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एंडोमेट्रियोसिस क्या है – कारण, लक्षण और बचाव (Endometriosis in Hindi)

  • Published on June 01, 2022
एंडोमेट्रियोसिस क्या है – कारण, लक्षण और बचाव (Endometriosis in Hindi)

एंडोमेट्रियोसिस क्या है (What is Endometriosis in Hindi)

एंडोमेट्रियोसिस महिलाओं में होने वाली एक आम समस्या है। इसका नाम ‘एंडोमेट्रियम’ शब्द से आता है जो बच्चेदानी यानी गर्भाशय (यूट्रस) की अस्तर के टिशू (उत्तक) होते हैं।

जब एंडोमेट्रियम नामक उत्तक महिला के गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगता है तो एंडोमेट्रियोसिस की समस्या पैदा होती है।

शोध के मुताबिक, विश्व स्तर पर लगभग 17.6 करोड़ महिलाएं एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित हैं। भारत में लगभग 2.6 करोड़ महिलाएं इस समस्या से ग्रसित हैं।

 

एंडोमेट्रियोसिस सबसे अधिक निम्न अंगों में देखा जाता है:-

  • अंडाशय (ओवरी)
  • फैलोपियन ट्यूब
  • गर्भाशय की बाहरी सतह
  • उत्तक जो गर्भाशय को उसकी जगह पर रखते हैं

 

एंडोमेट्रियोसिस दूसरे अंगों में भी हो सकता है जिसमें शामिल हैं:-

  • आंत
  • योनि
  • वल्वा
  • गर्भाशय ग्रीवा
  • श्रोणि गुहा की परत
  • गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स)
  • ब्लैडर (मूत्राशय)
  • रेक्टम (मलाशय)

एंडोमेट्रियोसिस का समय पर उचित जांच और उपचार आवश्यक है। लंबे समय तक इसके लक्षणों को नजरअंदाज करना या इसकी इलाज में देरी करना अनेक गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है जिसमें बांझपन और कैंसर आदि शामिल हैं।

 

और पढ़े : बांझपन क्या है — प्रकार और कारण 

 

एंडोमेट्रियोसिस के चरण (Stages of Endometriosis in Hindi)

Stages of Endometriosis

एंडोमेट्रियोसिस के चार चरण होते है। इन चरणों के बारे में हम आपको नीचे विस्तार से बता रहे हैं।

  • पहला चरण

इस चरण में छीछले प्रत्यारोपण होते हैं जिन्हें कभी-कभी अल्सर या ओवेरियन कैंसर भी समझा जा सकता है।

ये प्रत्यारोपण श्रोणि की सतह पर छोटे धब्बों की तरह दिखाई देते हैं जिससे जलन और सूजन हो सकती है।

 

  • दूसरा चरण

इस दौरान गर्भाशय और मलाशय के बीच के हिस्से में घाव हो जाते हैं। एंडोमेट्रियोसिस जब दूसरी चरण में होता है तो इसमें रेशेदार एढ़ीजन के ऊपर काले धब्बे दिखाई देते हैं जिसके कारण महिला को ओवुलेशन के दौरान श्रोणि में दर्द हो सकता है।

 

  • तीसरा चरण

एंडोमेट्रियोसिस के तीसरे चरण में एंडोमेट्रीओमा दिखाई देने लगता है। इस स्थिति में अगर रसौली फट जाती है तो पेट में तेज दर्द और श्रोणि में सूजन हो सकती है। 

जैसे-जैसे एंडोमेट्रिओसिस का आकार और संख्या बढ़ता हैं, इनके कारण होने वाले एढ़ीजन भी बढ़ जाते हैं।

 

  • चौथा चरण

यह एंडोमेट्रियोसिस का आखिरी चरण है जिसके दौरान गंभीर अल्सर और एढ़ीजन की संख्या बढ़ जाती है।

