जब कोई महिला प्रेगनेंट होने की प्लानिंग करती है, तो सिर्फ पीरियड्स का रेगुलर होना ही काफी नहीं होता है। असली खेल होता है – ओवरी में बनने वाले अंडों (एग्स) का साइज और उनका हेल्दी होना। अगर आपको जानना है कि प्रेगनेंसी के लिए एग का साइज कितना होना चाहिए और कैसे उसे बढ़ाया जा सकता है, तो यह ब्लॉग आपके लिए है। प्रेगनेंसी के संबंध में किसी भी प्रकार की समस्या दिखने पर तुरंत हमारे विशेषज्ञों से मिलें और इलाज लें।
महिलाओं के अंडे का आकार क्यों है जरूरी?
महिलाओं की ओवरी में हर महीने बहुत सारे छोटे-छोटे फॉलिकल्स बनते हैं, जिनमें से किसी एक में अंडा (एग) बनता है। यही अंडा बाद में स्पर्म से मिलकर प्रेगनेंसी की शुरुआत करता है। लेकिन हर अंडा प्रेग्नेंसी के लिए तैयार नहीं होता है। एग का साइज और उसकी क्वॉलिटी दोनों बहुत मायने रखते हैं, जिसके बारे में हमारे विशेषज्ञ आपकी जांच करके बता सकते हैं।
एग कैसे बनता है? – फॉलिकल डेवलपमेंट के स्टेप्स
एग्ग बनने की प्रक्रिया कई चरणों में होती है, जिसे फॉलिकुलोजेनेसिस के रूप में भी जाना जाता है। यह प्रक्रिया कई अलग-अलग चरणों में होती है, जैसे कि –
- प्राइमॉर्डियल फॉलिकल्स – यह सबसे शुरुआती स्टेज होती है, जो बचपन से ही ओवरी में मौजूद रहते हैं।
- प्राइमरी फॉलिकल – इनमें थोड़ा विकास शुरू होता है, और अंडा हल्का बड़ा होने लगता है।
- सेकेंडरी फॉलिकल – अब फॉलिकल के अंदर फ्लूड भरने लगता है और वो धीरे-धीरे बढ़ता है।
- एंट्रल फॉलिकल – इस स्टेज में फॉलिकल का साइज करीब 2-9 मिमी होता है। यहीं से सही विकास की पहचान होती है।
- डोमिनेंट फॉलिकल – एक फॉलिकल बाकी सबको पीछे छोड़कर सबसे ज्यादा बढ़ता है। यही प्रेगनेंसी में रोल निभाता है।
- ग्राफियन फॉलिकल – जब फॉलिकल 18-26 मिमी तक पहुंच जाता है, तब वह अंडे को रिलीज करने के लिए पूरी तरह तैयार होता है।
- ओव्यूलेशन – इस प्रोसेस में फॉलिकल फटता है और एग ओवरी से बाहर निकलता है। ऐसा आमतौर पर तब होता है जब एग्ग का आकार लगभग 18-22 मिमी होता है।
प्रेगनेंसी के लिए एग का साइज कितना होना चाहिए?
प्रेगनेंसी के लिए एग का साइज बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करती है। चलिए इस संबंध में कुछ जानकारी प्राप्त करते हैं।
- ओव्यूलेशन से ठीक पहले 18-22 मिमी का एग साइज सबसे आदर्श माना जाता है।
- आईयूआई के लिए 18–24 मिमी का फॉलिकल साइज बेहतर रहता है।
- आईवीएफ में, जब फॉलिकल्स 18–20 मिमी के हो जाते हैं, तभी हॉर्मोनल इंजेक्शन से एग निकाला जाता है।
- अगर पीसीओएस है, तो फॉलिकल्स का साइज अनियमित होता है, लेकिन ट्रीटमेंट से 18-22 मिमी तक पहुंचाया जा सकता है।
फर्टिलिटी में फॉलिक्ल्स की भूमिका (Role of Follicles in Fertility)
महिलाओं के अंडाशय में मौजूद फॉलिक्ल्स (follicles) छोटे-छोटे द्रव से भरे हुए थैले होते हैं, जिनके अंदर अपूर्ण अंडे होते हैं। यही फॉलिक्ल्स महिलाओं की फर्टिलिटी क्षमता का एक अहम हिस्सा होते हैं, क्योंकि इन्हीं में से एक अंडा मैच्योर होकर हर महीने ओवुलेशन (ovulation) के दौरान बाहर निकलता है।
- फॉलिक्ल्स की संख्या (Follicle Count): हर महिला के अंडाशय में कुछ विशेष फॉलिक्ल्स होते हैं, जिन्हें एंट्रल फॉलिकल कहा जाता है। इनकी संख्या यह दिखाती है कि महिला की अंडों का स्टॉक कितना है। सामान्य रूप से हर अंडाशय में 6 से 10 एंट्रल फॉलिकल होना अच्छा माना जाता है।
- एग की क्वालिटी (Egg Quality): फॉलिक्ल्स के अंदर मौजूद अंडों की क्वालिटी बहुत मायने रखती है। उम्र के साथ खासकर 35 के बाद अंडों की गुणवत्ता में गिरावट आने लगती है, जिससे गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है।
प्रेगनेंसी के लिए फॉलिक्ल्स क्यों जरूरी होते हैं?
