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प्रेगनेंसी में कब संबंध बनाना बंद करना चाहिए

प्रेगनेंसी में कब संबंध बनाना बंद करना चाहिए

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Dr. Sonal Chouksey

MBBS, DGO

17+ Years of experience

Table of Contents

प्रेगनेंसी में संबंध बनाना सुरक्षित है या नहीं?

प्रेगनेंसी में कब संबंध बनाना बंद करना चाहिए, यह सवाल अक्सर महिलाओं के मन में आता है। तो हम आपको बता दें कि प्रेगनेंसी के दौरान संबंध बनाना आमतौर पर सुरक्षित होता है, लेकिन कुछ स्थितियों में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।

प्रेग्नेंसी के दौरान कितने महीनों तक सेक्स करना सही रहता है?

सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले सवालों में से एक यह है: प्रेग्नेंसी के कितने महीनों तक सेक्स करना ठीक रहता है?

आम नियम; आमतौर पर, आप प्रेग्नेंसी के पूरे 9 महीनों तक सेक्स कर सकती हैं, जब तक कि आपके डॉक्टर आपको मना न करें।

तिमाही के हिसाब से:

पहली तिमाही (0–3 महीने)

  • हाँ, आप प्रेग्नेंसी के पहले महीने में सेक्स कर सकती हैं।
  • यह आमतौर पर सुरक्षित होता है, बशर्ते पहले कभी मिसकैरेज या कोई और दिक्कत न हुई हो।

लेकिन, कई महिलाओं को ये दिक्कतें हो सकती हैं:

  • थकान
  • जी मिचलाना
  • मूड में बदलाव

इनकी वजह से सेक्स करने की इच्छा कम हो सकती है।

दूसरी तिमाही (4–6 महीने)

  • इसे अक्सर एक-दूसरे के करीब आने का सबसे अच्छा समय माना जाता है।
  • एनर्जी का लेवल बढ़ जाता है और जी मिचलाना कम हो जाता है।
  • शरीर में खून का बहाव बढ़ने से सेक्स का मज़ा और भी बढ़ सकता है।

तीसरी तिमाही (7–9 महीने)

  • ज़्यादातर मामलों में सेक्स करना अब भी सुरक्षित होता है।
  • लेकिन, शरीर में होने वाली दिक्कतों और पेट के बढ़ने की वजह से आपको सेक्स करने की पोज़िशन में बदलाव करने पड़ सकते हैं।

नौवें महीने में, कभी-कभी सेक्स करने से लेबर पेन (प्रसव पीड़ा) शुरू होने में मदद मिल सकती है, लेकिन ऐसा तभी होता है जब शरीर इसके लिए तैयार हो।

प्रेग्नेंसी के किस महीने तक सेक्सुअल रिलेशन बनाए रखे जा सकते हैं?

सामान्य प्रेग्नेंसी में, सेक्सुअल रिलेशन (Sexual relations) बिल्कुल आखिर तक (9वें महीने तक भी) बनाए रखे जा सकते हैं।

हालांकि, आखिरी हफ्तों में आपके लिए आराम एक बड़ा फैक्टर बन जाता है जिसके कारण कुछ डॉक्टर सेक्स से बचने की सलाह दे सकते हैं। खासकर निम्न कुछ स्थितियों में:

  • जल्दी लेबर के संकेत दिखें
  • सर्विक्स खुलने लगा हो
  • मेडिकल कॉम्प्लीकेशंस हों

तो, इसका जवाब किसी तय महीने की लिमिट के बजाय हर व्यक्ति की हेल्थ कंडीशन पर ज़्यादा निर्भर करता है।

प्रेगनेंसी में कब यौन संबंध बनाने से दूर रहना चाहिए?

