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टेस्टोस्टेरोन क्या है – टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के घरेलू उपाय

टेस्टोस्टेरोन क्या है – टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के घरेलू उपाय

Dr. Khushboo Goel
Dr. Khushboo Goel

MBBS, MS Obstetrics & Gynaecology (Gold Medallist), DNB (Obstetrics & Gynaecology), MRCOG 2, FNB in Reproductive Medicine

6+ Years of experience

Table of Contents


  1. टेस्टोस्टेरोन क्या है? – Testosterone Meaning in Hindi
  2. टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की कमी के लक्षण – Symptoms of low testosterone in Hindi
  3. टेस्टोस्टेरोन की कमी के जोखिम कारक
  4. टेस्टोस्टेरोन का क्या काम है?
  5. टेस्टोस्टेरोन क्यों ज़रूरी है?
  6. टेस्टोस्टेरोन टेस्ट क्यों किया जाता है?
  7. टेस्टोस्टेरोन टेस्ट के प्रकार
  8. टेस्टोस्टेरोन टेस्ट कैसे किया जाता है?
  9. टेस्टोस्टेरोन टेस्ट की तैयारी कैसे करें?
  10. टेस्टोस्टेरोन टेस्ट के नतीजे क्या बताते हैं?
  11. टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के घरेलू उपाय
  12. टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने की दवा
  13. टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के लिए आपको क्या खाना चाहिए?
  14. आपको किन चीज़ों से बचना चाहिए जो टेस्टोस्टेरोन कम करती हैं?
  15. निष्कर्ष
  16. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
    1. पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ने पर क्या होता है?
    2. कुल टेस्टोस्टेरोन का स्तर कितना होना चाहिए?
    3. मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरा टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम है?
    4. कौन सी आदतें टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम करती हैं?
    5. कौन से व्यायाम टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ाते हैं?
    6. टेस्टोस्टेरोन का स्तर बहुत ज़्यादा होने के क्या नुकसान हैं?

टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) एक ऐसा हार्मोन है जो पुरुषों में कामेक्षा और प्रजनन शक्ति के लिए ज़िम्मेदार होता है। यह हार्मोन महिलाओं के शरीर में भी पाया जाता है हालांकि महिलाओं में इसकी मात्रा न के बराबर होती है। इसके साथ ही यह हार्मोन पुरुषों में संपूर्ण विकास एवं स्वस्थ शरीर और दिमाग के संरक्षण के लिए आवश्यक है।

टेस्टोस्टेरोन हार्मोन में कमी होने पर यह शुक्राणु में कमी कारण बन सकता है। टेस्टोस्टेरोन, पुरुष विशेषताओं के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। टेस्टोस्टेरोन का स्तर उम्र के साथ कम होता जाता है। इस ब्लॉग पोस्ट में, हम टेस्टोस्टेरोन (testosterone meaning in hindi), इनकी कमी, इसका स्तर जांचने की प्रक्रिया और इसके लिए तैयारी करने से जुड़ी आवश्यक बातों पर चर्चा करेंगे|

टेस्टोस्टेरोन क्या है? – Testosterone Meaning in Hindi

टेस्टोस्टेरोन नामक पुरुष यौन हार्मोन के उत्पादन के लिए टेस्टिकल्स एक प्राथमिक अंग हैं। यौन सम्बन्ध बनाने और प्रजनन क्षमता के रखरखाव के लिए यह हार्मोन बहुत आवश्यक है। यह मर्दाना विशेषताओं जैसे भारी आवाज, शरीर के बाल और मांसपेशियों के विकास के लिए जिम्मेदार है। इसके अलावा, स्वस्थ और मज़बूत हड्डियां, शरीर में फैट और समग्र ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने के लिए टेस्टोस्टेरोन एक आवश्यक कारक है। टेस्टोस्टेरोन महिलाओं में कम मात्रा में होता है।

टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की कमी के लक्षण – Symptoms of low testosterone in Hindi

जिन पुरुषों के टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी है वे कुछ लक्षणों का अनुभव कर सकते हैं, जैसे कि:

