
Uterine Cancer in Hindi – गर्भाशय कैंसर के लक्षण, कारण और इलाज

Table of Contents
- बच्चेदानी में कैंसर क्या है?
- बच्चेदानी में कैंसर के प्रकार
- बच्चेदानी में कैंसर कैसे होता है? – Bacchedani ka Cancer Kaise Hota Hai
- बच्चेदानी में कैंसर के लक्षण – Bacchedani Mein Cancer Ke Lakshan
- गर्भाशय कैंसर का जोखिम किन्हें ज्यादा होता है?
- यूटेराइन कैंसर कितना खतरनाक है?
- बच्चेदानी का कैंसर को फैलने में कितना समय लगता है?
- बच्चेदानी के कैंसर का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट किए जाते हैं?
- यूटेराइन कैंसर में सर्वाइवल रेट क्या है?
- क्या यूटेराइन कैंसर ठीक हो सकता है?
- बच्चेदानी में कैंसर का इलाज कैसे किया जाता है?
- निष्कर्ष
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- यूटेराइन कैंसर कितना आम है?
बच्चेदानी के कैंसर को गर्भाशय कैंसर या यूटेराइन कैंसर (Uterine Cancer) भी कहा जाता है, जो महिलाओं के प्रजनन अंग को प्रभावित करता है। बच्चेदानी वह स्थान है, जहां गर्भधारण के बाद बच्चे का विकास होता है। गर्भाशय कैंसर या बच्चेदानी का कैंसर महिलाओं में होने वाला कैंसर है, जो बच्चेदानी की परत में शुरू होता है और बाद में शरीर के दूसरे अंग में भी फैल सकता है। सामान्यतः यह समस्या 60 साल की महिलाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है, लेकिन वर्तमान में हर उम्र कि महिलाओं में बच्चेदानी में कैंसर के मामले देखे जा रहे हैं।
चलिए इस ब्लॉग से समझते हैं कि बच्चेदानी में कैंसर के कारण और लक्षण क्या है और समय रहते कैसे इस स्थिति का इलाज संभव है?
बच्चेदानी में कैंसर क्या है?
शरीर में जब कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती है, तो वह कैंसर का रूप ले लेती है। कैंसर जिस अंग को प्रभावित करता है, उसका नाम उसी अंग के आधार पर ही रखा जाता है। जब कैंसर की शुरुआत बच्चेदानी में होती है, तो इसे बच्चेदानी के कैंसर के नाम से जाना जाता है।
महिलाओं के बच्चेदानी को कई तरह के कैंसर प्रभावित करते हैं, जिसमें बच्चेदानी का कैंसर मुख्य प्रकार का कैंसर है। मेडिकल भाषा में इसे एंडोमेट्रियल कैंसर, बच्चेदानी का कैंसर या यूटेराइन कैंसर के नाम से भी जाना जाता है। बच्चेदानी में कैंसर भी अलग-अलग प्रकार के होते हैं, जिनके बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है।
बच्चेदानी में कैंसर के प्रकार
मुख्य रूप से बच्चेदानी का कैंसर दो प्रकार के होते हैं, जिन्हें यूटराइन सार्कोमा और एंडोमेट्रियल कार्सिनोमा कहा जाता है। चलिए दोनों को एक-एक करके समझते हैं –
- एंडोमेट्रियल कार्सिनोमा या एंडोमेट्रियल कैंसर (Endometrial Carcinoma): ज्यादातर महिलाओं को इस प्रकार का कैंसर सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। इसमें बच्चेदानी की परत या फिर एंडोमेट्रियम (endometrium) प्रभावित होती है।
- यूटेराइन सार्कोमा या यूटेराइन कैंसर (Uterine Sarcoma): यूटराइन कैंसर महिलाओं के बच्चेदानी की दीवार को प्रभावित करने वाला कैंसर है। इस प्रकार का कैंसर बहुत कम महिलाओं को प्रभावित करता है।
बच्चेदानी में कैंसर कैसे होता है? – Bacchedani ka Cancer Kaise Hota Hai
बढ़ती उम्र बच्चेदानी में कैंसर का एक मुख्य जोखिम कारक है। वह महिलाएं भी बच्चेदानी में कैंसर के खतरे के दायरे में होती हैं, जिन्होने बच्चेदानी को निकालने का ऑपरेशन नहीं कराया है। ज्यादातर मामलों में यह देखा गया है कि वह महिलाएं इस रोग से पीड़ित होती हैं, जिनमें मेनोपॉज या फिर रजोनिवृत्ति (पीरियड्स बंद होना) का समय शुरू हो जाता है।
