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Ovarian Cyst Meaning in Hindi: ओवेरियन सिस्ट क्या होता है? लक्षण और उपचार

Ovarian Cyst Meaning in Hindi: ओवेरियन सिस्ट क्या होता है? लक्षण और उपचार

Dr. Rakhi Goyal
Dr. Rakhi Goyal

MBBS, MD (Obstetrics and Gynaecology)

23+ Years of experience

Table of Contents


  1. ओवेरियन सिस्ट क्या है? – Ovarian Cyst in Hindi
  2. ओवेरियन सिस्ट के प्रकार
    1. फंक्शनल ओवेरियन सिस्ट
    2. पैथोलॉजिकल ओवेरियन सिस्ट
  3. ओवरी सिस्ट क्यों होता है? – Ovary Cyst Reasons in Hindi
  4. ओवेरियन सिस्ट के लक्षण
    1. ओवेरियन सिस्ट फटने पर लक्षण
    2. ओवेरियन टॉर्शन के लक्षण
  5. डॉक्टर से कब मिलें?
  6. ओवेरियन सिस्ट की जांच कैसे होती है?
  7. अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में ओवेरियन सिस्ट को कैसे समझें?
    1. क्या केवल सिस्ट का आकार देखकर पता चल सकता है कि वह खतरनाक है?
  8. सिंपल और कॉम्प्लेक्स ओवेरियन सिस्ट में क्या अंतर है?
    1. सिंपल ओवेरियन सिस्ट
    2. कॉम्प्लेक्स ओवेरियन सिस्ट
    3. सिंपल और कॉम्प्लेक्स सिस्ट में मुख्य अंतर
  9. ओवेरियन सिस्ट का इलाज कैसे किया जाता है?
    1. 1. निगरानी और इंतज़ार करना
    2. 2. दवाओं से इलाज
    3. 3. सर्जरी से ओवेरियन सिस्ट का इलाज
    4. ओवेरियन सिस्ट की सर्जरी के प्रकार
    5. क्या हर ओवेरियन सिस्ट में सर्जरी जरूरी होती है?
  10. ओवेरियन सिस्ट की सर्जरी कब होती है?
  11. ओवेरियन सिस्ट की सर्जरी और प्रजनन क्षमता पर इसका असर
  12. ओवेरियन सिस्ट और इनफर्टिलिटी का क्या संबंध है?
  13. ओवेरियन सिस्ट की जटिलताएं क्या हो सकती हैं?
  14. ओवेरियन सिस्ट का आकार कितना होना चाहिए?
  15. ओवेरियन सिस्ट और PCOS में क्या अंतर है?
  16. ओवेरियन सिस्ट और गर्भावस्था का क्या संबंध है?
  17. गर्भावस्था के दौरान ओवेरियन सिस्ट
  18. ओवेरियन सिस्ट फटने पर क्या होता है?
  19. ओवेरियन टॉर्शन क्या है?
  20. मेनोपॉज़ के बाद ओवेरियन सिस्ट
  21. ओवेरियन सिस्ट और ओवेरियन कैंसर में क्या संबंध है?
  22. ओवेरियन सिस्ट और ओव्यूलेशन का क्या संबंध है?
  23. ओवेरियन सिस्ट कितने समय में ठीक होता है?
  24. ओवेरियन सिस्ट दोबारा क्यों बनता है?
  25. ओवेरियन सिस्ट के घरेलू इलाज
  26. ओवरी में सिस्ट होने से क्या होता है?
  27. ओवेरियन सिस्ट और प्रेगनेंसी
  28. प्रेगनेंसी के दौरान ओवरी में सिस्ट
  29. ओवरी में सिस्ट हो तो क्या खाना चाहिए?
  30. ओवेरियन सिस्ट में क्या नहीं खाना चाहिए?
  31. ओवेरियन सिस्ट से बचाव कैसे करें?
  32. ओवेरियन सिस्ट होने पर डॉक्टर से कब मिलें?
  33. निष्कर्ष
  34. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
    1. क्या अंडाशय में सिस्ट खतरनाक है?
    2. क्या ओवेरियन सिस्ट कैंसर बन सकते हैं?
    3. कितने साइज़ का ओवेरियन सिस्ट cm में खतरनाक होता है?
    4. यूट्रस में सिस्ट का इलाज
    5. जब आपको ओवेरियन सिस्ट होता है तो क्या होता है?
    6. ओवेरियन सिस्ट का नॉर्मल साइज़ क्या होता है?
    7. क्या ओवेरियन सिस्ट के बावजूद प्रेग्नेंसी हो सकती है?
    8. क्या ओवेरियन सिस्ट अपने आप ठीक हो सकता है?
    9. ओवेरियन सिस्ट फटने के क्या लक्षण हैं?
    10. क्या ओवेरियन सिस्ट और PCOS एक ही है?
    11. क्या ओवेरियन सिस्ट की सर्जरी से फर्टिलिटी प्रभावित होती है?
    12. मेनोपॉज़ के बाद ओवेरियन सिस्ट होना क्या सामान्य है?

ओवरी में सिस्ट का मतलब होता है ‘अंडाशय में गाँठ बनना’, जो एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या है। महिलाओं की प्रजनन प्रणाली (Reproductive System) में कई समस्याएं पैदा होती हैं, ओवेरियन सिस्ट भी उन्हीं में से एक है।

ज्यादातर ओवेरियन सिस्ट प्रजनन क्षमता को प्रभावित नहीं करते हैं। हालांकि, कुछ खास प्रकार के सिस्ट या उनसे जुड़ी स्थितियां फर्टिलिटी पर असर डाल सकती हैं। तो आइए Cyst Meaning in Hindi, ओवेरियन सिस्ट क्या होता है और इसके लक्षण एवं उपचार के बारे में विस्तार से जानते हैं।

ओवेरियन सिस्ट क्या है? – Ovarian Cyst in Hindi

ओवरी को हिंदी में अंडाशय कहते हैं। यह महिलाओं की प्रजनन प्रणाली का एक अहम हिस्सा है। एक महिला में दो ओवरी होते हैं, जो गर्भाशय के दोनों तरफ पेट के निचले हिस्से में स्थित होते हैं। ओवरी का काम एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बनाना और अंडों को मैच्योर करना है।

ओवरी में सिस्ट बनने पर इसे मेडिकल भाषा में ओवेरियन सिस्ट (Ovarian Cyst in Hindi) कहते हैं। इसे ओवरी में गांठ के नाम से भी जाना जाता है। ओवेरियन सिस्ट का आकार छोटा या बड़ा हो सकता है और कई सिस्ट में किसी तरह के लक्षण भी दिखाई नहीं देते हैं।

ओवेरियन सिस्ट आमतौर पर प्रजनन क्षमता को प्रभावित या गर्भधारण में रुकावट नहीं डालता है। हालांकि, कुछ खास प्रकार के सिस्ट या उनसे जुड़ी स्थितियां, जैसे एंडोमेट्रियोसिस, कुछ महिलाओं में फर्टिलिटी पर असर डाल सकती हैं। गर्भावस्था के दौरान भी कुछ ओवेरियन सिस्ट पाए जा सकते हैं, जिनमें से कई बिना किसी गंभीर समस्या के अपने आप ठीक हो जाते हैं।

ओवेरियन सिस्ट के प्रकार

ओवेरियन सिस्ट अलग-अलग कारणों से बन सकते हैं, और इन्हें आम तौर पर दो मुख्य कैटेगरी में बांटा जाता है: फंक्शनल सिस्ट और पैथोलॉजिकल सिस्ट।

फंक्शनल ओवेरियन सिस्ट

ये सबसे आम टाइप हैं और आम तौर पर मासिक धर्म चक्र के दौरान बनते हैं।

  • फॉलिकुलर सिस्ट: ओव्यूलेशन के दौरान, एक अंडा फॉलिकल के अंदर बनता है। अगर फॉलिकल अंडे को रिलीज़ नहीं करता है, तो यह बढ़ता रह सकता है और सिस्ट बन सकता है।
  • कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट: अंडे के रिलीज़ होने के बाद, फॉलिकल कॉर्पस ल्यूटियम बन जाता है। कभी-कभी यह फ्लूइड से भर जाता है और सिस्ट बन जाता है।

ये सिस्ट आम तौर पर कुछ पीरियड्स के अंदर अपने आप ठीक हो जाते हैं।

पैथोलॉजिकल ओवेरियन सिस्ट

ये सिस्ट असामान्य सेल ग्रोथ के कारण बन सकते हैं और इनके लिए मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ सकती है।