कई बार यौन संबंध बनाने पर प्रेगनेंसी में पेट के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत होती है। ऐसे में यौन संबंध बनाने से बचना चाहिए और डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए। आपको निम्न स्थितियों में प्रेगनेंसी में पति से कब दूर रहना चाहिए:

 डॉक्टर ने मना किया है

कुछ मामलों में जैसे कि प्लेसेंटा प्रीविया, बच्चेदानी में इन्फेक्शन या बार-बार गर्भपात होना आदि का इतिहास हो तो डॉक्टर संबंध बनाने से मना कर सकते हैं।

एब्नॉर्मल लक्षण दिखें

अगर ब्लीडिंग, तेज दर्द या पानी निकलने जैसी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ऐसी स्थिति में संबंध बनाने से बचने का सुझाव दिया जाता है।

एनर्जी और आराम का ध्यान रखें

अगर आपको थकान या असहज महसूस हो रहा है तो जबरदस्ती यौन संबंध बनाने से बचें। प्रेगनेंसी में कमर में दर्द होना भी एक सामान्य लक्षण है। ऐसे में आराम करने की सलाह दी जाती है।

जरूरी सलाह

जहाँ एक तरफ गर्भवती महिला को कब तक संबंध बनाना चाहिए की जानकारी होनी चाहिए, वहीं दूसरी तरह उसे इस बात की खबर भी होनी चाहिए कि प्रेगनेंसी में पति से कब दूर रहना चाहिए। साथ ही, प्रेगनेंसी में कैसे सोना चाहिए, इस बारे में भी पता होना आवश्यक है।

कमजोरी होने पर प्रेगनेंसी डाइट का खास ख्याल रखें। साथ ही, किसी भी परेशानी या संदेह में डॉक्टर से बात करें। अपने हेल्थ और शिशु की सेहत को प्राथमिकता दें। दोनों पार्टनर की सहमति और आराम जरूरी है।

अगर आपकी प्रेगनेंसी सामान्य है और डॉक्टर ने कोई पाबंदी नहीं लगाई है, तो संबंध बनाना सुरक्षित हो सकता है। लेकिन हर महिला की स्थिति अलग होती है, इसलिए डॉक्टर की सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है।

गर्भावस्था में कब संबंध बनाने से बचना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान माँ और बच्चे की सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। इसलिए महिला को अपने डॉक्टर से इस बारे में राय लेनी चाहिए कि उसे प्रेगनेंसी में पति से कब दूर रहना चाहिए।

कुछ स्थितियों में पत्नी को पति से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। इससे प्रेगनेंसी और गर्भ में पल रहे शिशु की सुरक्षित रखने में मदद मिलती हैं।

आइए, उन खास स्थितियों को विस्तार से समझते हैं जब एक गर्भवती महिला को अपने पति से दूरी बनाकर रखनी चाहिए यानी प्रेगनेंसी के दौरान यौन संबंध बनाने से परहेज करना चाहिए:

प्रेगनेंसी में जटिलताएं

कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इन स्थितियों में शारीरिक संबंध या अधिक नजदीक से बचना चाहिए:

  • ब्लीडिंग या स्पॉटिंग: अगर प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग हो रही है तो यह किसी जटिलता का संकेत हो सकता है। इस दौरान, यौन संबंध बनाने से बचना चाहिए।
  • प्लेसेंटा प्रिविया: यह एक ऐसी स्थिति जब प्लेसेंटा बच्चेदानी के निचले हिस्से में आ जाता है। इसके कारण डिलीवरी के समय दिक्कत हो सकती है।
  • प्री-टर्म लेबर (डिलीवरी जल्दी होने का खतरा): अगर डॉक्टर ने संकेत दिया है कि डिलीवरी समय से पहले हो सकती है, तो पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।

अगर आप पहली बार माँ बनने वाली हैं तो अपनी प्रेगनेंसी को अच्छी तरह समझने की कोशिश करें। इस मामले में कुछ किताबें जैसे कि गर्भ संस्कार पुस्तक आपकी मदद कर सकती है। यह किताब आपको प्रेगनेंसी में नॉर्मल डिलीवरी के कुछ ख़ास टिप्स भी देती है।

