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पुरुष बांझपन के कारण, लक्षण और उपचार (Male Infertility in Hindi)

  • Published on June 01, 2022
पुरुष बांझपन के कारण, लक्षण और उपचार (Male Infertility in Hindi)

बांझपन महिला और पुरुष दोनों को प्रभावित करती है। पिछले ब्लॉग में हमने महिला बांझपन के कारण, लक्षण और उपचार के बारे में विस्तार से बात की थी। आज के इस ब्लॉग में हम पुरुष बांझपन (Male Infertility in Hindi) को विस्तार से समझने की कोशिश करेंगे।

भारत में खासकर कुछ समय पहले तक अधिकतर लोगों को यही लगता था कि बांझपन केवल महिलाओं में होने वाली बीमारी है, लेकिन जैसे-जैसे पुरुष बांझपन के मामले सामने आ रहे हैं और बांझपन के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, लोगों के नजरिए में बदलाव आ रहा है।

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पुरुष बांझपन क्या है (What is Male Infertility in Hindi)

जब पुरुष एक साल या उससे अधिक समय तक यौन संबंध बनाने के बाद भी महिला को गर्भधारण करने में असफल होता है तो उसे पुरुष बांझपन कहा जाता है।

पुरुष के स्पर्म की संख्या कम और गुणवत्ता खराब होने कारण स्पर्म महिला के अंडो को फर्टिलाइज नहीं कर पाता है जिसके कारण महिला को गर्भधारण करने में दिक्कतें आती हैं।

पुरुष बांझपन के मुख्य कारणों में शुक्राणु की कमी, एब्नॉर्मल स्पर्म फंक्शन, बीमारी, चोट, पुरानी स्वास्थ्य समस्याएं, खराब जीवनशैली आदि शामिल हैं।

एक दंपति या जोड़े (Couples) को बांझ (Infertile) तब माना जाता है जब वह एक वर्ष या उससे अधिक समय तक लगातार असुरक्षित यौन संबंध बनाने के बाद भी गर्भधारण करने में असमर्थ होता है।

दुनियाभर में लगभग 7 में से 1 जोड़ा बांझपन यानी इनफर्टिलिटी से ग्रसित है। दुनियाभर में बांझपन के सभी मामलों में लगभग 40-50 प्रतिशत मामले पुरुष बांझपन के कारण होते हैं। 

 

पुरुष बांझपन का कारण (Causes of Male Infertility in Hindi)

पुरुष बांझपन कई कारणों से होता है। अगर इन कारणों पर ध्यान देकर कुछ सावधानियां बरती जाएं तो बांझपन के खतरे को काफी हद तक कम या खत्म किया जा सकता है।

पुरुष बांझपन यानी मेल इनफर्टिलिटी के कारणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:-

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  • शुक्राणु की कम संख्या

पुरुष बांझपन के मुख्य कारणों में शुक्राणु की संख्या कम और क्वालिटी खराब होना शामली हैं। स्पर्म में शुक्राणु यानी सीमेन की संख्या कम होने पर यह महिला के अंडा को फर्टिलाइज नहीं कर पाता है।

 

  • जन्मजात असामान्यताएं

अनेक जन्मजात समस्याएं जैसे कि वास-डेफेरेंस आदि भी पुरुष में बांझपन का कारण बन सकते हैं। वास-डेफेरेंस एक ऐसी स्थिति है जिसके द्वारा शुक्राणु अंडकोष से बाहर निकलते हैं। इस स्थिति से पीड़ित होने पर वीर्य के स्खलन होने में समस्या होती है।

 

  • एंडोक्राइन असामान्यताएं

एंडोक्राइन सिस्टम में कई ग्रंथियां मौजूद होती हैं जो शरीर में अनेक मुख्य हार्मोन के उत्पादन को कंट्रोल करती हैं। जब किसी कारण एंडोक्राइन सिस्टम में असामान्यताएं पैदा होती हैं तो बांझपन की समस्या हो सकती है।

 