  • डर्मॉइड सिस्ट: इन सिस्ट में बाल, स्किन या दूसरे टिशू हो सकते हैं क्योंकि ये रिप्रोडक्टिव सेल से बनते हैं।
  • सिस्टेडेनोमा: ये ओवेरियन टिशू से बनते हैं और इनमें पानी जैसा या म्यूकस जैसा फ्लूइड हो सकता है।
  • एंडोमेट्रियोमा: ये सिस्ट एंडोमेट्रियोसिस से जुड़े होते हैं और तब होते हैं जब यूटेराइन लाइनिंग जैसा टिशू ओवरीज़ पर बढ़ने लगता है।

कभी-कभी लोग ओवेरियन सिस्ट को यूट्रस में सिस्ट समझ लेते हैं, लेकिन ये दोनों अलग-अलग कंडीशन हैं। ओवेरियन सिस्ट ओवरीज़ पर बनते हैं, जबकि यूटेरस से जुड़ी अन्य समस्याएं गर्भाशय में होती हैं।

ओवरी सिस्ट क्यों होता है? – Ovary Cyst Reasons in Hindi

अगर आपको ओवेरियन सिस्ट है, तो आपके मन में यह सवाल आ सकता है कि ओवेरियन सिस्ट क्यों होता है और इसके बनने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं? ओवेरियन सिस्ट कई अलग-अलग कारणों से बन सकता है। कुछ सिस्ट सामान्य मासिक धर्म चक्र का हिस्सा होते हैं और समय के साथ अपने आप ठीक हो जाते हैं, जबकि कुछ सिस्ट किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या से जुड़े हो सकते हैं।

ओवेरियन सिस्ट के प्रमुख कारणों में शामिल हैं:

  • पेल्विक इंफेक्शन: फैलोपियन ट्यूब में गंभीर संक्रमण या पेल्विक इंफेक्शन प्रजनन अंगों को प्रभावित कर सकता है। कुछ मामलों में संक्रमण से जुड़ी जटिलताओं के कारण ओवरी के आसपास सिस्ट जैसी संरचना बन सकती है।
  • हार्मोनल बदलाव: मासिक धर्म चक्र के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन में बदलाव होते हैं। इन बदलावों के कारण फंक्शनल ओवेरियन सिस्ट बन सकते हैं। फॉलिकुलर सिस्ट या कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट इसके उदाहरण हैं। इनमें से कई सिस्ट बिना किसी खास इलाज के कुछ समय में अपने आप ठीक हो जाते हैं।
  • गर्भावस्था: गर्भावस्था की शुरुआत में कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट बन सकता है। यह शुरुआती गर्भावस्था को सपोर्ट करने वाले हार्मोन बनाने में मदद करता है। कई बार यह सिस्ट गर्भावस्था के आगे बढ़ने के साथ अपने आप छोटा हो जाता है या कुछ समय तक बना रह सकता है।
  • एंडोमेट्रियोसिस: एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसी टिशू ओवरी पर विकसित हो सकती है। इससे ओवरी में एंडोमेट्रियोमा नाम का सिस्ट बन सकता है। इसे आमतौर पर “चॉकलेट सिस्ट” भी कहा जाता है।
  • अंडे के रिलीज़ होने में समस्या: सामान्य मासिक धर्म चक्र में फॉलिकल से अंडा रिलीज़ होता है। अगर फॉलिकल अंडे को रिलीज़ नहीं कर पाता या अंडा रिलीज़ होने के बाद फॉलिकल में बदलाव सामान्य तरीके से नहीं होता, तो फॉलिकल में तरल पदार्थ जमा होकर सिस्ट बन सकता है।
  • कुछ दवाओं का प्रभाव: कुछ फर्टिलिटी दवाएं ओवरी को अंडे विकसित करने और रिलीज़ करने के लिए उत्तेजित करती हैं। कुछ महिलाओं में इनके कारण ओवरी में कई फॉलिकल विकसित हो सकते हैं और ओवरी का आकार बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की निगरानी जरूरी होती है।
  • असामान्य सेल ग्रोथ: कुछ ओवेरियन सिस्ट ओवरी की कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि के कारण बन सकते हैं। इनमें डर्मॉइड सिस्ट और सिस्टेडेनोमा जैसे सिस्ट शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर कैंसरयुक्त नहीं होते, लेकिन इनके प्रकार और बनावट की जांच डॉक्टर द्वारा की जानी चाहिए।
  • पीसीओएस: पीसीओएस एक हार्मोन से जुड़ी स्थिति है जिसमें ओवरी में कई छोटे फॉलिकल दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, पीसीओएस में दिखाई देने वाले फॉलिकल्स को सामान्य ओवेरियन सिस्ट समझना सही नहीं है। दोनों स्थितियां अलग हैं।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि हर ओवेरियन सिस्ट का कोई स्पष्ट कारण पता चलना जरूरी नहीं है। सिस्ट का कारण उसके प्रकार, आकार, उम्र, मासिक धर्म चक्र और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों पर निर्भर कर सकता है। इसलिए अगर अल्ट्रासाउंड में ओवरी में सिस्ट दिखाई देता है, तो उसके प्रकार और कारण को समझने के लिए डॉक्टर से जांच और सलाह लेना जरूरी है।

ओवेरियन सिस्ट के लक्षण

कई महिलाओं में ओवेरियन सिस्ट होने के बावजूद कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते। छोटे और सामान्य प्रकार के सिस्ट अक्सर बिना किसी परेशानी के कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो सकते हैं। जब सिस्ट का आकार बढ़ता है या वह आसपास के अंगों पर दबाव डालता है, तब कुछ महिलाओं में लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

ओवेरियन सिस्ट के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • पेल्विक क्षेत्र में दर्द या भारीपन: पेट के निचले हिस्से या पेल्विक क्षेत्र में हल्का दर्द, खिंचाव या भारीपन महसूस हो सकता है। यह दर्द लगातार रह सकता है या कभी-कभी हो सकता है।
  • दाईं या बाईं ओर दर्द: अगर सिस्ट दाईं ओवरी में है, तो पेट के निचले दाएं हिस्से में दर्द महसूस हो सकता है। इसी तरह, बाईं ओवरी में सिस्ट होने पर बाईं ओर दर्द हो सकता है।
  • पेट फूलना या सूजन: बड़े सिस्ट के कारण पेट में दबाव या भरा-भरा महसूस हो सकता है। कुछ महिलाओं को पेट फूलने या सूजन की शिकायत भी हो सकती है।
  • पीरियड्स में बदलाव: कुछ ओवेरियन सिस्ट हार्मोन और ओव्यूलेशन को प्रभावित कर सकते हैं, जिसके कारण पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं या सामान्य से अलग हो सकते हैं।
  • यौन संबंध के दौरान दर्द: पेल्विक क्षेत्र में मौजूद सिस्ट पर दबाव पड़ने के कारण यौन संबंध के दौरान या उसके बाद दर्द महसूस हो सकता है।
  • बार-बार पेशाब आना: अगर सिस्ट बड़ा है और ब्लैडर पर दबाव डाल रहा है, तो बार-बार पेशाब आने की इच्छा हो सकती है।
  • ब्लैडर खाली करने में परेशानी: कुछ मामलों में बड़ा सिस्ट मूत्राशय पर दबाव डाल सकता है, जिससे पेशाब करते समय या ब्लैडर को पूरी तरह खाली करने में परेशानी हो सकती है।
  • मल त्याग के दौरान परेशानी: अगर सिस्ट आसपास के अंगों पर दबाव डालता है, तो मल त्याग करते समय दर्द या दबाव महसूस हो सकता है।
  • पीठ के निचले हिस्से में दर्द: पेल्विक क्षेत्र में दबाव या दर्द कभी-कभी कमर या पीठ के निचले हिस्से तक महसूस हो सकता है।

ओवेरियन सिस्ट फटने पर लक्षण

कभी-कभी ओवेरियन सिस्ट फट सकता है। ऐसी स्थिति में अचानक तेज पेट या पेल्विक दर्द हो सकता है। कुछ मामलों में सिस्ट के अंदर मौजूद तरल बाहर निकल सकता है और ब्लीडिंग भी हो सकती है। इसके साथ चक्कर आना, कमजोरी, मतली, उल्टी या तेज धड़कन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

ओवेरियन टॉर्शन के लक्षण

बड़े ओवेरियन सिस्ट की वजह से ओवरी के मुड़ने यानी ओवेरियन टॉर्शन का खतरा बढ़ सकता है। इसमें आमतौर पर अचानक और तेज पेल्विक या पेट दर्द होता है। इसके साथ मतली और उल्टी भी हो सकती है। ओवेरियन टॉर्शन एक मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है, इसलिए ऐसे लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

ध्यान रखें: केवल सिस्ट के आकार के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि लक्षण कितने गंभीर होंगे। छोटे सिस्ट में भी कुछ महिलाओं को दर्द या अन्य परेशानी हो सकती है, जबकि बड़े सिस्ट में कभी-कभी कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। सिस्ट के प्रकार, उसकी स्थिति और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं।

डॉक्टर से कब मिलें?