इस चरण में एंडोमेट्रियोसिस का आकार एक अंगूर जितना बड़ा हो सकता है। एंडोमेट्रियोसिस का आकार 2 सेमी से अधिक होने पर डॉक्टर सर्जरी का उपयोग करके उसे हटाते हैं।

 

एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण (Symptoms of Endometriosis in Hindi)

एंडोमेट्रियोसिस के अनेक लक्षण होते हैं जिनकी मदद से आपको या आपके डॉक्टर को इस बात का अंदाजा हो सकता है कि आपको एंडोमेट्रियोसिस है।

एंडोमेट्रियोसिस के लक्षणों में निम्न शामिल हैं:-

  • बांझपन की शिकयत होना
  • यौन संबंध बनाते समय दर्द होना
  • पीरियड्स के दौरान तेज दर्द होना 
  • बिना पीरियड्स के श्रोणि के हिस्से में दर्द होना

अगर आप पीरियड्स के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो इस ब्लॉग पीरियड्स क्या है और क्यों होता है? को अवश्य पढ़ें।

ऊपर दिए गए लक्षणों के अलावा, एंडोमेट्रियोसिस होने पर आप खुद में चक्रीय लक्षण को अनुभव कर सकती हैं। 

चक्रीय लक्षण वो लक्षण हैं जो पीरियड्स के कुछ दिनों पहले शुरू होते हैं और कुछ दिनों के बाद दूर चले जाते है।

ये लक्षण पीरियड्स बंद होने के बाद अगले महीने फिर से आ सकते हैं। इन लक्षणों में शामिल हैं:-

  • कंधे में दर्द होना
  • गुदा से ब्लीडिंग होना
  • मूत्र के साथ खून आना
  • शौच करते समय दर्द या मुश्किल होना
  • समय-समय पर सूजन, दस्त या कब्ज की शिकायत होना

अगर आप इनमें से एक या एक से अधिक लक्षणों को खुद में अनुभव करती हैं तो आपको अपने डॉक्टर से परामर्श करने की आवश्यकता है।

 

एंडोमेट्रियोसिस के कारण (Causes of Endometriosis in Hindi)

अभी तक एंडोमेट्रियोसिस के सही कारण निश्चित नहीं है। हालांकि, निम्न में से कुछ स्थितयां इस समस्या का कारण हो सकती हैं:-

  • भ्रूण कोशिका

एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन यौवन के दौरान भ्रूण कोशिकाओं (विकास के शुरुआती चरणों वाली कोशिकाएं) को एंडोमेटियल कोशिका प्रत्यारोपण में परिवर्तित कर सकते हैं जिससे एंडोमेट्रियोसिस का खतरा बढ़ सकता है।

 

  • उम्र

एंडोमेट्रिओसिस किसी भी उम्र की महिला को हो सकता है, लेकिन अधिकतर मामलों में यह 25-40 वर्ष के बीच की महिलाओं में देखने को मिलता है।

 

  • परिवार का इतिहास

अगर आपके परिवार में किसी को एंडोमेट्रियोसिस है तो आपको यह होने का जोखिम बढ़ जाता है।

 

  • रेट्रोग्रेड पीरियड्स

इस स्थिति में पीरियड्स के दौरान खून की एंडोमेट्रिअल कोशिकाएं फैलोपियन ट्यूब के माध्यम से शरीर से बाहर निकलने के बजाय पेल्विक कैविटी में चली जाती हैं।

ये एंडोमेट्रिअल कोशिकाएं पेल्विक अंगों की सतहों और उनकी दीवारों पर चिपक जाती हैं। और ये प्रत्येक मेंस्ट्रुअल साइकिल के दौरान अधिक मोटी होती हैं और रक्तस्राव करती हैं।

 

  • पेरिटोनियल कोशिकाएं

यौवन (प्यूबर्टी) के दौरान पेट के अंदरूनी भाग को रेखांकित करने वाली पेरिटोनियल कोशिकाएं जब एंडोमेट्रिअल कोशिकाओं में परिवर्तित हो जाती हैं तो एंडोमेट्रियोसिस की समस्या पैदा हो सकती है।