जब बात प्रेगनेंसी की आती है, तो महिलाओं के अंडे का आकार और फॉलिक्ल्स की स्थिति बहुत महत्वपूर्ण होती है।
- एग की क्वालिटी और साइज का रिश्ता: ज्यादा परिपक्व और बड़े साइज के फॉलिक्ल्स में आमतौर पर बेहतर क्वालिटी के अंडे होते हैं। आमतौर पर 18 से 22 mm के बीच का फॉलिक्ल साइज आदर्श माना जाता है, खासकर जब आप प्रेगनेंसी के लिए एग का साइज देख रहे हों।
- सही टाइमिंग पकड़ना जरूरी है: डॉक्टर जब फॉलिक्ल साइज को अल्ट्रासाउंड से मॉनिटर करते हैं, तो उन्हें यह अंदाजा हो जाता है कि ओवुलेशन कब होगा। इससे वो सही समय पर IUI या IVF की योजना बना सकते हैं, जिससे गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है।
प्रेगनेंसी के लिए एग का साइज कैसे बढ़ाएं?
प्राकृतिक तरीका
- अच्छी डाइट लें – प्रोटीन, हेल्दी फैट्स, एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन्स वाली चीजें खाएं। जैसे – मेवे, हरी सब्जियां, अंडे, और फलियां।
- तनाव कम करें – मेडिटेशन, योग, म्यूजिक थेरेपी से स्ट्रेस को कंट्रोल में रखें।
- हाइड्रेटेड रहें – दिन में कम से कम 2-3 लीटर पानी पिएं।
- नियमित एक्सरसाइज करें – वॉकिंग, योग, स्विमिंग जैसी ऐक्टिविटी से ब्लड फ्लो बेहतर होता है।
- शराब और कैफीन से बचें – यह ओवरी की हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
दवाइयों से फॉलिकल बढ़ाना
- यदि नेचुरल तरीकों से सुधार नहीं होता है, तो डॉक्टर कुछ हॉर्मोनल मेडिकेशन जैसे FSH, LH या Letrozole दे सकते हैं।
- ये दवाएं खासतौर पर IVF या IUI कराने वाली महिलाओं को दी जाती हैं ताकि एक से ज्यादा हेल्दी फॉलिकल्स बनें।
- ट्रीटमेंट के दौरान फॉलिकल्स की ग्रोथ को अल्ट्रासाउंड से मॉनिटर किया जाता है।
हर दिन के हिसाब से एग की ग्रोथ (Day-by-day follicle size)
एक सामान्य पीरियड्स साइकिल के दौरान, एग्ग की ग्रोथ पर निर्भर करती है। चलिए एग्ग के ग्रोथ को दिन के हिसाब से समझने का प्रयास करते हैं –
दिन | फॉलिकल का औसतन साइज |
Day 7 | 5-6 mm |
Day 9 | 8-10 mm |
Day 10 | 10-12 mm |
Day 11 | 12-14 mm |
Day 12 | 14-16 mm |
Day 14 | 18-26 mm (ओव्यूलेशन के लिए बेस्ट) |
ध्यान रखें कि इस टेबल से आप हर दिन के हिसाब से एग्ग की ग्रोथ को देख पाएंगे, जो हर महिला के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
एग का साइज: कुछ जरूरी आंकड़े और जानकारी
ये सवाल बहुत सी महिलाओं के मन में होता है। नीचे कुछ जरूरी पॉइंट्स दिए जा रहे हैं, जो आपके डाउट क्लियर करेंगे –
आईडियल फॉलिकल साइज फॉर कन्सेप्शन (प्राकृतिक गर्भधारण):
आमतौर पर, जब फॉलिकल 18 से 24 मिमी के बीच होता है, तब वह अंडा छोड़ता है जो प्रेग्नेंसी के लिए सबसे सही माना जाता है।
IVF के लिए फॉलिकल साइज:
IVF में, जब फॉलिकल्स 18–20 मिमी के हो जाते हैं, तभी एग रिट्रीवल (अंडा निकालना) किया जाता है। इससे फर्टिलाइजेशन की संभावना सबसे ज्यादा होती है।
IUI के लिए फॉलिकल साइज:
IUI के लिए भी 18 से 22 मिमी का साइज बेस्ट माना जाता है। इस साइज पर एग पूरी तरह से मैच्योर होता है।
PCOS में फॉलिकल साइज:
PCOS की स्थिति में अक्सर कई छोटे-छोटे फॉलिकल्स बनते हैं लेकिन वो परिपक्व नहीं हो पाते। ऐसे में लक्ष्य होता है कि फॉलिकल को 18-22 मिमी तक लाया जाए।
Letrozole से फॉलिकल ग्रोथ:
अगर आप Letrozole दवा ले रही हैं, तो IUI के लिए 19.1 से 21.0 मिमी का लीड फॉलिकल साइज सबसे ज्यादा असरदार माना गया है।