  • आनुवंशिक असामान्यताएं

आनुवंशिक असामान्यताओं के कारण क्रोमोजोम में किसी तरह का परिवर्तन होने पर शुक्राणु के उत्पादन और प्रवाह में रुकावट पैदा हो सकती है जो बांझपन का कारण बन सकता है।

 

  • शुक्राणु की गति

शुक्राणु की गतिलशीलता ठीक नहीं होने पर यह महिला के अंडे को फर्टिलाइज (निषेचित) नहीं कर पाता है जिसके कारण गर्भधारण में समस्या पैदा होती है।

 

  • वैरीकोसेल

यह एक गंभीर स्थिति है जिससे पीड़ित पुरुष के अंडकोष की नसों में सूजन आ जाती है। वैरीकोसेल स्पर्म के उतप्दान और गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित करता है। वैरीकोसेल पुरुष में बांझपन के मुख्य कारणों में से एक है।

 

  • संक्रमण

पुरुष के गुप्तांगों में संक्रमण होने पर बांझपन का खतरा बढ़ सकता है। कुछ संक्रमण ऐसे होते हैं जो शुक्राणु के निर्माण में बाधा पैदा करते हैं और शुक्राणु की नली को बंद कर देते हैं।

यौन संचारित संक्रमण जैसे कि क्लैमाइडिया और गोनोरिया के कारण शुक्राणु की संख्या में कमी आ सकती है। शुक्राणु की संख्या कम होने पर गर्भधारण की संभावना कम होती है।

 

  • तनाव

तनाव पुरुष और महिला दोनों की प्रजनन क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करता है। जो पुरुष लंबे समय तक तनाव से ग्रसित होते हैं उनके स्पर्म की संख्या और गुणवत्ता में कमी आती है। नतीजतन, बांझपन का खतरा बढ़ जाता है।

 

  • सिगरेट और शराब

सिगरेट और शराब का सेवन भी पुरुष बांझपन के खतरे को बढ़ाता है। नशीले पदार्थों का सेवन स्पर्म की संख्या और गुणवत्ता पर बुरा असर डालता है।

 

  • मोटापा

मोटापा भी पुरुष बांझपन के कारणों में से एक है। वजन जरूरत से अधिक होने पर हार्मोन में बदलाव आता है जिसके कारण बांझपन की समस्या पैदा हो सकती है।

इन सबके अलावा, दूसरे भी ऐसे अनेक कारक हैं जो पुरुष की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करते हैं। इसमें वृषण का अधिक गर्म होना, ट्यूमर होना और रेडिएशन के संपर्क में आना आदि शामिल हैं।

 

पुरुष बांझपन का लक्षण (Symptoms of Male Infertility in Hindi)

पुरुष बांझपन का सबसे मुख्य लक्षण एक या उससे अधिक समय तक नियमित रूप से यौन संबंध बनाने के बाद भी महिला को गर्भवती करने में असक्षम होना है। इसके अलावा, मेल इनफर्टिलिटी के निम्न लक्षण हो सकते हैं:-

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  • यौन इच्छा में कमी आना
  • स्खलन के दौरान दिक्कत होना
  • स्खलन के दौरान कम मात्रा में स्पर्म निकलना
  • बार-बार सांस से संबंधित संक्रमण होना
  • चेहरे और शरीर पर बालों का कम होना
  • क्रोमोसोमल या हार्मोनल असंतुलन होना
  • सामान्य रूप से स्पर्म की संख्या कम होना
  • इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या होना
  • अंडकोष के आसपास के हिस्से में गांठ होना
  • वृषण यानी टेस्टिस में दर्द और सूजन की शिकायत होना
  • आसामान्य रूप से छाती का बढ़ना यानी गाइनेकोमैस्टिया होना

अगर ऊपर दिए गए लक्षणों को खुद में अनुभव करते हैं तो आपको तुरंत एक अनुभवी और विश्वसनीय प्रजनन विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। ये लक्षण बांझपन की ओर इशारा कर सकते हैं।

 

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पुरुष बांझपन का निदान (Diagnosis of Male Infertility in Hindi)

