनिक से डिस्चार्ज कर दिया जाता है।

अधिकतर महिलाओं को आईयूआई के बाद हल्का या बिल्कुल भी दर्द नहीं होता है। हालांकि, कुछ महिलाओं को गर्भाशय में हल्की ऐंठन या वेजाइनल ब्लीडिंग का अनुभव हो सकता है।

आईयूआई के बाद गर्भावस्था की जाँच (Pregnancy Test After IUI Treatment in Hindi)

आईयूआई उपचार के लगभग दो सप्ताह बाद डॉक्टर जाँच की मदद से आपकी गर्भावस्था की पुष्टि करते हैं। प्रेगनेंसी किट की मदद से आप घर पर भी प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती हैं। हालाँकि, क्लिनिक में डॉक्टर के मार्गदर्शन में प्रेगनेंसी टेस्ट कराना बेहतर होता है।

अगर आप आईयूआई के बाद गर्भधारण नहीं कर पाती हैं तो बांझपन के अन्य उपचार का सुझाव देने से पहले आमतौर पर डॉक्टर दोबारा आईयूआई उपचार का सुझाव देते हैं।

आईयूआई के फायदे (Benefits of IUI in Hindi)

आईयूआई के अनेको फायदों के कारण है कि इसकी डिमांड लगातार बढ़ रही है। आईयूआई के निम्नलिखित फायदे हैं:-

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  • कम से कम इनवेसिव प्रक्रिया है
  • आईवीएफ या आईसीएसआई की तुलना में सस्ता है
  • शरीर पर कम से कम प्रेशर डालता है
  • वाशिंग प्रक्रिया स्पर्म की गुणवत्ता को बढ़ाता है जिससे जटिलताओं का खतरा कम या खत्म हो जाता है
  • इसे ट्रांसवजाइनल अल्ट्रासाउंड के साथ या बगैर भी किया जा सकता है।
  • डॉक्टर योनि और सर्विक्स में कैथेटर को प्रवेश करते हैं। उसके बाद, डॉक्टर कैथेटर को सर्विकल कैनाल के माध्यम से पुश करके उसे गर्भाशय के ऊपर और दायीं या बायीं फैलोपियन ट्यूब की ओर इंगित करते हैं। अंतत: स्पर्म को कैथेटर से गर्भाशय में इंजेक्ट किया जाता है।
  • इस प्रक्रिया को पूरा होने में मात्र 10-20 मिनट का समय लगता है। प्रक्रिया खत्म होने के बाद आपको 15-20 मिनट के लिए रिकवरी रूम शिफ्ट किया जाता है।
  • यह एक दिन की प्रक्रिया है, इसलिए आपको क्लिनिक में रुकने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
  • आईयूआई उपचार के लिए एनेस्थीसिया की आवश्यकता नहीं पड़ती है। साथ ही, इस प्रक्रिया के दौरान दर्द नहीं होता है।

आईयूआई की आवश्यकता किसे है  (Who Needs IUI in Hindi)

आईयूआई की आवश्यकता अनेकों लोगों को हो सकती है जैसे कि:-

  • अस्पष्टीकृत बांझपन से पीड़ित महिलाएं
  • वीर्य असामान्यताएं और स्खलन दोष (इजेकुलेटरी डिस्फंक्शन) से पीड़ित पुरुष पार्टनर
  • पीसीओएस या हाइपोथैलमिक समस्याओं से पीड़ित महिलाएं जो ओव्युलेट नहीं कर सकती हैं
  • पुरुष पार्टनर जिसके पास जमे हुए स्पर्म हैं और उसे सर्जरी, यात्रा या बीमारियों के इलाज से पहले प्राप्त किया गया हो।
  • कोई भी व्यक्ति जिसे डोनर स्पर्म की आवश्यकता है जैसे कि LGBT कपल्स, हेट्रोसेक्सुअल कपल्स या अकेली महिलाएं जो गर्भधारण करना चाहती हैं।

आईयूआई का चयन किसे नहीं करना चाहिए (Who Should Not Opt For IUI in Hindi)

जहाँ एक तरफ आईयूआई बांझपन का प्रभावशाली उपचार है। वहीं दूसरी तरफ, कुछ खास परिस्थितियों में इसका उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।

अगर आप नीचे दी गई समस्याओं से खुद को जोड़ सकती हैं तो आपको आईयूआई का चयन नहीं करना चाहिए।

  • गंभीर एंडोमेट्रियोसिस होना
  • फैलोपियन ट्यूब से संबंधित गंभीर बीमारी होना
  • फैलोपियन ट्यूब का ब्लॉक होना या न होना
  • पेल्विक इंफेक्शन होना
  • स्पर्म की क्वालिटी खराब होना