यहां आपको एक बात समझनी होगी कि बच्चेदानी में कैंसर के सटीक कारण अभी भी अज्ञात है। हमारे सहित सभी स्त्री रोग विशेषज्ञों की मानें तो बच्चेदानी की कोशिकाओं में बदलाव आने से बच्चेदानी में कैंसर की समस्या होती है। यह असामान्य कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ती रहती है, जिसके बाद यह कोशिकाएं गांठ (ट्यूमर) का रूप ले लेती है।
हालांकि कुछ जोखिम कारक हैं, जो गर्भाशय कैंसर की संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं। यदि आप इनमें से किसी भी श्रेणी में आते हैं, तो हम आपको सलाह देंगे कि आप अपने डॉक्टर से बात करें या फिर हमसे संपर्क करें।
बच्चेदानी में कैंसर के लक्षण – Bacchedani Mein Cancer Ke Lakshan
यहां आपको एक बात समझने की आवश्यकता है कि बच्चेदानी में कैंसर के लक्षण कई अन्य गंभीर समस्याओं के समान ही होते हैं। हालांकि कुछ लक्षण हैं, जो बच्चेदानी में कैंसर की तरफ इशारा करते हैं जैसे –
- मेनोपॉज से पहले पीरियड्स के बीच में योनि से खून आना।
- मेनोपॉज के बाद भी योनि से रक्त हानि या स्पॉटिंग होना।
- पेट के निचले भाग में दर्द या पेल्विक (श्रोणि) क्षेत्र में ऐंठन होना।
- मेनोपॉज के बाद योनि से तरल पदार्थ का निकलना।
- 40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में ज्यादा देर तक या बार-बार रक्त हानि होना।
- यौन संबंध बनाते समय योनि में दर्द महसूस होना।
यह सारे लक्षण आपको भ्रमित कर सकते हैं, क्योंकि यह योनि के अन्य गंभीर रोगों की तरफ भी संकेत करते हैं। इसलिए लक्षणों का अनुभव होने पर तुरंत अपने डॉक्टर से बात करें या हमसे संपर्क करें।
गर्भाशय कैंसर का जोखिम किन्हें ज्यादा होता है?
बच्चेदानी में कैंसर (गर्भाशय कैंसर) के कई जोखिम कारक होते हैं, जिन्हें हम आगे एक-एक करके समझेंगे। निम्नलिखित स्थितियों में बच्चेदानी में कैंसर की समस्या उत्पन्न होती है –
- उम्र: जिन महिलाओं की उम्र 60 से अधिक है, उन्हें इस रोग के होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
- अधिक वजन: अधिक वजन और मोटापा बच्चेदानी में कैंसर के साथ-साथ कई अन्य गंभीर समस्याओं को बढ़ावा दे सकता है।
- फैमिली हिस्ट्री: बच्चेदानी के कैंसर की फैमिली हिस्ट्री होने पर समय-समय पर कैंसर की जांच जरूर कराएं।
- मधुमेह: मधुमेह (डायबिटीज) का संबंध सीधा मोटापा से होता है, जो कि स्वयं कैंसर का एक जोखिम कारक है।
- अंडाशय का रोग: अंडाशय के ट्यूमर के कारण शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में असामान्यताएं आती हैं, जो कैंसर का जोखिम कारक है।
- पीरियड्स का समय: यदि किसी को भी 12 वर्ष से पहले ही पीरियड शुरू हो जाते हैं या फिर मेनोपॉज में देरी होती है, तो इसके कारण बच्चेदानी में कैंसर की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
- गर्भधारण न करना: प्रेग्नेंट न होने के कारण शरीर में एस्ट्रोजन का खतरा बढ़ जाता है, जो कैंसर का मुख्य कारण है।
- रेडियो फ्रीक्वेंसी थेरेपी (Radio-frequency therapy) का प्रयोग: अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार कुछ मामलों में देखा गया है कि रेडियो फ्रीक्वेंसी थेरेपी के कारण कैंसर की संभावना उत्पन्न हुई है।
- एस्ट्रोजन रिप्लेसमेंट थेरेपी (Estrogen Replacement Therapy): इस प्रकार की थेरेपी का प्रयोग अक्सर मेनोपॉज के लक्षणों को मैनेज करने और इलाज करने के लिए होता है। प्रोजेस्टेरोन के बिना इस थेरेपी के कारण बच्चेदानी में कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
- टेमोक्सीफेन (Tamoxifen) का साइड इफैक्ट: यह दवाएं अक्सर ब्रेस्ट कैंसर के रोगियों को दी जाती हैं। यह दवाएं स्तन कैंसर के लक्षणों से आराम तो दिलाती हैं, लेकिन इसके कारण बच्चेदानी में कैंसर का खतरा थोड़ा सा बढ़ जाता है।
कैंसर की संभावना होने पर तुरंत डॉक्टर से बात करें और चिकित्सा सहायता लें।
यूटेराइन कैंसर कितना खतरनाक है?