  • थकान और कमजोरी: हर समय सुस्ती महसूस होना, जल्दी थक जाना और ऊर्जा की कमी रहना।
  • सेक्स की इच्छा में कमी: टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की कमी के लक्षण में इरेक्टाइल डिसफंक्शन भी शामिल है। साथ ही, इससे सेक्स और उत्तेजना में कमी आती है।
  • मांसपेशियों में कमजोरी: शरीर में ताकत कम होना और मांसपेशियों का सिकुड़ना।
  • वजन बढ़ना: खासकर पेट और कमर के आसपास चर्बी जमा होना, जिससे वजन बढ़ना या मोटापा होना।
  • मूड स्विंग्स और तनाव: चिड़चिड़ापन, उदासी, डिप्रेशन और चिंता की समस्या बढ़ना।
  • याददाश्त और ध्यान में कमी: चीजें जल्दी भूल जाना, दिमाग सुस्त लगना और फोकस करने में दिक्कत होना।
  • बाल झड़ना: सिर, चेहरे और शरीर के बाल तेजी से गिरना और नए बालों का ना आना।
  • हड्डियों में कमजोरी: हड्डियां कमजोर होना, दर्द रहना और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाना।

आपके टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम है या नहीं, इसका मूल्यांकन करने के लिए आपको टेस्टोस्टेरोन टेस्ट कराने की आवश्यकता है।

टेस्टोस्टेरोन की कमी के जोखिम कारक

निम्नलिखित जोखिम कारक हैं जिनके कारण पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन की कमी हो सकती है:

  • किसी दुर्घटना के परिणामस्वरूप टेस्टिकल में चोट
  • कैंसर की रोकथाम के लिए शुक्राणु हटाने के कारण
  • न्यूक्लिअर रेडिएशन या कीमोथेरेपी
  • पिट्यूटरी ग्रंथि के विकार जो हार्मोन की कमी का कारण बनते हैं
  • संक्रमण
  • इम्म्यून मीडिएटेड बीमारी (जब शरीर एंटीबॉडी बनाता है जो अपनी कोशिकाओं पर हमला करती है)
  • उम्र बढ़ना/मोटापा
  • मेटाबोलिक सिंड्रोम
  • एंटीडिप्रेसेंट और दर्द निवारक दवाओं का सेवन
  • एचआईवी या एड्स जैसी विशेष स्वास्थ्य स्थितियों से पीड़ित

टेस्टोस्टेरोन का क्या काम है?

टेस्टोस्टेरोन का काम सिर्फ़ शारीरिक बनावट तक ही सीमित नहीं है। यह शरीर की कई ज़रूरी प्रक्रियाओं पर असर डालता है:

  • मांसपेशियों का विकास और मज़बूती: टेस्टोस्टेरोन मांसपेशियों को बनाने और उन्हें बनाए रखने में मदद करता है। इसका स्तर ज़्यादा होने पर ताक़त बढ़ाना और वर्कआउट के बाद ठीक होना आसान हो जाता है।
  • हड्डियों का घनत्व: यह हड्डियों को मजबूत बनाता है और हड्डियों के टूटने का जोखिम कम करता है, खासकर बढ़ती उम्र में।
  • यौन स्वास्थ्य: टेस्टोस्टेरोन कामेच्छा (सेक्स की इच्छा), शुक्राणु उत्पादन और समग्र प्रजनन स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभाता है।
  • वसा का वितरण: यह शरीर में वसा (फैट) के जमा होने के तरीके को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे अतिरिक्त वसा जमा नहीं हो पाती।
  • मूड और ऊर्जा का स्तर: टेस्टोस्टेरोन का संतुलित स्तर बेहतर मूड, आत्मविश्वास और डिप्रेशन के कम जोखिम से जुड़ा होता है।
  • लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन: यह लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) के उत्पादन में मदद करता है, जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुँचाती हैं।

टेस्टोस्टेरोन क्यों ज़रूरी है?

शारीरिक और मानसिक, दोनों तरह की सेहत बनाए रखने के लिए टेस्टोस्टेरोन बहुत ज़रूरी है। जब इसका स्तर संतुलित होता है, तो शरीर कुशलता से काम करता है। हालाँकि, इसका स्तर कम या ज़्यादा होने पर शरीर में साफ़ तौर पर बदलाव दिख सकते हैं।

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इसका महत्व:

  • ऊर्जा और सहनशक्ति को बढ़ाता है
  • एकाग्रता और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को बेहतर बनाता है
  • शारीरिक प्रदर्शन को बढ़ाता है
  • स्वस्थ चयापचय (मेटाबॉलिज़्म) को बनाए रखता है
  • प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है

टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने पर थकान, वज़न बढ़ना, कामेच्छा में कमी और यहाँ तक कि मूड में अचानक बदलाव (मूड स्विंग्स) जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। इसीलिए, इसका स्तर स्वस्थ बनाए रखना बहुत ज़रूरी है।

टेस्टोस्टेरोन टेस्ट क्यों किया जाता है?