इंफेक्शन या बीमारी का खतरा

प्रेगनेंसी में पति से कब दूर रहना चाहिए, क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, जिससे शरीर में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। अगर पति को कोई बीमारी है तो इस स्थिति में कुछ समय के लिए दूरी बनाना या सेक्स से परहेज करना सुरक्षित है:

  • फ्लू, वायरल फीवर या अन्य इंफेक्शन: अगर पति को सर्दी, खांसी या बुखार है तो गर्भवती महिला तक इंफेक्शन फैल सकता है। ऐसी स्थिति में दूरी बनाना बेहतर है।
  • स्किन इंफेक्शन: त्वचा पर फंगल इंफेक्शन, खुजली या किसी अन्य प्रकार की एलर्जी हो तो पति से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
  • सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (STD): अगर पति को कोई सेक्सुअली ट्रांसमिटेड बीमारी है तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।

प्रेगनेंसी के पहले और आखिरी तीन महीने में सावधानी

आपको इस बारे में पता होना चाहिए कि प्रेगनेंसी में पति से कब दूर रहना चाहिए, क्योंकि प्रेगनेंसी के पहले और आखिरी तीन महीने सबसे अधिक नाजुक होते हैं। इसलिए इस दौरान एक्स्ट्रा ध्यान देना जरूरी है:

पहली तिमाही (पहले 3 महीने)

इस समय एम्ब्रियो पूरी तरह विकसित नहीं होता है। इसलिए बच्चेदानी पर कोई भी एक्स्ट्रा प्रेशर या झटका नुकसान पहुंचा सकता है।

कई महिलाओं को इस समय कमजोरी, उल्टी और चक्कर आने जैसी समस्याएं होती हैं। इसलिए इस दौरान आराम की जरूरत होती है।

आखिरी तिमाही (आखिरी 3 महीने)

बच्चेदानी का आकार बड़ा हो जाता है और किसी भी प्रकार का दबाव महिला को असहज कर सकता है।

कई बार डॉक्टर नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ाने के लिए कुछ गतिविधियों से बचने की सलाह देते हैं।

क्या करें?

हर महिला की प्रेगनेंसी अलग होती है, इसलिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। इस समय पति को गर्भवती महिला की भावनात्मक और शारीरिक रूप से सहायता करनी चाहिए। प्यार और समझदारी से इस समय को संभालें ताकि माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें।

अगर आप खुद में प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण को देखती हैं तो चिंता की कोई बात नहीं है, लेकिन एब्नॉर्मल लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में संबंध बनाना कब बंद कर देना चाहिए ?

प्रेगनेंसी में संबंध बनाना सामान्य रूप से सुरक्षित होता है, लेकिन कुछ स्थितियों में सेक्स से परहेज करने का सुझाव दे सकते हैं।

संबंध कब बंद करना चाहिए?

  • अगर डॉक्टर ने मना किया है: अगर आपकी प्रेगनेंसी हाई-रिस्क है तो डॉक्टर यौन संबंध बनाने से परहेज करने की सलाह दे सकते हैं।
  • तीसरी तिमाही (7-9 महीने): आखिरी महीनों में पेट का आकार बढ़ जाता है, जिससे असहजता हो सकती है। कुछ मामलों में, डॉक्टर संबंध बनाने से मना कर सकते हैं।
  • अगर ब्लीडिंग या दर्द हो: किसी भी तरह की ऐब्नॉर्मल ब्लीडिंग, पेट में तेज दर्द या ऐंठन हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • पानी लीक हो रहा हो: अगर एमनियोटिक फ्लूइड (गर्भजल) लीक हो रहा हो तो संबंध बनाना तुरंत बंद कर देना चाहिए और डॉक्टर से मिलना चाहिए।
  • समय से पहले डिलीवरी का खतरा: बार-बार गर्भपात या प्रीमैच्योर डिलीवरी का इतिहास हो तो सावधानी जरूरी है।

आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हर महिला प्रेगनेंसी और स्थिति अलग-अलग होती है, इसलिए आपको हर मामले में अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने का बच्चे पर क्या प्रभाव पड़ता है?