कई बार आपको पता भी नहीं होता है कि आप ओवेरियन सिस्ट से पीड़ित हैं, क्योंकि कुछ सिस्ट के लक्षण नहीं होते हैं और वे कुछ समय के भीतर अपने आप ठीक हो सकते हैं। हालांकि, कुछ महिलाओं में सिस्ट के कारण पेल्विक क्षेत्र में दर्द, पेट फूलना या अन्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

अगर आप निम्न लक्षणों को अनुभव करती हैं तो जल्द से जल्द स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श करें:

  • पेल्विक में गंभीर दर्द
  • पेट में अचानक तेज दर्द होना
  • बुखार के साथ दर्द और उल्टी होना
  • चक्कर आना या अत्यधिक कमजोरी महसूस होना
  • त्वचा में चिपचिपापन या ठंडा पसीना
  • सांस तेज होना
  • बेहोशी या बेहोशी जैसा महसूस होना

ऊपर दिए गए लक्षण सिस्ट फटने या ओवेरियन टॉर्शन जैसी जटिलताओं का संकेत भी हो सकते हैं।

कारण चाहे जो भी हो, जैसे ही आप खुद में इन गंभीर लक्षणों को अनुभव करें, जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलें और उन्हें अपने लक्षणों के बारे में विस्तार से बताएं।

ओवेरियन सिस्ट की जांच कैसे होती है?

ओवेरियन सिस्ट का पता अक्सर रेगुलर पेल्विक जांच या किसी अन्य कारण से किए गए अल्ट्रासाउंड के दौरान चलता है। अगर डॉक्टर को सिस्ट का शक होता है, तो कई डायग्नोस्टिक टेस्ट करवाने की सलाह दी जा सकती है।

  • पेल्विक अल्ट्रासाउंड (Pelvic Ultrasound): यह ओवेरियन सिस्ट का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सबसे आम इमेजिंग टेस्ट है। यह सिस्ट का आकार, जगह और बनावट पता लगाने में मदद करता है।
  • CT स्कैन या MRI: कुछ मामलों में, सिस्ट को ज्यादा डिटेल में देखने के लिए एडवांस्ड इमेजिंग टेस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • ब्लड टेस्ट: हार्मोन लेवल या कुछ अन्य स्थितियों की जांच के लिए ब्लड टेस्ट किए जा सकते हैं। कुछ मामलों में डॉक्टर विशेष ट्यूमर मार्कर की जांच की सलाह भी दे सकते हैं।
  • गर्भावस्था जांच (Pregnancy Test): गर्भावस्था जांच इसलिए भी की जा सकती है क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल बदलावों के कारण कुछ सिस्ट बन सकते हैं।

इन डायग्नोस्टिक तरीकों से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि ओवेरियन सिस्ट के इलाज के लिए मॉनिटरिंग या मेडिकल मदद की जरूरत है या नहीं।

अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में ओवेरियन सिस्ट को कैसे समझें?

ओवेरियन सिस्ट का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड सबसे सामान्य जांचों में से एक है। इससे डॉक्टर को सिस्ट की जगह, आकार, बनावट और उसके अंदर मौजूद सामग्री के बारे में जानकारी मिल सकती है। रिपोर्ट में सिस्ट के बारे में अलग-अलग मेडिकल शब्द लिखे हो सकते हैं, जिन्हें समझना मरीज के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में आमतौर पर निम्न शब्द दिखाई दे सकते हैं:

  • सिंपल सिस्ट: इसमें आमतौर पर केवल तरल पदार्थ होता है। अल्ट्रासाउंड में इसकी दीवार पतली और चिकनी दिखाई दे सकती है। कई सिंपल सिस्ट, खासकर फंक्शनल सिस्ट, समय के साथ अपने आप ठीक हो सकते हैं।
  • कॉम्प्लेक्स सिस्ट: इसमें केवल तरल पदार्थ नहीं होता, बल्कि अंदर सेप्टेशन, खून या ठोस हिस्से जैसी विशेषताएं दिखाई दे सकती हैं। ऐसे सिस्ट में डॉक्टर रिपोर्ट की अन्य विशेषताओं और मरीज की स्थिति के आधार पर आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं।
  • हेमरेजिक सिस्ट: जब सिस्ट के अंदर ब्लीडिंग हो जाती है, तो इसे हेमरेजिक सिस्ट कहा जा सकता है। अल्ट्रासाउंड में इसके अंदर जमा हुआ खून अलग तरह से दिखाई दे सकता है। कई हेमरेजिक सिस्ट समय के साथ अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन डॉक्टर फॉलो-अप अल्ट्रासाउंड की सलाह दे सकते हैं।
  • एंडोमेट्रियोमा: यह एंडोमेट्रियोसिस से जुड़ा ओवेरियन सिस्ट होता है। इसमें पुराना रक्त जमा हो सकता है, जिसके कारण अल्ट्रासाउंड में इसकी बनावट सामान्य सिंपल सिस्ट से अलग दिखाई दे सकती है।
  • सिस्ट का आकार: अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में सिस्ट का आकार सेंटीमीटर में लिखा होता है, जैसे 3 × 3 cm, 5 × 4 cm या 7 × 6 cm। कई बार रिपोर्ट में सिस्ट की तीनों दिशाओं का माप भी दिया जाता है।
  • सिस्ट की जगह: रिपोर्ट में यह भी बताया जा सकता है कि सिस्ट दाईं ओवरी या बाईं ओवरी में है। कुछ रिपोर्ट में दोनों ओवरी की स्थिति अलग-अलग लिखी जाती है।
  • सॉलिड हिस्सा: अगर सिस्ट के अंदर ठोस हिस्सा दिखाई देता है, तो डॉक्टर इसकी बनावट और अन्य विशेषताओं को ध्यान से देखते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि सिस्ट कैंसरयुक्त है, लेकिन ऐसी स्थिति में डॉक्टर आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं।
  • सेप्टेशन: सेप्टेशन का मतलब सिस्ट के अंदर दिखाई देने वाली पतली या मोटी विभाजक दीवारें हो सकती हैं। इसकी मोटाई और बनावट के आधार पर डॉक्टर सिस्ट का आगे मूल्यांकन कर सकते हैं।

क्या केवल सिस्ट का आकार देखकर पता चल सकता है कि वह खतरनाक है?

नहीं। केवल सिस्ट का आकार देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि वह खतरनाक है या नहीं। सिस्ट का प्रकार, उसकी बनावट, अंदर मौजूद तरल या ठोस हिस्से, दीवार की विशेषताएं, उम्र, लक्षण और यह समय के साथ बदल रहा है या नहीं—इन सभी बातों को ध्यान में रखा जाता है।

उदाहरण के लिए, कुछ बड़े सिस्ट भी सामान्य और गैर-कैंसरयुक्त हो सकते हैं, जबकि छोटे सिस्ट में भी ऐसी विशेषताएं हो सकती हैं जिनकी जांच जरूरी हो।

इसलिए अगर आपकी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में “simple cyst”, “complex cyst”, “hemorrhagic cyst”, “endometrioma” या कोई अन्य शब्द लिखा है, तो उसे देखकर खुद से निष्कर्ष निकालने के बजाय स्त्री रोग विशेषज्ञ से रिपोर्ट समझना बेहतर है। डॉक्टर आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री और अल्ट्रासाउंड की जानकारी के आधार पर यह तय करते हैं कि केवल निगरानी की जरूरत है या आगे जांच और इलाज की।

सिंपल और कॉम्प्लेक्स ओवेरियन सिस्ट में क्या अंतर है?