अंडे का आकार | फर्टिलिटी की संभावना |
<18 mm | इस दौरान अंडे फर्टिलाइज नहीं हो पाएंगे। |
18–24 mm | प्राकृतिक रुप से गर्भधारण और आयूआई के लिए अच्छा |
18–20 mm | आईवीएफ के लिए अच्छा आकार है। |
>24 mm | अंडे का बढ़ा हुआ आकार है, जिससे फर्टिलिटी साइकिल प्रभावित होती है । |
राइट और लेफ्ट ओवरी का साइज:
दोनों ओवरी में फॉलिकल का आदर्श साइज एक जैसा ही होता है – 18 से 22 मिमी के बीच।
फॉलिकल ग्रोथ को प्रभावित करने वाले कारण
फॉलिकल्स का साइज और उनका विकास सिर्फ एक बात पर निर्भर नहीं करता। इसमें कई फिजिकल, हार्मोनल और लाइफस्टाइल फैक्टर्स शामिल होते हैं। आइए जानते हैं इन्हें डिटेल में:
उम्र (Age)
- महिलाओं की उम्र बढ़ने के साथ उनके फॉलिकल्स की क्वालिटी और मात्रा दोनों घटने लगती हैं।
- खासकर 35 साल के बाद, अंडों की गुणवत्ता में गिरावट आना सामान्य है।
हार्मोनल संतुलन (Hormonal Balance)
- PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) में हार्मोन्स का असंतुलन होता है, जिससे फॉलिकल्स सही से विकसित नहीं हो पाते।
- हाई FSH (Follicle Stimulating Hormone) स्तर ये संकेत देता है कि ओवरी का रिजर्व कम हो रहा है।
पोषण की कमी (Nutritional Deficiency)
- अगर डाइट में ज़रूरी न्यूट्रिएंट्स जैसे फोलिक एसिड, आयरन, विटामिन D और B12 की कमी है, तो एग का विकास धीमा हो सकता है।
- हेल्दी फूड्स जैसे – हरी सब्ज़ियां, मेवे, अंडे, मछली और फल लेना ज़रूरी है।
तनाव और नींद की कमी (Stress & Sleep Deprivation)
- लगातार स्ट्रेस से कोर्टिसोल लेवल बढ़ता है, जिससे रिप्रोडक्टिव हार्मोन्स पर असर पड़ता है।
- नींद पूरी न होने से शरीर की रिपेयरिंग प्रक्रिया प्रभावित होती है, और फॉलिकल्स का विकास धीमा हो सकता है।
वजन और बॉडी मास इंडेक्स (BMI)
- बहुत ज्यादा या बहुत कम वजन – दोनों ही ओवुलेशन और एग ग्रोथ में रुकावट डाल सकते हैं।
- BMI का आदर्श रेंज (18.5–24.9) फर्टिलिटी के लिए अच्छा माना जाता है।
दवाइयों का असर (Medications & Treatments)
- कैंसर की कीमोथेरेपी या लंबे समय तक NSAIDs (जैसे पेनकिलर्स) लेने से फॉलिकल्स का नेगेटिव असर हो सकता है।
- वहीं Letrozole और Gonadotropins जैसी दवाएं सही डोज़ में देने से फॉलिकल ग्रोथ में बेहतरी आती है।
एनवायरमेंटल टॉक्सिन्स (Environmental Factors)
- प्लास्टिक से निकलने वाला BPA, कीटनाशक और दूसरे कैमिकल्स आपके हार्मोनल सिस्टम को डिस्टर्ब कर सकते हैं।
- कोशिश करें कि ऑर्गेनिक फूड लें और हार्मफुल केमिकल्स के कॉन्टैक्ट से बचें।
फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में फॉलिकल की निगरानी कैसे होती है?
फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में फॉलिकल की निगरानी के लिए निम्न निर्देशों का पालन किया जाता है –
- आपकी साइकल के 8वें दिन से फॉलिकल्स की ग्रोथ ट्रैक की जाती है।
- जैसे ही 18–22 मिमी का साइज मिल जाता है, आपको hCG का ट्रिगर शॉट दिया जाता है।
- इसके बाद IVF में एग रिट्रीवल या IUI में इनसेमिनेशन प्लान किया जाता है।
निष्कर्ष
अगर आप प्रेग्नेंट होना चाहती हैं, तो सिर्फ ओव्यूलेशन नहीं बल्कि प्रेगनेंसी के लिए एग का साइज भी बहुत मायने रखता है। सही खानपान, नियमित जीवनशैली और ज़रूरत हो तो डॉक्टर की मदद से आप अपने फॉलिकल्स को हेल्दी और मजबूत बना सकती हैं। याद रखें – हेल्दी एग, हेल्दी बेबी की पहली सीढ़ी है।