अगर प्रेगनेंसी सामान्य है और डॉक्टर ने संबंध बनाने से मना नहीं किया है तो प्रेगनेंसी के दौरान संबंध बनाने से आमतौर पर बच्चे पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है। गर्भ में मौजूद एमनियोटिक फ्लूइड और गर्भाशय की मजबूत दीवारें शिशु को सुरक्षित रखती हैं। इसलिए सेक्स के दौरान उसे किसी भी तरह की चोट नहीं पहुंचती है। साथ ही, अगर माँ खुश और तनाव मुक्त रहती है तो इसका शिशु के विकास पर पॉजिटिव प्रभाव पड़ सकता है।

हालांकि, कुछ स्थितियों में सावधानी बरतनी जरूरी है। अगर प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग, पेट में तेज दर्द या एमनियोटिक फ्लूइड लीक होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और संबंध बनाने से बचें। इसके अलावा, अगर डॉक्टर ने प्लेसेंटा प्रीविया, प्रीमैच्योर डिलीवरी का खतरा या किसी अन्य जटिलता के कारण परहेज करने की सलाह दी हो तो उनके निर्देश का पालन करें। अगर कोई जटिलता नहीं है तो संबंध बनाना आमतौर पर बच्चे के लिए सुरक्षित होता है।

प्रेग्नेंसी के दौरान सेक्स करने के फ़ायदे क्या हैं?

प्रेग्नेंसी के दौरान सेक्स को अक्सर एक जोखिम भरा काम समझा जाता है, लेकिन एक हेल्दी प्रेग्नेंसी में, यह असल में आपकी इमोशनल और फ़िज़िकल, दोनों तरह की सेहत को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। आइए, हर फ़ायदे को ज़्यादा प्रैक्टिकल और आसानी से समझ में आने वाले तरीके से समझते हैं:

  1. इमोशनल बॉन्डिंग

प्रेग्नेंसी के दौरान कई तरह के इमोशनल बदलाव आ सकते हैं; जैसे मूड में उतार-चढ़ाव, तनाव, और यहाँ तक कि पार्टनर के बीच दूरी का एहसास भी। फ़िज़िकल नज़दीकी इस दूरी को कम करने में मदद करती है।

  • जब आप सेक्स करते हैं, तो आपके शरीर से ऑक्सीटोसिन (जिसे “लव हार्मोन” भी कहा जाता है) जैसे हार्मोन निकलते हैं, जो अपने-आप ही आपके इमोशनल जुड़ाव को मज़बूत बनाते हैं।
  • यह कपल्स को उस समय में ज़्यादा सुरक्षित, प्यार भरा और सहारा मिला हुआ महसूस करने में मदद करता है, जब दोनों पार्टनर ज़िंदगी के बड़े बदलावों के साथ तालमेल बिठा रहे होते हैं।
  • नज़दीकी बनाए रखने से असुरक्षा या दूरी का वह एहसास भी कम हो सकता है, जो कभी-कभी प्रेग्नेंसी के दौरान पैदा हो जाता है।
  1. तनाव से राहत

प्रेग्नेंसी के दौरान अक्सर चिंता होती है अपनी सेहत, बच्चे और भविष्य को लेकर। सेक्स एक नैचुरल स्ट्रेस रिलीवर (तनाव कम करने वाला) का काम कर सकता है।

  • करीबी पलों के दौरान, शरीर एंडोर्फिन और ऑक्सीटोसिन रिलीज़ करता है, जिससे मूड बेहतर होता है।
  • ये हार्मोन तनाव के लेवल को कम करने और शांति व आराम का एहसास दिलाने में मदद करते हैं।
  • यह चिड़चिड़ापन और इमोशनल टेंशन को भी कम कर सकता है।
  1. बेहतर नींद