ओवेरियन सिस्ट को अल्ट्रासाउंड में दिखाई देने वाली उनकी बनावट और अंदर मौजूद सामग्री के आधार पर सिंपल और कॉम्प्लेक्स सिस्ट के रूप में बताया जा सकता है। दोनों के बीच अंतर समझना जरूरी है, लेकिन केवल “सिंपल” या “कॉम्प्लेक्स” शब्द देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि सिस्ट खतरनाक है या नहीं।

सिंपल ओवेरियन सिस्ट

सिंपल ओवेरियन सिस्ट आमतौर पर केवल तरल पदार्थ से भरे होते हैं। अल्ट्रासाउंड में इनमें आमतौर पर पतली और चिकनी दीवार दिखाई देती है और इनके अंदर ठोस हिस्सा नहीं होता।

मासिक धर्म चक्र से जुड़े कई फंक्शनल सिस्ट सिंपल सिस्ट हो सकते हैं। ऐसे सिस्ट अक्सर कुछ समय या कुछ मासिक चक्रों के बाद अपने आप छोटे होकर खत्म हो सकते हैं और हर मामले में किसी विशेष इलाज की जरूरत नहीं होती।

हालांकि, अगर सिस्ट लगातार बना रहता है, उसका आकार बढ़ता है या दर्द जैसे लक्षण पैदा करता है, तो डॉक्टर फॉलो-अप अल्ट्रासाउंड या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं।

कॉम्प्लेक्स ओवेरियन सिस्ट

कॉम्प्लेक्स ओवेरियन सिस्ट की बनावट सिंपल सिस्ट से अलग होती है। इसमें केवल साफ तरल पदार्थ के बजाय खून, सेप्टेशन, गाढ़ा तरल पदार्थ या ठोस हिस्सा जैसी विशेषताएं दिखाई दे सकती हैं।

कॉम्प्लेक्स सिस्ट के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ हेमरेजिक सिस्ट में अंदर खून जमा होने के कारण उनकी बनावट कॉम्प्लेक्स दिखाई दे सकती है, जबकि एंडोमेट्रियोमा भी अल्ट्रासाउंड में कॉम्प्लेक्स दिखाई दे सकता है।

कॉम्प्लेक्स सिस्ट का मतलब यह नहीं है कि वह कैंसर है। हालांकि, इसकी बनावट और अन्य विशेषताओं को देखते हुए डॉक्टर को कुछ मामलों में नियमित निगरानी, दोबारा अल्ट्रासाउंड या अतिरिक्त जांच की जरूरत पड़ सकती है।

सिंपल और कॉम्प्लेक्स सिस्ट में मुख्य अंतर

विशेषता सिंपल ओवेरियन सिस्ट कॉम्प्लेक्स ओवेरियन सिस्ट
अंदर की सामग्री आमतौर पर साफ तरल पदार्थ तरल के साथ खून, सेप्टेशन या ठोस हिस्सा हो सकता है
बनावट आमतौर पर सरल और समान अपेक्षाकृत अधिक जटिल
सामान्य कारण कई बार फंक्शनल सिस्ट हेमरेजिक सिस्ट, एंडोमेट्रियोमा और अन्य कारण
इलाज कई मामलों में केवल निगरानी कारण और बनावट के आधार पर निगरानी या अतिरिक्त जांच
कैंसर का मतलब? आमतौर पर नहीं कॉम्प्लेक्स होने का मतलब अपने आप कैंसर नहीं है

इसलिए ओवेरियन सिस्ट को केवल उसके आकार या “सिंपल” और “कॉम्प्लेक्स” नाम के आधार पर खतरनाक मानना सही नहीं है। डॉक्टर सिस्ट की बनावट, आकार, उम्र, लक्षण, मासिक धर्म की स्थिति और समय के साथ उसमें होने वाले बदलावों को ध्यान में रखकर आगे की सलाह देते हैं।

इलाज का उद्देश्य सिस्ट को प्रभावी तरीके से मैनेज करना और जरूरत पड़ने पर स्वस्थ ओवेरियन टिशू को सुरक्षित रखना होता है।

ओवेरियन सिस्ट का इलाज कैसे किया जाता है?

ओवेरियन सिस्ट का इलाज हर महिला में एक जैसा नहीं होता। डॉक्टर इलाज का तरीका तय करते समय सिस्ट का प्रकार, आकार, उसकी बनावट, लक्षण, उम्र, मेनोपॉज़ की स्थिति और सिस्ट समय के साथ बढ़ रहा है या नहीं जैसी बातों को ध्यान में रखते हैं। अगर महिला गर्भधारण की योजना बना रही है, तो उसकी प्रजनन क्षमता को भी ध्यान में रखा जाता है।

1. निगरानी और इंतज़ार करना

कई ओवेरियन सिस्ट, खासकर फंक्शनल सिस्ट, बिना किसी विशेष इलाज के कुछ समय में अपने आप ठीक हो सकते हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर तुरंत दवा या सर्जरी करने के बजाय सिस्ट की निगरानी करने की सलाह दे सकते हैं।

इस दौरान डॉक्टर जरूरत के अनुसार कुछ समय बाद दोबारा अल्ट्रासाउंड करवाकर यह देखते हैं कि:

  • सिस्ट का आकार कम हो रहा है या नहीं
  • सिस्ट पूरी तरह खत्म हुआ है या नहीं
  • सिस्ट का आकार बढ़ रहा है या नहीं
  • सिस्ट की बनावट में कोई बदलाव आया है या नहीं

अगर सिस्ट छोटा हो रहा है और कोई गंभीर लक्षण नहीं हैं, तो कई मामलों में केवल नियमित फॉलो-अप ही पर्याप्त हो सकता है।

2. दवाओं से इलाज

हर ओवेरियन सिस्ट के लिए दवा की जरूरत नहीं होती। अगर दर्द या अन्य लक्षण हैं, तो डॉक्टर उन्हें नियंत्रित करने के लिए दवाएं दे सकते हैं।

कुछ महिलाओं को हार्मोनल बर्थ कंट्रोल पिल्स भी दी जा सकती हैं। ये नए फंक्शनल सिस्ट बनने की संभावना को कम करने में मदद कर सकती हैं, लेकिन आमतौर पर पहले से मौजूद ओवेरियन सिस्ट को छोटा या खत्म नहीं करती हैं।

इसलिए किसी भी दवा को डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू नहीं करना चाहिए।

3. सर्जरी से ओवेरियन सिस्ट का इलाज

कुछ मामलों में ओवेरियन सिस्ट को हटाने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। डॉक्टर सर्जरी की सलाह तब दे सकते हैं जब सिस्ट:

  • बहुत बड़ा हो
  • लगातार बढ़ रहा हो
  • कई महीनों तक बना रहे
  • बार-बार या गंभीर दर्द पैदा करे
  • अल्ट्रासाउंड में असामान्य दिखाई दे
  • फट जाए और गंभीर ब्लीडिंग या अन्य जटिलता पैदा करे
  • ओवेरियन टॉर्शन का खतरा बढ़ा रहा हो
  • मेनोपॉज़ के बाद पाया गया हो और उसकी प्रकृति को लेकर चिंता हो

सर्जरी का फैसला केवल सिस्ट के आकार के आधार पर नहीं किया जाता। डॉक्टर उसकी पूरी स्थिति और महिला की उम्र व स्वास्थ्य को भी ध्यान में रखते हैं।

ओवेरियन सिस्ट की सर्जरी के प्रकार

सिस्ट की स्थिति के आधार पर डॉक्टर अलग-अलग प्रकार की सर्जरी का विकल्प चुन सकते हैं।

  • लैप्रोस्कोपी: इसमें पेट में छोटे चीरे लगाकर सर्जिकल उपकरणों की मदद से सिस्ट को हटाया जाता है। यह एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है और कई मामलों में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • लैपरोटॉमी: अगर सिस्ट बहुत बड़ा है, उसकी प्रकृति को लेकर गंभीर चिंता है या डॉक्टर को बड़े क्षेत्र को देखने की जरूरत है, तो पेट में अपेक्षाकृत बड़ा चीरा लगाकर सर्जरी की जा सकती है।

जहां संभव हो, खासकर गर्भधारण की योजना बना रही महिलाओं में, डॉक्टर स्वस्थ ओवेरियन टिशू को सुरक्षित रखने की कोशिश करते हैं। हालांकि, सर्जरी का तरीका सिस्ट के प्रकार और स्थिति पर निर्भर करता है।

क्या हर ओवेरियन सिस्ट में सर्जरी जरूरी होती है?

नहीं। हर ओवेरियन सिस्ट को सर्जरी से हटाने की जरूरत नहीं होती। कई छोटे और सामान्य सिस्ट समय के साथ अपने आप ठीक हो सकते हैं। सर्जरी की जरूरत तभी होती है जब सिस्ट की स्थिति, लक्षण या जांच के परिणाम इसे आवश्यक बनाते हैं।

इसलिए अगर अल्ट्रासाउंड में ओवेरियन सिस्ट दिखाई देता है, तो घबराने के बजाय स्त्री रोग विशेषज्ञ से उसकी रिपोर्ट समझना और डॉक्टर द्वारा बताए गए समय पर फॉलो-अप करवाना जरूरी है।

ओवेरियन सिस्ट की सर्जरी कब होती है?