पुरुष में बांझपन के अनेक कारण हो सकते हैं, यही कारण है कि इसका निदान करने के लिए डॉक्टर कई तरह के जांच करने का सुझाव देते हैं।

जांचों की मदद से डॉक्टर मेल इनफर्टिलिटी के सटीक कारणों का पता लगाते हैं। बांझपन के कारण की पुष्टि होने क बाद उसका सटीक उपचार संभव होता है।

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पुरुष बांझपन का निदान करने के लिए डॉक्टर निम्न जांचों का सुझाव दे सकते हैं:-

  • शारीरिक परीक्षण

शारीरिक परीक्षण के दौरान डॉक्टर आपके जननांगों की जांच करते हैं। साथ ही, प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाले कारक जैसे कि कोई आनुवंशिक स्थिति, पुरानी बीमारी, चोट या सर्जरी से संबंधित प्रश्न पूछते हैं।

इसके अलावा, डॉक्टर आपके यौवन उम्र (Puberty) के दौरान आपकी यौन आदतों और यौन विकास के बारे में भी प्रश्न पूछ सकते हैं। इन सबसे डॉक्टर को आपकी सेक्सुअल लाइफ के बारे में जानकारी प्राप्त होती है जो फर्टिलिटी इलाज में आवश्यक है।

 

  • स्पर्म की जांच

इस प्रक्रिया के दौरान आपको अपने स्पर्म का सैंपल हॉस्पिटल/क्लिनिक में जमा करना होता है। उसके बाद, डॉक्टर स्पर्म को लैब भेजते हैं जहां इसके आकार और मूवमेंट में असामान्यता का पाता लगाया जाता है।

स्पर्म की जांच (Sperm Analysis in Hindi) के दौरान डॉक्टर स्पर्म में संक्रमण की भी पुष्टि करते हैं। अगर रिजल्ट में स्पर्म का स्तर सामान्य आता है तो कोई दूसरी जांच करने से पहले डॉक्टर आपके महिला पार्टनर की फर्टिलिटी टेस्ट करने का सुझाव देते हैं।

 

  • स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड

इस जांच के दौरान डॉक्टर अंडकोष और सहायक संरचनाओं में अवरोधों या दूसरी समस्याओं के बारे में पता लगाते हैं।

 

  • हार्मोन की जांच

टेस्टोस्टेरोन और दूसरे हार्मोन के उत्पादन के स्तर को मापने के लिए डॉक्टर खून का सैंपल लेकर हार्मोन की जांच करते हैं।

 

  • यूरिनालिसिस

इस जांच के दौरान, मूत्र में उपस्थित शुक्राणुओं से यह पता लगाया जाता है कि शुक्राणु इजैकुलेशन के दौरान लिंग से बाहर निकलने की बजाय मूत्राशय में वापस जा रहे हैं।

 

  • जेनेटिक टेस्ट

कुछ जेनेटिक कारण से स्पर्म की संख्या और गुणवत्ता में कमी आ सकती है। इस टेस्ट के दौरान डॉक्टर इस बात का पता लगते हैं कि आनुवंशिक कारण पुरुष बांझपन की वजह तो नहीं है।

 

  • टेस्टिकुलर बायोप्सी

इस जांच के दौरान, डॉक्टर अंडकोष से सैंपल लेकर उसकी जांच करते हैं। अगर टेस्टिकुलर बायोप्सी में स्पर्म का निर्माण सामान्य होता है तो इसका मतलब यह हुआ कि आपमें बांझपन का कारण ब्लॉकेज या स्पर्म के स्थानांतरण से संबंधित कोई अन्य समस्या है।

 

इन सभी जांचों से डॉक्टर को पुरुष बांझपन के सटीक कारणों और उसकी गंभीरता को समझने में मदद मिलती है।

 

पुरुष बांझपन का उपचार (Treatment of Male Infertility in Hindi)

पुरुष बांझपन या मेल इनफर्टिटिली को दूर करने के लिए इलाज के कई पद्धतियां मौजूद हैं। पुरुष में बांझपन का इलाज करने के लिए डॉक्टर निम्न तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं:-