कई प्रेग्नेंट महिलाओं को नींद से जुड़ी दिक्कतें होती हैं, खासकर जैसे-जैसे प्रेग्नेंसी आगे बढ़ती है।

  • ऑर्गेज़्म के बाद, हार्मोनल बदलावों की वजह से शरीर आराम की स्थिति में चला जाता है।
  • मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं, मन शांत हो जाता है, और इससे सोना आसान हो जाता है।
  • बेहतर नींद प्रेग्नेंसी के दौरान पूरी सेहत और एनर्जी लेवल को भी बनाए रखने में मदद करती है।
  1. बेहतर ब्लड सर्कुलेशन

माँ और बच्चे, दोनों के लिए प्रेग्नेंसी के दौरान अच्छा ब्लड सर्कुलेशन बहुत ज़रूरी है ।

  • सेक्सुअल एक्टिविटी से दिल की धड़कन तेज़ होती है और पूरे शरीर में ब्लड का बहाव बढ़ता है।
  • बेहतर सर्कुलेशन का मतलब है कि बच्चे तक ज़्यादा ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुँचते हैं।
  • यह सूजन कम करने और शरीर के पूरे कामकाज को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकता है।
  1. पेल्विक मांसपेशियों का इस्तेमाल

बच्चे के जन्म के दौरान आपकी पेल्विक मांसपेशियां एक अहम भूमिका निभाती हैं।

  • सेक्स और ऑर्गेज़्म के दौरान, ये मांसपेशियां अपने आप सिकुड़ती और फैलती हैं।
  • यह एक हल्की-फुल्की कसरत की तरह काम करता है, जिससे ये मांसपेशियां मज़बूत और लचीली बनी रहती हैं।
  • मज़बूत पेल्विक मांसपेशियां:
    • गर्भाशय को बेहतर सहारा दे सकती हैं
    • लेबर (प्रसव) के दौरान मदद कर सकती हैं
    • बच्चे के जन्म के बाद (पोस्टपार्टम) तेज़ी से ठीक होने में मदद कर सकती हैं
  1. लेबर की नैचुरल तैयारी (प्रेग्नेंसी के आखिरी दौर में)

यह फ़ायदा खासकर प्रेग्नेंसी के आखिरी दौर में ज़्यादा काम आता है।

  • सीमेन (वीर्य) में प्रोस्टाग्लैंडीन नाम के पदार्थ होते हैं, जो गर्भाशय ग्रीवा (cervix) को नरम बनाने और उसे लेबर के लिए तैयार करने में मदद कर सकते हैं।
  • ऑर्गेज़्म की वजह से गर्भाशय में हल्के संकुचन (contractions) हो सकते हैं। ये आमतौर पर नुकसानदायक नहीं होते और कुछ समय के लिए ही होते हैं।
  • कुछ मामलों में, ये असर शरीर को लेबर के लिए नैचुरली तैयार करने में मदद कर सकते हैं (लेकिन तभी, जब शरीर पहले से ही तैयार हो)।

क्या IVF प्रेग्नेंसी के दौरान सेक्स करना मुमकिन है?

हाँ, IVF प्रेग्नेंसी में सेक्स करना मुमकिन है, लेकिन इसमें नैचुरल प्रेग्नेंसी के मुकाबले थोड़ी ज़्यादा सावधानी और मेडिकल सलाह की ज़रूरत होती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि IVF प्रेग्नेंसी के शुरुआती चरण ज़्यादा नाज़ुक माने जाते हैं, खासकर एम्ब्रियो ट्रांसफर के ठीक बाद का समय।