आमतौर पर, ऊपर बताई गई परिस्थितियों में डॉक्टर आईयूआई की जगह इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) का सुझाव देते हैं।

आईयूआई के नुकसान (Side Effects of IUI in Hindi)

आईयूआई उपचार के बाद संक्रमण (इंफेक्शन) का खतरा लगभग न के बराबर होता है। डॉक्टर स्टेराइल इंस्ट्रूमेंट्स का उपयोग करते हैं ताकि इंफेक्शन का खतरा न हो। ओव्यूलेशन प्रेरित करने वाली दवाओं का उपयोग करने पर अनेकों शिशु के साथ गर्भधारण की संभावना होती है।

फर्टिलिटी दवाओं (प्रजनन दवाओं) का उपयोग करने पर ओवरी से एक से अधिक अंडे रिलीज होते हैं। यही कारण है कि एक से अधिक शिशु के साथ गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। डॉक्टर दवाओं, अल्ट्रासाउंड और प्रॉपर मॉनिटरिंग करके इस बात की पुष्टि करते हैं कि एक समय पर ओवरी से एक ही अंडा रिलीज हो।

कभी-कभी ओवरी फर्टिलिटी दवाओं (विशेषकर इंजेक्शन के रूप में दी जाने वाली दवाओं) के प्रति अति-प्रतिक्रिया करते हैं जिसके परिणामस्वरूप डिम्बग्रंथि हाइपरस्टिम्यूलेशन सिंड्रोम (Ovarian Hyperstimulation Syndrome) हो सकती है।

एक ही समय पर एक से अधिक अंडे मैच्योर होकर ओवरी से रिलीज होने पर बढ़े हुए अंडाशय (Enlarged Ovary), पेट में द्रव निर्माण और ऐंठन की शिकायत हो सकती है।

दुर्लभ मामलों में डिम्बग्रंथि हाइपरस्टिम्यूलेशन सिंड्रोम के कारण छाती और पेट में द्रव निर्माण, किडनी और अंडाशय संबंधित समस्याएं और खून के थक्के बनने का खतरा भी बढ़ जाता है।

आईयूआई में आने वाले जोखिम का खतरा काफी कम होता है, लेकिन आपको इस प्रक्रिया के लिए एक अनुभवी और कुशल डॉक्टर का चयन करना चाहिए ताकि इसके सफल होने की संभावना अधिक और जटिलताओं या नुकसान का खतरा कम हो।

आईयूआई से पहले कौन से जाँच किए जाते हैं (Tests Done Before IUI in Hindi)

आईयूआई उपचार शुरू करने से पहले डॉक्टर पुरुष और महिला दोनों को कुछ महत्वपूर्ण जाँच करने का सुझाव देते हैं। इंट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन (आईयूआई) से पहले किए जाने वाले जाँचों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:-

  • सीमेन टेस्ट
  • एचटीएलवी
  • आरपीआर
  • एचएसजी
  • प्रोलैक्टिन
  • थायराइड
  • एचआईवी
  • एंटी एचआईवी
  • वीडीआरएल

आईयूआई उपचार से पहले जाँच करने से बांझपन के सटीक कारण और दूसरी बीमारियों की पुष्टि होती है एवं उपचार के सफल होने की संभावना बढ़ती है।

आईयूआई उपचार के बाद किन बातों का ध्यान रखें  (Things to Keep in Mind After IUI in Hindi)

आईयूआई उपचार के बाद गर्भधारण की संभावना को बढ़ाने के लिए आपको काफी सावधानियां बरतनी चाहिए जिसमें मुख्य रूप से निम्न शामिल हैं:-

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  • खुश रहें
  • तनाव से दूर रहें
  • मेडिटेशन करें
  • रोजाना हल्का व्यायाम करें
  • प्रजनन शक्ति बढ़ने वाले पोषक तत्व जैसे कि एंटी-ऑक्सीडेंट्स, फाइबर, डेयरी और प्रोटीन आदि से भरपूर खान-पान की चीजों को अपनी डाइट में शामिल करें।
  • कम से कम मीठी चीजों का सेवन करें
  • बाहर का खाना बंद कर दें
  • अधिक तैलीय और मसालेदार चीजों का सेवन न करें

इन सबके अलावा, नियमित रूप से अपने डॉक्टर से मिलें और अपनी प्रेगनेंसी की प्रोग्रेस के बारे में अपडेट रहें।

आईयूआई उपचार के बाद डॉक्टर से कब मिलें (When to See Doctor After IUI Treatment in Hindi)