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  • एंटी-बायोटिक उपचार

प्रजनन प्रणाली में हुए संक्रमण को ठीक करने के लिए डॉक्टर एंटी-बायोटिक उपचार का उपयोग करते हैं।

 

  • दवाएं

शरीर में किसी हार्मोन का स्तर कम या अधिक होने या उनके काम करने के तरीकों में समस्या होने पर डॉक्टर हार्मोन रिप्लेसमेंट या दवाओं का सुझाव देते हैं।

प्रजनन से संबंधित बीमारियां जैसे कि इरेक्टाइल डिस्फंक्शन या प्रीमैच्योर इजैकुलेशन को ठीक करने के लिए डॉक्टर काउंसलिंग और दवाओं का उपयोग करते हैं।

 

  • आईवीएफ

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन को आम बोलचाल की भाषा में आईवीएफ कहते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान महिला के अंडाशय से अंडे निकालकर उसे पुरुष स्पर्म के शुक्राणु के साथ लैब में निषेचित (फर्टिलाइज) किया जाता है।

फर्टिलाइजेशन के बाद तैयार हुए भ्रूण को महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर कर दिया जाता है। 

 

  • आईयूआई

आईयूआई का पूरा नाम इंट्रा यूटेराइन इनसेमिनेशन (IUI Treatment in Hindi) है। इसे हिंदी में अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान कहते हैं। यह एक सरल प्रक्रिया है जिसके दौरान शुक्राणु को लैब में शुद्ध करने के बाद, ओवुलेशन के दौरान महिला पार्टनर के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है।

पुरुष बांझपन होने पर इलाज के जब सभी तरकीब फेल हो जाते हैं तो डॉक्टर डोनर स्पर्म लेने या बच्चा गोद लेने की सलाह देते हैं।

 

पुरुष प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) कैसे बढ़ाएं (How to Increase Male Fertility)

पुरुष अपनी प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए अनेक उपाय अपना सकते हैं जिसमें निम्न शामिल हो सकते हैं:-

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  • सिगरेट और शराब से दूर रहें
  • नियमित रूप से व्यायाम करें
  • तनाव से दूर रहने की कोशिश करें
  • अधिक दवाओं का सेवन न करें
  • रोजाना कुछ समय तक मेडिटेशन करें
  • पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करें
  • एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजों को अपनी डाइट में शामिल करें

 

निष्कर्ष

बांझपन से पीड़ित पुरुषों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है और इसका सबसे मुख्य कारण है अस्वस्थ जीवनशैली, गलत खान-पान, तनाव और नशीली चीजों का सेवन। खान-पान और जीवनशैली पर ध्यान देकर इस समस्या से बचा जा सकता है।

बांझपन होने पर पुरुष अपनी महिला पार्टनर को गर्भवती करने में असफल होता है। पुरुष बांझपन का उपचार करने के अनेक उपाय मौजूद हैं। इस बीमारी का इलाज करने से पहले डॉक्टर पुरुष की जांच करके बांझपन के सटीक कारण का पता लगाते हैं।

पुरुष बांझपन के कारण की पुष्टि करने के बाद डॉक्टर उपचार प्रक्रिया को शुरू करते हैं। मेल इनफर्टिलिटी का इलाज कई तरह से किया जा सकता है और यह पूर्ण रूप से बांझपन के कारण, पुरुष की उम्र और समग्र स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।

 

Written by:
Dr Prof (Col) Pankaj Talwar, VSM

Dr Prof (Col) Pankaj Talwar, VSM

Director, Medical Services
Dr Pankaj Talwar is one of the most renowned Infertility treatment specialists in India. He brings with him over 29 years of experience with one of the highest success rates in the country across 21,000+ IVF cycles. He is one of the very few gynaecologists who is also a trained embryologist. Dr Pankaj is the Sr Vice President of the Indian Fertility Society and Founder Secretary of Fertility Preservation Society of India. His focus areas include managing failed IVF cycles, managing recurrent implantation failure, Onco- Fertility, Andrology, Sperm function test, Ovarian cortex freezing and Clinical embryology.

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