शुरुआती चरण में (आमतौर पर एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद पहले 2–3 हफ़्तों तक), डॉक्टर अक्सर सेक्स से बचने की सलाह देते हैं। यह सावधानी एम्ब्रियो के गर्भाशय में सफलतापूर्वक इम्प्लांट होने में मदद करने के लिए बरती जाती है। इस दौरान, शरीर में हार्मोनल बदलाव हो रहे होते हैं, और गर्भाशय को एक स्थिर माहौल की ज़रूरत होती है। सेक्स या ऑर्गेज़्म से गर्भाशय में हल्के संकुचन हो सकते हैं, इसीलिए कई फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट थोड़े से भी जोखिम को कम करने के लिए कुछ समय तक सेक्स से दूर रहने की सलाह देते हैं।

एक बार जब प्रेग्नेंसी कन्फ़र्म हो जाती है और ठीक से आगे बढ़ रही होती है, तो सेक्स करने की इजाज़त फिर से दी जा सकती है, लेकिन यह हर व्यक्ति की सेहत की स्थिति पर निर्भर करता है। डॉक्टर आमतौर पर हरी झंडी देने से पहले कुछ ज़रूरी बातों का जायज़ा लेते हैं:

  • हार्मोनल स्थिरता: क्या प्रेग्नेंसी के हार्मोन सामान्य रूप से बढ़ रहे हैं?
  • जोखिम के कारक: जैसे कि ब्लीडिंग, ऐंठन, या पहले कभी गर्भपात हुआ हो।
  • IVF प्रक्रिया का प्रकार: कुछ मामलों में (जैसे कि एक से ज़्यादा एम्ब्रियो ट्रांसफर या कोई जटिलता होने पर) ज़्यादा सावधानी बरतने की ज़रूरत हो सकती है।
  • प्रेग्नेंसी की पूरी सेहत: जिसमें अल्ट्रासाउंड के नतीजे और गर्भाशय की स्थिति शामिल है।

अगर सब कुछ स्थिर है, तो कई जोड़े धीरे-धीरे, आराम से और सहजता से फिर से सेक्स करना शुरू कर सकते हैं। हालाँकि, हमेशा अपने डॉक्टर की खास सलाह मानना ही सबसे अच्छा होता है, क्योंकि IVF प्रेग्नेंसी हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकती है।

गर्भावस्था के दौरान किसे यौन संबंध बनाने से बचना चाहिए?

हालांकि ज़्यादातर गर्भधारण में यौन संबंध बनाना सुरक्षित होता है, लेकिन निम्न कुछ स्थितियों में इससे परहेज़ करना ज़रूरी होता है:

  • बार-बार गर्भपात का इतिहास रहा हो; खासकर गर्भावस्था के शुरुआती दौर में
  • प्लेसेंटा प्रीविया हो; जब प्लेसेंटा गर्भाशय ग्रीवा (cervix) को ढक लेता है
  • योनि से बिना किसी वजह के खून बह रहा हो; यह किसी जटिलता का संकेत हो सकता है
  • समय से पहले प्रसव (Preterm Labor) का खतरा हो; अगर आपको समय से पहले संकुचन (contractions) के लक्षण दिख रहे हों
  • गर्भाशय ग्रीवा में कमज़ोरी हो (Incompetent Cervix); समय से पहले खुलने का खतरा हो
  • एम्नियोटिक द्रव (Amniotic Fluid) का रिसाव हो रहा हो; इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है
  • एक से ज़्यादा गर्भधारण हो (जुड़वां/तिड़वां बच्चे); खासकर अगर कोई जटिलता मौजूद हो

गर्भावस्था में सुरक्षित संबंध के लिए जरूरी सावधानियां

  • अगर आपकी प्रेगनेंसी में कोई जटिलता (जैसे हाई-रिस्क प्रेगनेंसी) है, तो पहले डॉक्टर से परामर्श लें।
  • पेट पर दबाव न पड़े, इसके लिए ऐसी पोजीशन चुनें जो आरामदायक और सुरक्षित हो।
  • किसी भी तरह की परेशानी, दर्द या असुविधा महसूस होने पर तुरंत रोकें और डॉक्टर से सलाह लें।
  • हल्के और सहज तरीकों को अपनाएं ताकि किसी भी तरह का अनावश्यक दबाव न पड़े।
  • संक्रमण से बचने के लिए हाइजीन का पूरा ध्यान रखें।
  • अगर ब्लीडिंग, दर्द या पानी लीक हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ये किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं।

अगर आपकी प्रेगनेंसी सामान्य है, तो सही सावधानियों के साथ संबंध बनाना सुरक्षित हो सकता है!