हर ओवेरियन सिस्ट के लिए सर्जरी की जरूरत नहीं होती। कई सिस्ट केवल निगरानी और फॉलो-अप से ठीक हो सकते हैं। डॉक्टर सर्जरी की जरूरत का फैसला सिस्ट के प्रकार, आकार, बनावट, लक्षण और महिला की उम्र के आधार पर करते हैं।

सर्जरी की सलाह कुछ स्थितियों में दी जा सकती है, जैसे:

  • सिस्ट लगातार बढ़ रहा हो
  • सिस्ट लंबे समय तक बना रहे
  • सिस्ट के कारण गंभीर या लगातार दर्द हो
  • सिस्ट फटने या टॉर्शन जैसी जटिलता हो
  • अल्ट्रासाउंड में सिस्ट असामान्य दिखाई दे
  • सिस्ट में कैंसर की आशंका हो
  • सिस्ट के कारण आसपास के अंगों पर दबाव पड़ रहा हो

अगर महिला भविष्य में गर्भधारण की योजना बना रही है, तो डॉक्टर सर्जरी की योजना बनाते समय फर्टिलिटी को भी ध्यान में रखते हैं।

ओवेरियन सिस्ट की सर्जरी और प्रजनन क्षमता पर इसका असर

अगर ओवेरियन सिस्ट की सर्जरी की जरूरत पड़ती है, तो डॉक्टर आमतौर पर महिला की उम्र, सिस्ट के प्रकार, आकार, लक्षण और भविष्य में गर्भधारण की योजना को ध्यान में रखते हैं।

कई मामलों में सर्जरी के दौरान केवल सिस्ट को हटाने की कोशिश की जाती है, ताकि स्वस्थ ओवेरियन टिशू को सुरक्षित रखा जा सके। हालांकि, सर्जरी का फर्टिलिटी पर असर हर महिला में अलग हो सकता है और यह सिस्ट के प्रकार तथा सर्जरी की स्थिति पर निर्भर करता है।

खासकर एंडोमेट्रियोमा के मामले में डॉक्टर सर्जरी के संभावित लाभ और ओवेरियन रिजर्व पर इसके प्रभाव को ध्यान में रख सकते हैं।

अगर आप भविष्य में गर्भधारण की योजना बना रही हैं और आपको ओवेरियन सिस्ट है, तो सर्जरी से पहले डॉक्टर से अपनी फर्टिलिटी के बारे में चर्चा करना जरूरी है। इससे उपचार की योजना आपकी प्रजनन क्षमता को ध्यान में रखकर बनाई जा सकती है।

ओवेरियन सिस्ट और इनफर्टिलिटी का क्या संबंध है?

ओवेरियन सिस्ट होने का मतलब यह नहीं है कि महिला को गर्भधारण करने में परेशानी होगी। ज्यादातर ओवेरियन सिस्ट प्रजनन क्षमता को प्रभावित नहीं करते हैं और कुछ समय के बाद अपने आप ठीक हो सकते हैं। हालांकि, कुछ खास प्रकार के सिस्ट या उनसे जुड़ी स्थितियां फर्टिलिटी पर असर डाल सकती हैं।

एंडोमेट्रियोसिस से जुड़े ओवेरियन सिस्ट, जिन्हें एंडोमेट्रियोमा कहा जाता है, कुछ महिलाओं में गर्भधारण की संभावना को प्रभावित कर सकते हैं। इसी तरह, अगर सिस्ट बहुत बड़ा है या उसके कारण ओवरी को नुकसान पहुंचता है, तो फर्टिलिटी पर असर पड़ सकता है।

ओवेरियन सिस्ट को हटाने के लिए की जाने वाली सर्जरी में भी डॉक्टर महिला की फर्टिलिटी को ध्यान में रखते हैं। इसलिए अगर आप गर्भधारण की योजना बना रही हैं और आपको ओवेरियन सिस्ट है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर सिस्ट के प्रकार, आकार और आपकी फर्टिलिटी पर इसके संभावित प्रभाव के बारे में जानकारी लेना जरूरी है।

ओवेरियन सिस्ट की जटिलताएं क्या हो सकती हैं?

ज्यादातर ओवेरियन सिस्ट गंभीर समस्या पैदा नहीं करते हैं। हालांकि, कुछ सिस्ट में जटिलताएं हो सकती हैं, खासकर जब सिस्ट बड़ा हो जाए या उसमें कोई असामान्य बदलाव हो।

ओवेरियन सिस्ट से जुड़ी कुछ संभावित जटिलताएं हैं:

  • ओवेरियन सिस्ट का फटना: सिस्ट फटने पर अचानक तेज पेट या पेल्विक दर्द हो सकता है और कुछ मामलों में ब्लीडिंग भी हो सकती है।
  • ओवेरियन टॉर्शन: बड़े सिस्ट के कारण ओवरी के मुड़ने का खतरा बढ़ सकता है। इससे ओवरी में ब्लड फ्लो प्रभावित हो सकता है।
  • तेज दर्द: बड़ा सिस्ट आसपास के अंगों पर दबाव डालकर दर्द या असहजता पैदा कर सकता है।
  • फर्टिलिटी पर असर: कुछ खास प्रकार के सिस्ट या उनसे जुड़ी स्थितियां, जैसे एंडोमेट्रियोसिस, कुछ महिलाओं में प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।

अगर अचानक तेज पेट या पेल्विक दर्द, चक्कर, कमजोरी, उल्टी या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए।

ओवेरियन सिस्ट का आकार कितना होना चाहिए?

ओवेरियन सिस्ट का आकार अलग-अलग हो सकता है। केवल सिस्ट का आकार देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि वह खतरनाक है या नहीं। डॉक्टर सिस्ट के प्रकार, उसकी बनावट, लक्षण, उम्र और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारकों को भी ध्यान में रखते हैं।

छोटे सिस्ट अक्सर बिना किसी खास लक्षण के होते हैं और कई मामलों में अपने आप ठीक हो सकते हैं। वहीं, बड़े सिस्ट में पेट या पेल्विक क्षेत्र में दर्द, पेट फूलना या अन्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

अगर सिस्ट का आकार लगातार बढ़ रहा है, लंबे समय तक बना हुआ है या इमेजिंग टेस्ट में असामान्य दिखाई देता है, तो डॉक्टर आगे की जांच या इलाज की सलाह दे सकते हैं।

इसलिए ओवेरियन सिस्ट का आकार जानने के साथ-साथ उसके प्रकार और डॉक्टर द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट को समझना भी जरूरी है।

ओवेरियन सिस्ट और PCOS में क्या अंतर है?

ओवेरियन सिस्ट और PCOS एक ही समस्या नहीं हैं। ओवेरियन सिस्ट ओवरी में बनने वाली तरल पदार्थ से भरी थैली या अन्य प्रकार की संरचना हो सकती है, जबकि PCOS एक हार्मोन से जुड़ी स्थिति है।

ओवेरियन सिस्ट कई अलग-अलग कारणों से बन सकते हैं और कई सिस्ट कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाते हैं। दूसरी ओर, PCOS में हार्मोनल बदलावों के कारण ओव्यूलेशन और पीरियड्स प्रभावित हो सकते हैं।

PCOS में ओवरी में कई छोटे फॉलिकल्स दिखाई दे सकते हैं, लेकिन इन्हें सामान्य ओवेरियन सिस्ट समझना सही नहीं है। इसलिए अगर अल्ट्रासाउंड में ओवरी में कुछ दिखाई देता है, तो डॉक्टर की जांच से यह पता लगाना जरूरी होता है कि यह ओवेरियन सिस्ट है या PCOS से जुड़ी स्थिति।

ओवेरियन सिस्ट और गर्भावस्था का क्या संबंध है?