बहुत से लोग सोचते हैं कि यूटेराइन कैंसर कितना खतरनाक है? इसकी गंभीरता कई बातों पर निर्भर करती है, जिनमें शामिल हैं:
- कैंसर का स्टेज
- ट्यूमर का टाइप और ग्रेड
- मरीज़ की पूरी सेहत
- इलाज कितनी जल्दी शुरू होता है
अगर जल्दी पता चल जाए, तो यूटेराइन कैंसर अक्सर यूट्रस तक ही सीमित रहता है और इसका इलाज बहुत आसानी से हो सकता है। हालांकि, अगर इसका इलाज न किया जाए, तो यह आस-पास के अंगों जैसे ओवरी, लिम्फ नोड्स, या दूर के अंगों में भी फैल सकता है। जल्दी डायग्नोसिस से नतीजों में काफी सुधार होता है।
बच्चेदानी का कैंसर को फैलने में कितना समय लगता है?
यूटेराइन कैंसर का बढ़ना और फैलना उसके टाइप और ग्रेड पर निर्भर करता है। एंडोमेट्रियल कैंसर अक्सर धीरे-धीरे बढ़ता है और फैलने से पहले सालों तक यूटेरस तक ही रह सकता है। हालांकि, हाई-ग्रेड या एग्रेसिव रूप ज़्यादा तेज़ी से फैल सकते हैं। रेगुलर चेक-अप और लक्षणों की शुरुआती जांच से बीमारी के बढ़ने का खतरा बहुत कम हो जाता है।
बच्चेदानी के कैंसर का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट किए जाते हैं?
जल्दी और सही डायग्नोसिस इलाज की सफलता में अहम भूमिका निभाता है। यूटेराइन कैंसर के डायग्नोसिस में आमतौर पर कई स्टेप्स होते हैं:
- पेल्विक जांच: डॉक्टर यूटेरस और आस-पास के अंगों में असामान्यताओं की जांच करता है।
- अल्ट्रासाउंड: ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड एंडोमेट्रियम की मोटाई मापने और असामान्य ग्रोथ का पता लगाने में मदद करता है।
- एंडोमेट्रियल बायोप्सी: यूटेराइन की परत से एक छोटा टिशू सैंपल लिया जाता है और माइक्रोस्कोप से उसकी जांच की जाती है। यह सबसे पक्के डायग्नोस्टिक टेस्ट में से एक है।
- हिस्टेरोस्कोपी: यूटेराइन के अंदर की जांच करने और ज़रूरत पड़ने पर टिशू इकट्ठा करने के लिए एक पतली, रोशनी वाली ट्यूब डाली जाती है।
- इमेजिंग टेस्ट: कैंसर फैला है या नहीं, यह पता लगाने के लिए CT स्कैन, MRI, या PET स्कैन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
यूटेराइन कैंसर में सर्वाइवल रेट क्या है?
सर्वाइवल रेट काफी हद तक डायग्नोसिस के स्टेज पर निर्भर करता है। जब जल्दी पता चल जाए और यूटेरस तक ही सीमित रहे, तो पांच साल का सर्वाइवल रेट 90% से ज़्यादा हो सकता है। हालांकि, अगर कैंसर दूर के अंगों तक फैल गया हो तो सर्वाइवल कम हो जाता है।
इसीलिए लक्षणों के बारे में जानकारी और जल्दी मेडिकल सलाह बहुत ज़रूरी है।
क्या यूटेराइन कैंसर ठीक हो सकता है?
हाँ, यूटेराइन कैंसर अक्सर शुरुआती स्टेज में डायग्नोस होने पर ठीक हो जाता है। अगर कैंसर फैला नहीं है तो सिर्फ सर्जरी से ही उसे पूरी तरह से हटाया जा सकता है। ज़्यादा एडवांस स्टेज में भी, इलाज से ज़िंदगी की उम्मीद काफी बढ़ सकती है और ज़िंदगी की क्वालिटी बेहतर हो सकती है।
यूटेराइन कैंसर ठीक हो सकता है या नहीं, यह तय करने के लिए जल्दी पता लगाना सबसे ज़रूरी है।
बच्चेदानी में कैंसर का इलाज कैसे किया जाता है?