 

  • गर्भावस्था का इतिहास

गर्भावस्था महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस से बचाता है। जिन महिलाओं ने कभी शिशु को जन्म नहीं दिया है उनमें इसका खतरा अधिक होता है। हालांकि, यह उन महिलाओं को भी हो सकता है जो पहले गर्भवती हो चुकी हैं।

 

  • मासिक धर्म का इतिहास

मासिक धर्म से संबंधित समस्याएं जैसे कि कम या ज्यादा समय के लिए मासिक धर्म होना, भारी मासिक धर्म होना, कम उम्र में मासिक धर्म धुरु हो जाना आदि तो आपमें इस समस्या का जोखिम बढ़ सकता है।

 

एंडोमेट्रियोसिस की जांच (Endometriosis Diagnosis in Hindi)

एंडोमेट्रियोसिस का उपचार करने से पहले लक्षणों के आधार पर एंडोमेट्रियोसिस का आकार, संख्या और गंभीरता का पता लगाने के लिए डॉक्टर कुछ जांच करते हैं। इसमें मुख्य रूप से अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, लेप्रोस्कोपी और पेल्विक परीक्षा आदि शामिल हैं। पेल्विक टेस्ट के दौरान डॉक्टर पेल्विस यानी श्रोणि की जांच करते हैं। इससे श्रोणि में उपस्थित किसी भी तरह की असामान्यता या प्रजनन अंगों में मौजूद सिस्ट की पुष्टि की जाती है।

 

एंडोमेट्रियोसिस से कैसे बचें (How to Prevent Endometriosis in Hindi)

एंडोमेट्रियोसिस को रोका नहीं जा सकता है, लेकिन आप अपने शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर को कम करके इसको विकसित होने की आशंका को कम कर सकती हैं। मासिक धर्म चक्र के दौरान एस्ट्रोजन आपके गर्भाशय की लाइनिंग को मोटा करता है।

अपने शरीर में एस्ट्रोजन के स्तर को कम रखने या कम करने के लिए आप निम्न बिंदुओं का पालन कर सकती हैं:-

नियमित रूप से व्यायाम करना। इससे आपके शरीर का फैट कम होगा और शरीर फिट रहेगा। फैट कम होने से शरीर में एस्ट्रोजन की मात्रा भी कम होती है।

गर्भनिरोधक गोलियां, पैच या एस्ट्रोजन की कम खुराक वाले छल्ले के बारे में अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

शराब का सेवन सिमित या बंद कर दें। अधिक मात्रा में शराब का सेवन करने से शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ता है।

अधिक मात्रा में कैफीन-युक्त पेय पदार्थ जैसे कि चाय, कॉफी आदि का सेवन न करें। आप एक दिन में एक चाय या कॉफी पी सकती हैं।

 

निष्कर्ष

एंडोमेट्रियोसिस का समय पर उचित निदान और उपचार आवश्यक है। यह फैलोपियन ट्यूब या अंडाशय को नुकसान पहुंचा सकता है जिससे प्रजनन संबंधित समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

दवाएं और सर्जरी एंडोमेट्रियोसिस के पैच हटाने में मदद कर सकती हैं, लेकिन इसकी गारंटी नहीं कि इसके बाद आप गर्भवती हो पाएंगी।

एंडोमेट्रियोसिस होने या इसके लक्षण अनुभव होने पर आपको तुरंत एक अनुभवी और विश्वसनीय स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए।

 

Written by:
Dr Rachita Munjal

Dr Rachita Munjal

Consultant – Birla Fertility and IVF
Dr Rachita Munjal completed her MBBS from Dr D. Y. Patil Medical College, Hospital & Research Centre, Pune and MS (Obstetrics and gynaecology) from Dr. D.Y Patil Vidyapeeth Pune. She has also completed her DAGE (Diploma in Advanced Gynae Endoscopy) from Germany and MRCOG-I (Royal College of Obstetricians & Gynaecologists, UK) Membership Examination.

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