ओवेरियन सिस्ट होने के बावजूद कई महिलाओं में गर्भावस्था हो सकती है। ज्यादातर ओवेरियन सिस्ट प्रजनन क्षमता को प्रभावित नहीं करते हैं।

हालांकि, गर्भधारण की संभावना सिस्ट के प्रकार, उसके आकार और उसके कारण पर निर्भर कर सकती है। उदाहरण के लिए, एंडोमेट्रियोसिस से जुड़े एंडोमेट्रियोमा कुछ महिलाओं में फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकते हैं।

अगर आप गर्भावस्था की योजना बना रही हैं और आपको ओवेरियन सिस्ट है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है। डॉक्टर सिस्ट की स्थिति और आपकी फर्टिलिटी को ध्यान में रखते हुए आगे की सलाह दे सकते हैं।

गर्भावस्था के दौरान ओवेरियन सिस्ट

कभी-कभी गर्भावस्था के दौरान ओवेरियन सिस्ट का पता चल सकता है। कई मामलों में ये सिस्ट नुकसान नहीं पहुंचाते हैं और गर्भावस्था पर असर नहीं डालते हैं।

गर्भावस्था की शुरुआत में बनने वाले कुछ फंक्शनल सिस्ट अक्सर गर्भावस्था बढ़ने के साथ अपने आप कम या खत्म हो सकते हैं। हालांकि, अगर सिस्ट बड़ा हो जाता है या कॉम्प्लीकेशंस पैदा करता है, तो डॉक्टर उस पर करीब से नजर रख सकते हैं।

ओवेरियन सिस्ट वाली कई महिलाएं स्वस्थ गर्भावस्था में रह सकती हैं। गर्भावस्था के दौरान सर्जिकल ट्रीटमेंट के बारे में तभी सोचा जाता है जब सिस्ट से मां को गंभीर समस्या का खतरा हो या सिस्ट की प्रकृति को लेकर चिंता हो।

ओवेरियन सिस्ट फटने पर क्या होता है?

कभी-कभी ओवेरियन सिस्ट फट सकता है। सिस्ट के फटने पर अचानक और तेज पेल्विक या पेट दर्द हो सकता है। कुछ मामलों में सिस्ट के अंदर मौजूद फ्लूइड बाहर निकल सकता है और ब्लीडिंग भी हो सकती है।

ओवेरियन सिस्ट फटने पर निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं:

  • अचानक तेज पेट या पेल्विक दर्द
  • चक्कर आना
  • कमजोरी महसूस होना
  • मतली या उल्टी
  • तेज धड़कन
  • बुखार
  • कुछ मामलों में अधिक ब्लीडिंग

अगर अचानक बहुत तेज दर्द हो, चक्कर या कमजोरी महसूस हो या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए। ऐसे लक्षण सिस्ट फटने या किसी अन्य गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं।

ओवेरियन टॉर्शन क्या है?

ओवेरियन टॉर्शन एक ऐसी स्थिति है जिसमें ओवरी अपने आसपास के टिशू के साथ मुड़ जाती है। बड़े ओवेरियन सिस्ट होने पर ओवरी के मुड़ने का खतरा बढ़ सकता है।

ओवेरियन टॉर्शन में अचानक तेज पेल्विक या पेट दर्द हो सकता है। इसके साथ मतली और उल्टी भी हो सकती है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है क्योंकि ओवरी में ब्लड फ्लो प्रभावित हो सकता है।

अगर ओवेरियन सिस्ट के साथ अचानक तेज दर्द, मतली या उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच और इलाज जरूरी होता है।

मेनोपॉज़ के बाद ओवेरियन सिस्ट

मेनोपॉज़ के बाद भी ओवरी में सिस्ट दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, इस उम्र में पाए जाने वाले ओवेरियन सिस्ट का मूल्यांकन डॉक्टर अधिक सावधानी से कर सकते हैं।

डॉक्टर सिस्ट का आकार, बनावट, अल्ट्रासाउंड में दिखाई देने वाली विशेषताएं और महिला की अन्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को ध्यान में रखते हैं। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त जांच या फॉलो-अप की सलाह दी जा सकती है।

मेनोपॉज़ के बाद ओवेरियन सिस्ट का मतलब कैंसर होना नहीं है। ज्यादातर सिस्ट कैंसरयुक्त नहीं होते, लेकिन इस उम्र में किसी भी नए या असामान्य सिस्ट को डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

अगर मेनोपॉज़ के बाद लगातार पेट फूलना, पेल्विक दर्द, पेट में भारीपन या अन्य नए लक्षण दिखाई दें, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

ओवेरियन सिस्ट और ओवेरियन कैंसर में क्या संबंध है?

ओवेरियन सिस्ट और ओवेरियन कैंसर एक ही समस्या नहीं हैं। ज्यादातर ओवेरियन सिस्ट कैंसरयुक्त नहीं होते हैं और कई सिस्ट कुछ समय बाद अपने आप ठीक भी हो सकते हैं।

हालांकि, कुछ मामलों में ओवरी में दिखाई देने वाली असामान्य संरचना को अधिक जांच की जरूरत हो सकती है। डॉक्टर अल्ट्रासाउंड में सिस्ट की बनावट, उसके आकार, ठोस हिस्से या अन्य विशेषताओं के साथ-साथ महिला की उम्र और मेनोपॉज़ की स्थिति को भी ध्यान में रखते हैं।

मेनोपॉज़ के बाद ओवेरियन सिस्ट मिलने पर डॉक्टर जरूरत के अनुसार अतिरिक्त जांच या नियमित निगरानी की सलाह दे सकते हैं।

इसलिए केवल सिस्ट का होना कैंसर का संकेत नहीं है। अगर अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में कोई असामान्य सिस्ट दिखाई देता है, तो उसकी सही व्याख्या डॉक्टर से करवाना जरूरी है।

ओवेरियन सिस्ट और ओव्यूलेशन का क्या संबंध है?

कुछ ओवेरियन सिस्ट सीधे मासिक धर्म चक्र और ओव्यूलेशन से जुड़े होते हैं। फंक्शनल सिस्ट तब बन सकते हैं जब फॉलिकल अंडे को रिलीज नहीं करता या अंडे के रिलीज होने के बाद कॉर्पस ल्यूटियम में बदलाव होता है।

इस तरह के कई सिस्ट कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो सकते हैं। हालांकि, हर ओवेरियन सिस्ट ओव्यूलेशन को प्रभावित नहीं करता।

अगर ओवेरियन सिस्ट के साथ पीरियड्स में लगातार बदलाव, ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्या या गर्भधारण में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है। डॉक्टर सिस्ट के प्रकार और अन्य कारणों के आधार पर आगे की सलाह दे सकते हैं।

ओवेरियन सिस्ट कितने समय में ठीक होता है?

ओवेरियन सिस्ट कितने समय में ठीक होगा, यह उसके प्रकार और कारण पर निर्भर करता है। फंक्शनल ओवेरियन सिस्ट कई मामलों में कुछ पीरियड्स या कुछ महीनों के अंदर अपने आप ठीक हो सकते हैं।

कुछ सिस्ट लंबे समय तक बने रह सकते हैं और उनके लिए नियमित जांच या इलाज की जरूरत पड़ सकती है। अगर सिस्ट लगातार बना रहता है, उसका आकार बढ़ता है या उसमें कोई असामान्य बदलाव दिखाई देता है, तो डॉक्टर आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं।

इसलिए हर ओवेरियन सिस्ट के लिए ठीक होने का एक निश्चित समय नहीं बताया जा सकता। डॉक्टर की सलाह के अनुसार फॉलो-अप और जरूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड करवाना जरूरी है।

ओवेरियन सिस्ट दोबारा क्यों बनता है?

एक बार ओवेरियन सिस्ट ठीक होने के बाद भी कुछ महिलाओं में भविष्य में नया सिस्ट बन सकता है। खासकर फंक्शनल सिस्ट दोबारा बन सकते हैं क्योंकि ये ओव्यूलेशन और मासिक धर्म चक्र से जुड़े होते हैं।

एंडोमेट्रियोसिस जैसी स्थितियों से जुड़े सिस्ट भी कुछ मामलों में दोबारा हो सकते हैं। इसलिए अगर आपको पहले ओवेरियन सिस्ट हो चुका है और दोबारा पेल्विक दर्द, पीरियड्स में बदलाव या अन्य लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

सिस्ट दोबारा बनने की संभावना उसके प्रकार, कारण और आपकी स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित फॉलो-अप करने से किसी नए या दोबारा बने सिस्ट की पहचान समय पर की जा सकती है।

ओवेरियन सिस्ट के घरेलू इलाज

ओवेरियन सिस्ट का इलाज उसके प्रकार, आकार और लक्षणों के आधार पर किया जाता है। कुछ मामलों में डॉक्टर केवल सिस्ट की निगरानी करने की सलाह देते हैं, जबकि कुछ स्थितियों में दवाओं या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। घरेलू उपायों का इस्तेमाल मुख्य रूप से दर्द और असहजता जैसे लक्षणों से राहत पाने के लिए किया जा सकता है। ये उपाय सिस्ट को खत्म करने का इलाज नहीं हैं।

ओवेरियन सिस्ट में राहत पाने के लिए कुछ उपायों में शामिल हैं:

  • हीट थेरेपी: पेट के निचले हिस्से पर गर्म पानी की बोतल या हीट पैड रखने से ऐंठन और दर्द में राहत मिल सकती है।
  • आराम: पर्याप्त आराम और नींद सामान्य स्वास्थ्य और असहजता को मैनेज करने में मदद कर सकती है।
  • संतुलित आहार: पौष्टिक और संतुलित आहार शरीर को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है।
  • दर्द निवारक दवाएं: कुछ मामलों में डॉक्टर दर्द से राहत के लिए दवाओं की सलाह दे सकते हैं। इन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेना बेहतर है।
  • तनाव कम करना: आराम और तनाव कम करने वाली गतिविधियां सामान्य स्वास्थ्य को सपोर्ट कर सकती हैं।

ध्यान रखें कि घरेलू उपाय ओवेरियन सिस्ट का मेडिकल इलाज नहीं हैं। अगर दर्द लगातार बना रहता है, सिस्ट का आकार बढ़ रहा है या अचानक तेज पेट दर्द, चक्कर, कमजोरी, उल्टी या बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

ओवरी में सिस्ट होने से क्या होता है?