इलाज मरीज़ की स्टेज और पूरी सेहत पर निर्भर करता है। आम इलाज के ऑप्शन में शामिल हैं:
- सर्जरी: सर्जरी सबसे आम इलाज है। आमतौर पर हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय को निकालना) की जाती है। कई मामलों में, ओवरी और फैलोपियन ट्यूब भी निकाल दिए जाते हैं।
- रेडिएशन थेरेपी: कैंसर सेल्स को मारने या दोबारा होने से रोकने के लिए हाई-एनर्जी बीम का इस्तेमाल किया जाता है।
- हार्मोन थेरेपी: यह उन कैंसर के लिए रिकमेंड किया जा सकता है जो हार्मोन से होते हैं या जब सर्जरी मुमकिन न हो।
- कीमोथेरेपी: कैंसर सेल्स को खत्म करने के लिए दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है, खासकर अगर कैंसर यूटेरस से बाहर फैल गया हो।
- टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी: कुछ मामलों में, नए इलाज खास कैंसर सेल्स को टारगेट करते हैं या इम्यून सिस्टम को बूस्ट करते हैं।
एक पर्सनलाइज़्ड इलाज प्लान सबसे अच्छा नतीजा पक्का करता है।
निष्कर्ष
यूटेराइन कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन अगर इसका जल्दी पता चल जाए तो यह सबसे आसानी से ठीक होने वाले गाइनेकोलॉजिकल कैंसर में से एक है। असामान्य ब्लीडिंग जैसे लक्षणों को पहचानना और समय पर मेडिकल सलाह लेना बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है। अगर आप सोच रहे हैं कि यूटेराइन कैंसर कितना खतरनाक है, तो याद रखें कि जल्दी पता चलने से नतीजे काफी बेहतर हो जाते हैं।
रेगुलर हेल्थ चेक-अप, हेल्दी वज़न बनाए रखना और हार्मोनल इम्बैलेंस को ठीक करने से रिस्क कम करने में मदद मिल सकती है। जागरूकता महिलाओं को अपनी हेल्थ पर कंट्रोल रखने और बिना देर किए देखभाल लेने में मदद करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बच्चेदानी के कैंसर का कैसे पता चलता है?
बच्चेदानी में कैंसर होने पर महिलाएं खुद में अनेक लक्षणों का अनुभव करती हैं। उन लक्षणों के आधार पर बच्चेदानी में कैंसर की संभावनाओं का पता चलता है।
गर्भाशय में कैंसर कैसे होता है?
जब बच्चेदानी की आंतरिक कोशिकाएं असामान्य होकर अनियंत्रित रूप से विकसित होने लगती हैं, तो उनके कारण ट्यूमर का निर्माण होता है, जो बाद में कैंसर का रूप ले लेती है।
क्या बच्चेदानी का कैंसर ठीक हो सकता है?
हाँ, बच्चेदानी के कैंसर को ठीक किया जा सकता है। ऐसा तभी संभव है जब स्थिति का निदान शुरुआती चरण में ही हो जाए और उसका इलाज भी तुरंत शुरू हो जाए।
बच्चेदानी में कैंसर के कितने चरण होते हैं?
गंभीरता के आधार पर बच्चेदानी में कैंसर के चार चरण होते हैं –
- चरण 1: इसमें कैंसर केवल बच्चेदानी में होता है।
- चरण 2: इस चरण में कैंसर बच्चेदानी और बच्चेदानी के मुख में फ़ैल जाता है।
- चरण 3: इसमें कैंसर का प्रसार श्रोणि के लिम्फ नोड्स में हो जाता है, लेकिन मूत्र मार्ग अभी भी इससे दूर होता है।
- चरण 4: इसमें कैंसर पेल्विक क्षेत्र (श्रोणि) के बाहर फैल जाता है और इससे अन्य अंग भी प्रभावित हो जाते हैं।
क्या एंडोमेट्रियल कैंसर और यूटेराइन कैंसर एक ही चीज़ हैं?
एंडोमेट्रियल कैंसर यूटेराइन कैंसर का सबसे आम टाइप है और यह यूट्रस की लाइनिंग में शुरू होता है। हालांकि इन शब्दों का इस्तेमाल अक्सर एक-दूसरे की जगह किया जाता है, यूटेराइन कैंसर में यूटेराइन सारकोमा जैसे रेयर टाइप भी शामिल हैं।
यूटेरस क्या करता है?
यूटेरस एक रिप्रोडक्टिव ऑर्गन है जहां प्रेग्नेंसी के दौरान एक फर्टिलाइज्ड एग इम्प्लांट होता है और बढ़ता है। अगर प्रेग्नेंसी नहीं होती है तो यह पीरियड्स के दौरान अपनी लाइनिंग भी छोड़ देता है।
यूटेराइन कैंसर कितना आम है?
यूटेराइन कैंसर दुनिया भर में सबसे आम गाइनेकोलॉजिकल कैंसर में से एक है, जो खासकर पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाओं को प्रभावित करता है। हाल के सालों में इसके मामले बढ़ रहे हैं, कुछ हद तक बढ़ते मोटापे की दर के कारण।
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