अगर आप आईयूआई के लिए प्रजनन दवाओं का सेवन कर रही हैं और नीचे दिए गए लक्षणों को अनुभव करती हैं तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए।

  • चक्कर आना
  • सिर हल्का होना
  • अचानक 2-3 किलोग्राम वजन बढ़ना
  • साँस लेने में तकलीफ होना
  • मतली आना और उल्टी होना
  • श्रोणि या पेट में तेज दर्द होना
  • अचानक से पेट का आकार बढ़ जाना

 

आईयूआई की सफलता दर — Success Rate of Intrauterine Insemination (IUI) in Hindi

आईयूआई की सफलता दर काफी कारकों पर निर्भर करती है जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:-

  • महिला की उम्र
  • बाँझपन का कारण
  • प्रजनन दवाओं का उपयोग
  • अंतर्निहित प्रजनन संबंधित अन्य चिंताएं

आईयूआई की सक्सेस टिप्स में यही कहा जा सकता है कि, कुछ हद तक प्रसूति स्त्री रोग विशेषज्ञ का अनुभव भी आईयूआई की सफलता दर में मुख्य भूमिका निभा सकता है। इसलिए आपको आईयूआई के लिए एक अनुभवी और विश्वसनीय डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

भारत में आईयूआई का खर्च (Bharat Me IUI Ka Kharch)

आमतौर पर, भारत में एक आईयूआई साइकिल का खर्च लगभग 3-5 हजार रुपए आता है। अगर आप पहली साइकिल में ही गर्भधारण कर लेती हैं तो प्रेगनेंसी की पूरी प्रक्रिया में लगभग 15-25 हजार तक का खर्च आ सकता है।

हालाँकि, आईयूआई का खर्च काफी कारकों पर निर्भर करता है। आईयूआई उपचार के खर्च को प्रभावित करने वाले कारक निम्न हैं:-

  • शहर
  • क्लिनिक का प्रकार
  • डॉक्टर का अनुभव और विश्वसनीयता
  • आईयूआई से पहले किए जाने वाले जाँच
  • आईयूआई साइकिल की संख्या

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न :

1. आईयूआई क्यों किया जाता है?

आईयूआई अक्सर ओव्यूलेशन-प्रेरक दवाओं के साथ-साथ अस्पष्टीकृत बांझपन के लिए प्राथमिक उपचार के रूप में किया जाता है।

2. क्या आईयूआई के दौरान दर्द होता है?

आईयूआई उपचार के दौरान मरीज को दर्द नहीं होता है। हालाँकि, कुछ महिलाओं को हल्का दर्द अनुभव हो सकता है। तेज दर्द की स्थिति में तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

3. क्या आईयूआई के दौरान रक्तस्राव (ब्लीडिंग) होता है?

आईयूआई एक नॉन-सर्जिकल प्रक्रिया है जिसके दौरान ब्लीडिंग का खतरा नहीं होता है। आईयूआई के दुष्प्रभावों में हल्की ब्लीडिंग शामिल है।

4. आईयूआई कितनी बार करनी चाहिए?

अगर महिला की उम्र 35 वर्ष से कम है तो डॉक्टर 3-6 बार आईयूआई कराने का सुझाव दे सकते हैं। हालाँकि, 35 से अधिक उम्र होने पर आईयूआई के सफल होने की संभावना बहुत कम होती है, इसलिए एक अनुभवी फर्टिलिटी डॉक्टर से परामर्श करने के बाद आपको इस बात की पुष्टि करनी चाहिए कि आपके लिए अन्य बेस्ट विकल्प क्या हैं।

5. आईयूआई सक्सेस होने के क्या लक्षण हैं?

आईयूआई सफल होने पर आप खुद में कुछ लक्षणों को अनुभव कर सकती हैं। ये लक्षण इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आप गर्भधारण कर चुकी हैं।

  • इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग होना
  • पीरियड्स में देरी होना
  • स्तनों का सॉफ्ट होना
  • थकान महसूस करना
  • कमजोरी होना
  • जी मिचलाना
  • उल्टी होना
  • बार-बार कुछ न कुछ खाने की लालसा होना

6. क्या हम आईयूआई के बाद सेक्स कर सकते हैं?

आमतौर पर आईयूआई उपचार के बाद सेक्स करने का सुझाव दिया जाता है, क्योंकि इससे गर्भधारण की संभावना बढ़ती है। लेकिन ट्रिगर शॉट के बाद सेक्स न करने का सुझाव दिया जाता है। कुछ मामलों में डॉक्टर आईयूआई के 48 घंटों के बाद सेक्स करने की सलाह देते हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

7. आईयूआई के बाद गर्भ ठहरने में कितना समय लगता है?