ओवरी में सिस्ट होने से हर महिला को परेशानी हो, यह जरूरी नहीं है। कई सिस्ट में कोई लक्षण नहीं होते। हालांकि, कुछ महिलाओं में निम्न समस्याएं हो सकती हैं:

  • निचले पेट या श्रोणि क्षेत्र में दर्द: सिस्ट का आकार बढ़ने या आसपास के ऊतकों पर दबाव पड़ने से पेट के निचले हिस्से में दर्द या भारीपन महसूस हो सकता है।
  • पेट फूलना या सूजन: बड़ा सिस्ट पेट के आसपास दबाव डाल सकता है, जिससे पेट फूला हुआ या भरा-भरा महसूस हो सकता है।
  • मासिक धर्म में बदलाव: कुछ प्रकार के सिस्ट मासिक धर्म चक्र या ओव्यूलेशन को प्रभावित कर सकते हैं।
  • बार-बार पेशाब लगना: बड़ा सिस्ट मूत्राशय पर दबाव डाल सकता है, जिसके कारण बार-बार पेशाब लग सकती है।
  • मल त्याग करते समय दर्द: अगर सिस्ट आसपास के अंगों पर दबाव डालता है, तो मल त्याग करते समय दर्द या परेशानी हो सकती है।
  • यौन संबंध बनाते समय दर्द: श्रोणि क्षेत्र में मौजूद सिस्ट के कारण यौन संबंध के दौरान दबाव या हलचल से दर्द हो सकता है।
  • मतली या उल्टी: खासकर सिस्ट के फटने या अंडाशय के मुड़ने जैसी जटिलताओं में मतली और उल्टी हो सकती है।
  • पीठ के निचले हिस्से में दर्द: श्रोणि क्षेत्र में दबाव या दर्द के कारण यह परेशानी आसपास के हिस्सों में भी महसूस हो सकती है।

हर ओवेरियन सिस्ट निःसंतानता का कारण नहीं बनता। फर्टिलिटी पर असर सिस्ट के प्रकार और उससे जुड़ी स्थिति पर निर्भर करता है।

ओवेरियन सिस्ट और प्रेगनेंसी

कभी-कभी प्रेग्नेंसी के दौरान ओवेरियन सिस्ट का पता चल सकता है। कई मामलों में, ये सिस्ट नुकसान नहीं पहुंचाते हैं और प्रेग्नेंसी पर असर नहीं डालते हैं।

प्रेग्नेंसी की शुरुआत में बनने वाले फंक्शनल सिस्ट अक्सर प्रेग्नेंसी बढ़ने के साथ अपने आप गायब हो जाते हैं। हालांकि, अगर सिस्ट बड़ा हो जाता है या कॉम्प्लीकेशंस पैदा करता है, तो डॉक्टर उस पर करीब से नजर रख सकते हैं।

ओवेरियन सिस्ट वाली ज्यादातर महिलाएं हेल्दी प्रेग्नेंसी में भी रह सकती हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान सर्जिकल ट्रीटमेंट के बारे में तभी सोचा जाता है जब सिस्ट से मां को गंभीर समस्या का खतरा हो या सिस्ट की प्रकृति को लेकर चिंता हो।

प्रेगनेंसी के दौरान ओवरी में सिस्ट

कई बार प्रेगनेंसी के पहले तिमाही में ओवेरियन सिस्ट का पता चल सकता है। कई फंक्शनल सिस्ट समय के साथ अपने आप कम या खत्म हो सकते हैं।

सिस्ट के फटने या अन्य जटिलता की स्थिति में आप खुद में कुछ लक्षणों को अनुभव कर सकती हैं जैसे कि:

  • बुखार आना
  • उल्टी होना
  • सिर चकराना
  • कमजोरी होना
  • धड़कन तेज होना
  • अचानक से तेज दर्द होना

अगर आप खुद में इन लक्षणों को अनुभव करें तो तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें और उन्हें इस बारे में बताएं।

ओवरी में सिस्ट हो तो क्या खाना चाहिए?

संतुलित आहार लेने से सामान्य स्वास्थ्य और स्वस्थ वजन को बनाए रखने में मदद मिलती है। हालांकि, कोई विशेष भोजन ओवेरियन सिस्ट को खत्म करने का प्रमाणित इलाज नहीं है।

यह समस्या होने पर अपनी डाइट में निम्न चीजों को शामिल कर सकती हैं:

  • लीन प्रोटीन: मछली, टोफू, अंडे और चिकन जैसे प्रोटीन स्रोतों को संतुलित आहार में शामिल किया जा सकता है।
  • फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ: संतरा, नाशपाती, दालें, मटर और अन्य फल-सब्जियों का सेवन करें।
  • हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक और अन्य हरी सब्जियों को संतुलित आहार का हिस्सा बनाएं।
  • मैग्नीशियम वाले खाद्य पदार्थ: केला, बादाम, काजू, एवोकाडो और हरी पत्तेदार सब्जियां मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं।
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड: मछली, नट्स और सीड्स जैसे खाद्य पदार्थों को संतुलित डाइट में शामिल किया जा सकता है।

इन सबके अलावा भी काफी चीजें हैं जिन्हें आप अपनी डाइट में शामिल कर सकती हैं। अगर डाइट से संबंधित मदद चाहिए तो आप हमारी डाइटीशियन के साथ अपॉइंटमेंट बुक करके उनसे सलाह लें।

ओवेरियन सिस्ट में क्या नहीं खाना चाहिए?

ओवेरियन सिस्ट में किसी खास भोजन को पूरी तरह बंद करने की जरूरत हर महिला के लिए नहीं होती। हालांकि, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से वजन और सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

अगर आपको ओवेरियन सिस्ट है, तो निम्न चीजों का सेवन सीमित करना बेहतर है:

  1. तली-भुनी चीजें: बहुत अधिक तली-भुनी और वसायुक्त चीजों का सेवन सीमित करें।
  2. अधिक मात्रा में लाल मांस: संतुलित आहार में दाल, मछली, अंडे और अन्य प्रोटीन स्रोतों को भी शामिल करें।
  3. अधिक चीनी और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ: सफेद ब्रेड, आइसक्रीम, पैकेज्ड जूस, कुकीज, केक और अन्य अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें।
  4. अधिक कैफीन: चाय, कॉफी और अन्य कैफीन वाले पेय पदार्थों का अत्यधिक सेवन करने से बचें।
  5. शराब और धूम्रपान: शराब और धूम्रपान से बचना बेहतर है, क्योंकि ये समग्र स्वास्थ्य और प्रजनन स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

स्वस्थ और संतुलित आहार लें, नियमित रूप से व्यायाम करें और अपने वजन को स्वस्थ सीमा में बनाए रखने की कोशिश करें। साथ ही, ओवेरियन सिस्ट के इलाज के लिए केवल खान-पान पर निर्भर न रहें। अगर दर्द, अनियमित मासिक धर्म या अन्य लक्षण लगातार बने रहें, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।

ओवेरियन सिस्ट से बचाव कैसे करें?