निष्कर्ष

प्रेग्नेंसी के दौरान संबंध बनाना एक सामान्य और सुरक्षित प्रक्रिया हो सकती है, बशर्ते आपकी प्रेग्नेंसी हेल्दी हो और डॉक्टर ने किसी तरह की पाबंदी न लगाई हो। अक्सर यह देखा जाता है कि लोग डर या गलतफहमियों की वजह से इस विषय को लेकर असहज रहते हैं, जबकि सही जानकारी होने पर यह समझ आता है कि शारीरिक संबंध माँ और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक नहीं होते।

हालांकि, यह भी उतना ही जरूरी है कि हर महिला अपनी शारीरिक स्थिति, आराम और मेडिकल कंडीशन को प्राथमिकता दे। अगर किसी भी तरह के लक्षण जैसे ब्लीडिंग, दर्द, पानी लीक होना या प्रीमैच्योर लेबर का खतरा हो, तो तुरंत सेक्स से परहेज करना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा, IVF प्रेग्नेंसी या हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी होता है।

अंत में, प्रेग्नेंसी के दौरान संबंध बनाने का फैसला पूरी तरह से महिला की सहमति, आराम और डॉक्टर की सलाह पर आधारित होना चाहिए। सही जानकारी, आपसी समझ और सावधानी के साथ, यह समय आपके रिश्ते को और मजबूत बनाने का भी हो सकता है। हमेशा अपनी और अपने शिशु की सेहत को सबसे ऊपर रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगर प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में स्पर्म चला जाए तो क्या होता है?

जब प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में स्पर्म जाता है, तो वह बच्चे तक नहीं पहुँचता और न ही उसे कोई नुकसान पहुँचाता है। गर्भ में पल रहा बच्चा एम्नियोटिक थैली (amniotic sac) से सुरक्षित रहता है, जो एक गद्दे की तरह काम करती है, और गर्भाशय ग्रीवा (cervix) से भी सुरक्षित रहता है, जो कसकर बंद रहती है और एक म्यूकस प्लग से सील रहती है।

यह प्राकृतिक रुकावट स्पर्म और बाहरी तत्वों को बच्चे तक पहुँचने से रोकती है। असल में, प्रेग्नेंसी के बाद के चरणों में, सीमेन में प्रोस्टाग्लैंडीन (prostaglandins) नामक पदार्थ होते हैं जो गर्भाशय ग्रीवा को थोड़ा नरम करने में मदद कर सकते हैं; यह शरीर के प्रसव (labor) के लिए तैयार होने का एक सामान्य हिस्सा है। इसलिए, एक स्वस्थ प्रेग्नेंसी में, शरीर में स्पर्म का जाना आम तौर पर सुरक्षित होता है और चिंता का कोई कारण नहीं होता।

क्या प्रेग्नेंसी के दौरान सेक्स करना सुरक्षित है?

हाँ, ज़्यादातर मामलों में प्रेग्नेंसी के दौरान सेक्स करना सुरक्षित माना जाता है, जब तक कि कोई मेडिकल दिक्कत न हो। बच्चा गर्भ के अंदर अच्छी तरह सुरक्षित रहता है, और सामान्य सेक्स से उसे कोई नुकसान नहीं पहुँचता। कई जोड़े प्रेग्नेंसी के दौरान भी अपनी सेक्स लाइफ को स्वस्थ बनाए रखते हैं। हालाँकि, सुरक्षा व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है।

अगर डॉक्टर ने प्लेसेंटा प्रीविया (placenta previa), ब्लीडिंग, या समय से पहले प्रसव के जोखिम जैसी समस्याओं के कारण कुछ पाबंदियाँ लगाने की सलाह दी है, तो सेक्स से बचना चाहिए। इसके अलावा, उचित देखभाल और आराम के साथ, प्रेग्नेंसी के दौरान सेक्स आम तौर पर सुरक्षित और सामान्य होता है।

क्या प्रेग्नेंसी के शुरुआती चरणों में सेक्स करने से गर्भपात (miscarriage) हो सकता है?