आईयूआई उपचार के बाद फर्टिलाइजेशन में एक से दो दिन का समय लगता है, कुछ मामलों में आईयूआई के कुछ ही घंटों के बाद फर्टिलाइजेशन हो जाता है। स्पर्म महिला की रिप्रोडक्टिव सिस्टम में लगभग 7 दिनों तक रह सकता है। अगर किसी कारणों से ओव्यूलेशन में देरी होती है तो अंडे अगले सात दिनों के अंदर फर्टिलाइज होते हैं। हालाँकि, ऐसा बहुत कम मामलों में होता है क्योंकि डॉक्टर जानबूझकर ओव्यूलेशन के तुरंत पहले आईयूआई उपचार करते हैं।

8. क्या आईयूआई गर्भावस्था सुरक्षित है?

हाँ. आईयूआई गर्भावस्था बिलकुल प्राकृतिक और सुरक्षित है। इसके बारे में आपको ज्यादा सोचने या टेंशन लेने की आवश्यकता नहीं है। इस उपचार से पहले, दौरान और बाद में आपको कुछ बातों का ध्यान देना होता है ताकि गर्भधारण की संभावना अधिक और जटिलताओं का खतरा कम से कम हो।

9. क्या हम आईयूआई के बाद काम पर जा सकते हैं?

आईयूआई उपचार के बाद आपको लगभग आधा घंटा के लिए बेड रेस्ट की आवश्यकता होती है। उसके बाद, आपको क्लिनिक से डिस्चार्ज कर दिया जाता है। आईयूआई के 1-2 दिन बाद से आप दैनिक जीवन के कामों को दोबारा शुरू कर सकती हैं।

10. आईयूआई को पूरा होने में कितना समय लगता है?

आईयूआई उपचार को पूरा होने में मात्र 10-20 मिनट का समय लगता है। यह एक दिन की प्रक्रिया है, इसलिए उपचार के बाद क्लिनिक में रुकने की आवश्यकता नहीं होती है।

मुख्य बिंदु

  • दुनिया भर में प्रजनन आयु वर्ग के 15% कपल्स बांझपन से प्रभावित होते हैं।
  • भारत में प्राथमिक बांझपन का कुल प्रसार 3.9 से 16.8% के बीच है।
  • वैश्विक स्तर पर 48 मिलियन कपल्स (जोड़े) और 186 मिलियन इंडिविजुअल्स (व्यक्ति) बांझपन से पीड़ित हैं।
  • बांझपन दुनिया भर में प्रजनन आयु वर्ग के लाखों लोगों को प्रभावित करता है जिसका प्रभाव अंतत: उनके परिवारों और समुदायों पर पड़ता है।
  • भारतीय राज्यों में बांझपन की व्यापकता एक राज्य से दूसरे राज्य में भिन्न होती है जैसे उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र में 3.7 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 5 प्रतिशत और कश्मीर में 15 प्रतिशत आदि।
  • पुरुष प्रजनन प्रणाली में बांझपन के मुख्य कारणों में वीर्य की अस्वीकृति, शुक्राणु की अनुपस्थिति या निम्न स्तर, या असामान्य आकार (मॉर्फोलॉजी) और शुक्राणु की गति (गतिशीलता) आदि शामिल हैं।
  • महिला प्रजनन प्रणाली में बांझपन के कई कारण हो सकते हैं जिसमें मुख्य रूप से ओवरी, यूट्रस (गर्भाशय) और फैलोपियन ट्यूब में असामान्यताएं और अंत:स्रावी तंत्र (Endocrine System) आदि शामिल हैं।
  • बांझपन दो प्रकार के हो सकते हैं जिसमें प्राथमिक बांझपन और माध्यमिक बांझपन शामिल हैं। जब किसी व्यक्ति को कभी गर्भावस्था हासिल नहीं होती है तो उसे प्राथमिक बांझपन की श्रेणी में रखा जाता है, जबकि माध्यमिक बांझपन की स्थिति में व्यक्ति को कम से कम एक बार पूर्व गर्भावस्था हासिल हो चुकी होती है।
Written by:
Dr. Prachi Benara

Dr. Prachi Benara

Consultant
Dr. Prachi Benara is a fertility specialist known for her expertise in advanced laparoscopic and hysteroscopic surgeries, addressing a wide range of conditions including endometriosis, recurrent miscarriage, menstrual disorders, and uterine anomalies like uterine septum. With a wealth of global experience in the field of fertility, she brings advanced expertise to her patients' care.
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