हालांकि ओवेरियन सिस्ट को हमेशा रोका नहीं जा सकता, लेकिन अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने और नियमित मेडिकल जांच करवाने से किसी समस्या की पहचान समय पर करने में मदद मिल सकती है।

  • रेगुलर हेल्थ चेक-अप: डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच करवाएं।
  • पीरियड्स में होने वाले बदलावों पर नजर रखें: पीरियड्स के साइकिल पर नजर रखने और असामान्य लक्षणों की जानकारी डॉक्टर को देने से समस्या की पहचान में मदद मिल सकती है।
  • हेल्दी लाइफस्टाइल: बैलेंस्ड डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और स्ट्रेस मैनेजमेंट पूरी रिप्रोडक्टिव हेल्थ को सपोर्ट कर सकते हैं।
  • जल्दी मेडिकल कंसल्टेशन: अगर लगातार पेल्विक दर्द या पीरियड्स में बदलाव जैसे लक्षण हों, तो मेडिकल सलाह लें।
  • फॉलो-अप पूरा करें: अगर पहले ओवेरियन सिस्ट का पता चला है, तो डॉक्टर द्वारा बताए गए फॉलो-अप और अल्ट्रासाउंड को समय पर करवाएं।

ध्यान रखें कि हर ओवेरियन सिस्ट को रोकना संभव नहीं है। इसलिए लक्षणों को समझना और जरूरत पड़ने पर समय पर जांच करवाना महत्वपूर्ण है।

ओवेरियन सिस्ट होने पर डॉक्टर से कब मिलें?

अगर आपको ओवेरियन सिस्ट है या अल्ट्रासाउंड में सिस्ट का पता चला है, तो डॉक्टर द्वारा बताए गए फॉलो-अप को पूरा करना जरूरी है।

निम्न लक्षण दिखाई देने पर जल्द मेडिकल सलाह लेनी चाहिए:

  • अचानक तेज पेट या पेल्विक दर्द
  • लगातार या बढ़ता हुआ दर्द
  • दर्द के साथ मतली या उल्टी
  • चक्कर या अत्यधिक कमजोरी
  • बुखार के साथ पेट या पेल्विक दर्द
  • असामान्य योनि से रक्तस्राव
  • पेट में लगातार सूजन या भारीपन
  • मेनोपॉज़ के बाद नए लक्षण या ओवेरियन सिस्ट का पता चलना

अचानक तेज दर्द, चक्कर, कमजोरी या बेहोशी जैसा महसूस होना गंभीर जटिलता का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत मेडिकल मदद लेना जरूरी है।

निष्कर्ष

ओवेरियन सिस्ट एक आम समस्या है जो कई महिलाओं को अपनी जिंदगी में कभी न कभी हो सकती है। ज्यादातर सिस्ट नुकसान नहीं पहुंचाते और बिना इलाज के अपने आप ठीक हो सकते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में सिस्ट लंबे समय तक बना रह सकता है, बढ़ सकता है या दर्द और अन्य जटिलताएं पैदा कर सकता है।

ओवेरियन सिस्ट का होना अपने आप में निःसंतानता का कारण नहीं है। हालांकि, एंडोमेट्रियोसिस से जुड़े सिस्ट जैसे कुछ खास प्रकार के सिस्ट या उनसे जुड़ी स्थितियां फर्टिलिटी पर असर डाल सकती हैं।

लक्षणों, पहचान के तरीकों और इलाज के तरीकों को समझने से महिलाओं को अपनी रिप्रोडक्टिव हेल्थ के बारे में सोच-समझकर फैसले लेने में मदद मिलती है। रेगुलर हेल्थ चेक-अप और समय पर मेडिकल सलाह ओवेरियन सिस्ट को प्रभावी तरीके से मैनेज करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

क्या अंडाशय में सिस्ट खतरनाक है?

आमतौर पर अंडाशय में सिस्ट खतरनाक नहीं होते हैं। कई सिस्ट कुछ समय के बाद अपने आप ठीक हो जाते हैं। हालांकि, अगर सिस्ट बड़ा हो, लंबे समय तक बना रहे, असामान्य दिखाई दे या तेज दर्द जैसी समस्या पैदा करे, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

क्या ओवेरियन सिस्ट कैंसर बन सकते हैं?

ज्यादातर ओवेरियन सिस्ट बिनाइन यानी कैंसर न होने वाले होते हैं। हालांकि, कुछ असामान्य ओवेरियन संरचनाओं को आगे की जांच की जरूरत हो सकती है। मेनोपॉज़ के बाद पाए जाने वाले सिस्ट का डॉक्टर द्वारा सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जा सकता है।

कितने साइज़ का ओवेरियन सिस्ट cm में खतरनाक होता है?

केवल सिस्ट का आकार देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि वह खतरनाक है या नहीं। डॉक्टर सिस्ट के आकार के साथ उसकी बनावट, प्रकार, लक्षण, उम्र और मेनोपॉज़ की स्थिति को भी ध्यान में रखते हैं। बड़ा सिस्ट होने पर निगरानी या आगे की जांच की जरूरत हो सकती है।

यूट्रस में सिस्ट का इलाज

यूट्रस में होने वाली समस्याएं ओवेरियन सिस्ट से अलग हो सकती हैं। इलाज समस्या के कारण और प्रकार पर निर्भर करता है और इसमें निगरानी, दवा या सर्जरी शामिल हो सकती है।

जब आपको ओवेरियन सिस्ट होता है तो क्या होता है?

कई ओवेरियन सिस्ट में लक्षण नहीं होते और वे अपने आप ठीक हो जाते हैं। लेकिन कुछ सिस्ट से पेल्विक दर्द, पेट फूलना, पीरियड्स में बदलाव या यौन संबंध के दौरान दर्द हो सकता है। बड़े या फटे हुए सिस्ट से अचानक तेज दर्द हो सकता है और तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत पड़ सकती है।

ओवेरियन सिस्ट का नॉर्मल साइज़ क्या होता है?

ओवेरियन सिस्ट का कोई एक निश्चित “नॉर्मल” साइज़ नहीं होता। सिस्ट का मूल्यांकन उसकी उम्र, मासिक धर्म की स्थिति, प्रकार, बनावट और अन्य लक्षणों के आधार पर किया जाता है। कुछ छोटे सिस्ट सामान्य मासिक धर्म चक्र का हिस्सा हो सकते हैं और अपने आप ठीक हो सकते हैं।

क्या ओवेरियन सिस्ट के बावजूद प्रेग्नेंसी हो सकती है?

हां, ज्यादातर महिलाओं में ओवेरियन सिस्ट होने के बावजूद प्रेग्नेंसी हो सकती है। हालांकि, यह सिस्ट के प्रकार और उससे जुड़ी स्थिति पर निर्भर करता है। अगर आप गर्भधारण की योजना बना रही हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

क्या ओवेरियन सिस्ट अपने आप ठीक हो सकता है?

हां, कई फंक्शनल ओवेरियन सिस्ट कुछ पीरियड्स या कुछ महीनों के अंदर अपने आप ठीक हो सकते हैं। हालांकि, कुछ सिस्ट लंबे समय तक बने रह सकते हैं और उनके लिए मेडिकल निगरानी या इलाज की जरूरत हो सकती है।

ओवेरियन सिस्ट फटने के क्या लक्षण हैं?

ओवेरियन सिस्ट फटने पर अचानक तेज पेट या पेल्विक दर्द, चक्कर, कमजोरी, मतली या उल्टी जैसे लक्षण हो सकते हैं। अगर तेज दर्द के साथ चक्कर, कमजोरी या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए।

क्या ओवेरियन सिस्ट और PCOS एक ही है?

नहीं, ओवेरियन सिस्ट और PCOS एक ही समस्या नहीं हैं। ओवेरियन सिस्ट ओवरी में बनने वाली संरचना है, जबकि PCOS एक हार्मोन से जुड़ी स्थिति है जिसमें ओव्यूलेशन और मासिक धर्म प्रभावित हो सकते हैं।

क्या ओवेरियन सिस्ट की सर्जरी से फर्टिलिटी प्रभावित होती है?

ओवेरियन सिस्ट की सर्जरी का फर्टिलिटी पर असर सिस्ट के प्रकार, आकार, स्थान और सर्जरी की तकनीक पर निर्भर करता है। डॉक्टर आमतौर पर जहां संभव हो, स्वस्थ ओवेरियन टिशू को सुरक्षित रखने की कोशिश करते हैं। अगर आप गर्भधारण की योजना बना रही हैं, तो सर्जरी से पहले डॉक्टर से फर्टिलिटी के बारे में चर्चा करना जरूरी है।

मेनोपॉज़ के बाद ओवेरियन सिस्ट होना क्या सामान्य है?

मेनोपॉज़ के बाद भी ओवेरियन सिस्ट पाए जा सकते हैं, लेकिन इस उम्र में डॉक्टर इनका अधिक सावधानी से मूल्यांकन कर सकते हैं। सिस्ट की बनावट, आकार और अन्य कारकों के आधार पर निगरानी या अतिरिक्त जांच की सलाह दी जा सकती है।

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