नहीं, प्रेग्नेंसी के शुरुआती चरणों में सेक्स करने से गर्भपात नहीं होता। ज़्यादातर गर्भपात आनुवंशिक असामान्यताओं या पहले से मौजूद मेडिकल स्थितियों के कारण होते हैं, न कि सेक्स करने के कारण। हालाँकि जोड़ों के लिए इस बारे में चिंता करना आम बात है, लेकिन ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जो एक स्वस्थ प्रेग्नेंसी में सामान्य सेक्स को गर्भपात से जोड़ता हो।

फिर भी, अगर किसी महिला का बार-बार गर्भपात होने का इतिहास रहा है या उसे ब्लीडिंग या पेट में तेज़ ऐंठन जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर सावधानी के तौर पर सेक्स से बचने की सलाह दे सकते हैं। आम तौर पर, एक सामान्य प्रेग्नेंसी के लिए, शुरुआती चरणों में सेक्स करना सुरक्षित होता है।

क्या प्रेग्नेंसी के नौवें महीने में सेक्स करना सुरक्षित है?

हाँ, प्रेग्नेंसी के नौवें महीने में सेक्स करना आम तौर पर सुरक्षित होता है, बशर्ते कोई दिक्कत न हो और आपके डॉक्टर ने इसके खिलाफ सलाह न दी हो। हालाँकि, इस चरण में, शारीरिक आराम एक बड़ा कारक बन जाता है, और पेट के आकार और सामान्य बेचैनी के कारण कई जोड़ों को यह ज़्यादा मुश्किल लग सकता है।

कुछ मामलों में, सेक्स शरीर को लेबर (प्रसव) के लिए तैयार करने में भी मदद कर सकता है, क्योंकि सीमेन (वीर्य) गर्भाशय ग्रीवा (cervix) को नरम करने में मदद कर सकता है और ऑर्गेज्म (चरमसुख) से गर्भाशय में हल्के संकुचन हो सकते हैं। फिर भी, अगर लेबर जल्दी शुरू होने के संकेत हों, तरल पदार्थ लीक हो रहा हो, या कोई मेडिकल चिंता हो, तो सेक्स से बचना और डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है।

प्रेग्नेंसी के दौरान सेक्स कैसे करना चाहिए?

प्रेग्नेंसी के दौरान सेक्स करते समय आराम, सुरक्षा और पार्टनर के बीच बातचीत पर ध्यान देना चाहिए। जैसे-जैसे शरीर बदलता है, कुछ पोज़िशन असहज हो सकती हैं, इसलिए ऐसी पोज़िशन चुनना ज़रूरी है जिनसे पेट पर दबाव न पड़े, खासकर पहली तिमाही के बाद। किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए धीरे और कोमल हरकतें करने की सलाह दी जाती है।

खुलकर बातचीत करना बहुत ज़रूरी है अगर कुछ दर्दनाक या असहज लगे, तो तुरंत रुक जाना चाहिए। साफ़-सफ़ाई बनाए रखना और भावनात्मक आराम सुनिश्चित करना भी एक बड़ी भूमिका निभाता है। आखिरकार, अपने शरीर की बात सुनना और उसकी ज़रूरतों के हिसाब से ढलना ही प्रेग्नेंसी के दौरान एक सुरक्षित और संतोषजनक अंतरंग जीवन बनाए रखने का सबसे अच्छा तरीका है।

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