हाइपोगोनाडिज्म को कम टेस्टोस्टेरोन के स्तर के रूप में संदर्भित किया जाता है, टेस्टोस्टेरोन टेस्ट की मदद से इसका निदान और निगरानी की जा सकती है। टेस्ट यह निर्धारित करने में सहायता कर सकता है कि कम टेस्टोस्टेरोन के स्तर के लक्षणों को कम करने के लिए टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की आवश्यकता है या नहीं। इसके अलावा, टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की प्रभावकारिता का मूल्यांकन करने के लिए भी इस टेस्ट का उपयोग किया जाता है।

टेस्टोस्टेरोन मानव शरीर में एक महत्वपूर्ण हार्मोन है और इसके स्तर को विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों के निदान में मदद के लिए मापा जा सकता है।

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि टेस्टोस्टेरोन के स्तर में समय-समय पर उतार-चढ़ाव हो सकता है और तनाव, बीमारी और दवाओं जैसे विभिन्न कारकों से इसका स्तर प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि कई बार टेस्ट दोबारा करना पड़ता है, और डॉक्टर भी व्यक्ति की आयु, लिंग और समग्र स्वास्थ्य पर विचार करते हुए परिणामों का मूल्यांकन करते हैं।

टेस्टोस्टेरोन टेस्ट के प्रकार

टेस्टोस्टेरोन टेस्ट के मुख्य तीन प्रकार होते हैं, जिसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • टोटल टेस्टोस्टेरोन टेस्ट: इस टेस्ट से शरीर में मौजूद कुल टेस्टोस्टेरोन की मात्रा को मापा जाता है, जिसमें बाउंड और फ्री टेस्टोस्टेरोन दोनों शामिल होते हैं।
  • फ्री टेस्टोस्टेरोन टेस्ट: यह टेस्ट केवल उस टेस्टोस्टेरोन को मापता है जो शरीर में सक्रिय रूप से काम कर रहा होता है।
  • बायोअवेलेबल टेस्टोस्टेरोन टेस्ट: इस टेस्ट की मदद से शरीर द्वारा उपयोग किए जा सकने वाले टेस्टोस्टेरोन की मात्रा का विश्लेषण किया जाता है।

यह टेस्ट डॉक्टर की सलाह पर कराना चाहिए ताकि सही उपचार और जीवनशैली में सुधार किया जा सके।

टेस्टोस्टेरोन टेस्ट कैसे किया जाता है?

टेस्टोस्टेरोन के लिए टेस्ट एक सीधा रक्त टेस्ट है जो या तो आपके डॉक्टर के क्लिनिक में या प्रयोगशाला में किया जा सकता है। एक प्रशिक्षित चिकित्सा विशेषज्ञ द्वारा आपके हाथ की नस से रक्त का नमूना लिया जाएगा, और फिर नमूना टेस्ट के लिए प्रयोगशाला में ले जाया जाएगा। ज्यादातर मामलों में, टेस्ट के परिणाम वापस आने में कुछ दिन लगते हैं।

टेस्टोस्टेरोन टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

टेस्टोस्टेरोन टेस्ट पर विश्वसनीय परिणाम की गारंटी के लिए पर्याप्त रूप से तैयारी करना महत्वपूर्ण है। टेस्ट की बेहतर तैयारी के लिए आप निम्न कदम उठा सकते हैं:

  • टेस्ट से पहले, आपको 8 से 12 घंटे का उपवास करना चाहिए। उपवास यह सुनिश्चित करता है कि परिणाम आपके हाल ही के भोजन या पेय की खपत से प्रभावित न हो।
  • टेस्ट से कुछ घंटे पहले शराब और कैफीन का सेवन करने से बचें। कैफीन और शराब दोनों में टेस्ट के निष्कर्षों को कम करने की क्षमता है।
  • टेस्ट से पहले बहुत अधिक व्यायाम करने से बचें। क्योंकि व्यायाम से टेस्टोस्टेरोन के स्तर में वृद्धि हो सकती है और परिणाम गलत हो सकते हैं।
  • आप वर्तमान में जो भी दवाएं ले रहे हैं, उनके बारे में अपने डॉक्टर से बात करें। क्योंकि कुछ दवाओं से टेस्टोस्टेरोन का स्तर प्रभावित हो सकता है, इसलिए यह जरूरी है कि आप अपने डॉक्टर को उन सभी दवाओं के बारे में बताएं जो आप टेस्ट के दिनों में ले रहे हैं।

टेस्टोस्टेरोन टेस्ट के नतीजे क्या बताते हैं?

टेस्टोस्टेरोन के स्तर में पूरे दिन उतार-चढ़ाव होता है, उच्चतम स्तर सुबह में होता है और सबसे कम स्तर शाम को होता है। आमतौर पर एक पुरुष का टेस्टोस्टेरोन स्तर सामान्य रूप से 300 से 1,000 ng/dL के बीच होना चाहिए। यदि आपके टेस्टोस्टेरोन का स्तर इस सीमा से नीचे पाया जाता है, तो यह एक संकेत हो सकता है कि आपके टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम है, जिसे हाइपोगोनाडिज्म भी कहा जाता है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि टेस्टोस्टेरोन का स्तर आयु, बीमारी, तनाव और लोगों द्वारा उपयोग की जाने वाली दवाओं सहित विभिन्न प्रकार के कारकों से प्रभावित हो सकता है। आमतौर पर यदि रोगी के टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो तो अपने डॉक्टर के साथ टेस्टोस्टेरोन टेस्ट और उपचार विकल्पों पर चर्चा करना महत्वपूर्ण है। लक्षणों को कम करने और रोगी को स्वस्थ रखने के लिए, डॉक्टर टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी का सुझाव भी दे सकते हैं। टेस्टोस्टेरोन कम होने पर टेस्टोस्टेरोन हार्मोन कैसे बढ़ाये, आइए इसके बारे में जानते हैं।

टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के घरेलू उपाय

टेस्टोस्टेरोन को बढ़ाने के लिए सही खानपान, रेगुलर एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल बेहद जरूरी है। टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के घरेलू उपाय में शामिल हैं:

  • प्रोटीन युक्त भोजन खाएं: अंडे, चिकन, मछली, दालें और नट्स को डाइट में शामिल करें। ये आपकी मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को बढ़ाते हैं।
  • हेल्दी फैट्स लें: बादाम, अखरोट, जैतून का तेल, नारियल का तेल और एवोकाडो में हेल्दी फैट्स होते हैं, जो हार्मोनल संतुलन के लिए जरूरी हैं।
  • जिंक और विटामिन डी बढ़ाएं: अंडे, डेयरी प्रोडक्ट्स, मशरूम और सुबह की धूप लेना फायदेमंद होता है। ये टेस्टोस्टेरोन उत्पादन को बढ़ाने में मदद करते हैं।
  • वेट लिफ्टिंग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें: एक्सरसाइज करने से टेस्टोस्टेरोन का लेवल तेजी से बढ़ता है और मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
  • योग और मेडिटेशन: तनाव कम करने और मेन्टल पीस बनाए रखने के लिए योग और मेडिटेशन करें। इससे शरीर में हार्मोन का लिवर बेहतर होता है।
  • प्रॉपर नींद लें: टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन मुख्य रूप से रात में सोते समय होता है। इसलिए रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद जरूरी है।
  • तनाव से बचें: पसंद की संगीत सुनें और गतिविधियों में शामिल हों ताकि तनाव को कम किया जा सके। ज्यादा तनाव शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ाता है, जो टेस्टोस्टेरोन के लेवल को कम कर सकता है।
  • शराब: अल्कोहल और धूम्रपान से दूर रहें, क्योंकि अत्यधिक शराब और तंबाकू का सेवन टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन को प्रभावित करता है।

इन आदतों को अपनाकर आप अपने टेस्टोस्टेरोन को प्राकृतिक रूप से बढ़ा सकते हैं।

टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने की दवा

कुछ मामलों में टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के घरेलू उपाय के साथ-साथ दवाओं की आवश्यकता होती है। टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने की दवाओं में निम्न शामिल हैं:

  • टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी: यह थेरेपी उन पुरुषों के लिए बेस्ट है जिनका टेस्टोस्टेरोन स्तर बहुत कम होता है। यह कई रूपों में उपलब्ध है जैसे कि इंजेक्शन, गोलियां, स्किन पैच और टॉपिकल जेल।
  • टेस्टोस्टेरोन बूस्टर सप्लीमेंट्स: ये सप्लीमेंट्स प्राकृतिक तत्वों से बनते हैं जो टेस्टोस्टेरोन हार्मोन बढ़ाने में मदद करते हैं। इनमें जिंक, विटामिन डी, मैग्नीशियम, अश्वगंधा, ट्राइबुलस टेरेस्ट्रिस और डी-एस्पार्टिक एसिड शामिल होते हैं। दवाओं की तुलना में ये सप्लीमेंट्स अधिक सुरक्षित माने जाते हैं।
  • हर्बल और प्राकृतिक दवाएं: तनाव कम करके और हार्मोन बैलेंस करके टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने में मदद करता है अश्वगंधा। ट्राइबुलस टेरेस्ट्रिस सेक्सुअल हेल्थ और टेस्टोस्टेरोन को बेहतर बनाता है। मेथी से टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने और ऊर्जा स्तर सुधारने में मदद मिलती है।

टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के लिए आपको क्या खाना चाहिए?

हार्मोन के संतुलन में आपकी डाइट की अहम भूमिका होती है। अगर आप टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के लिए खाना चाहते हैं, तो नैचुरल, पोषक तत्वों से भरपूर खाने पर ध्यान दें।

  1. प्रोटीन से भरपूर खाना

प्रोटीन मांसपेशियों को बनाने और हार्मोन बनाने में मदद करता है।

  • अंडे
  • चिकन
  • मछली
  • दालें
  1. हेल्दी फैट्स

हार्मोन बनाने के लिए अच्छे फैट्स ज़रूरी होते हैं।

  • नट्स (बादाम, अखरोट)
  • बीज (अलसी के बीज, कद्दू के बीज)
  • जैतून का तेल
  1. फल

कुछ फल नैचुरली टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने में मदद करते हैं।

  • केले (ब्रोमेलैन से भरपूर)
  • अनार (खून के बहाव और हार्मोन के संतुलन में मदद करता है)
  • बेरीज़
  1. हरी सब्ज़ियां

पत्तेदार हरी सब्ज़ियों में मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में होता है, जो टेस्टोस्टेरोन को सपोर्ट करता है।

  • पालक
  • केल
  • ब्रोकोली
  1. ज़िंक से भरपूर खाना

टेस्टोस्टेरोन बनाने के लिए ज़िंक बहुत ज़रूरी है।

  • कद्दू के बीज
  • चने
  • काजू
  1. विटामिन D के स्रोत

हार्मोन के संतुलन में विटामिन D की अहम भूमिका होती है।

  • धूप में रहना
  • डेयरी प्रोडक्ट्स
  • मशरूम
  1. साबुत अनाज

ये एनर्जी देते हैं और हार्मोन के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं।

  • ओट्स
  • ब्राउन राइस
  • साबुत गेहूं

आपको किन चीज़ों से बचना चाहिए जो टेस्टोस्टेरोन कम करती हैं?

जैसे कुछ चीज़ें टेस्टोस्टेरोन बढ़ाती हैं, वैसे ही कुछ इसे कम भी कर सकती हैं। इनसे बचें या इनका सेवन कम करें:

  • प्रोसेस्ड खाना: इनमें अनहेल्दी फैट्स और केमिकल्स ज़्यादा होते हैं, जो हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ देते हैं।
  • मीठा खाना: ज़्यादा मीठा खाने से इंसुलिन का लेवल बढ़ जाता है, जिससे टेस्टोस्टेरोन कम हो सकता है।
  • शराब: ज़्यादा शराब पीने से हार्मोन बनने की प्रक्रिया पर बुरा असर पड़ता है।
  • ट्रांस फैट्स: ये तली हुई और पैकेट वाली चीज़ों में पाए जाते हैं, और टेस्टोस्टेरोन का लेवल कम करते हैं।
  • सोया प्रोडक्ट्स (ज़्यादा मात्रा में): ज़्यादा मात्रा में खाने से फाइटोएस्ट्रोजन की वजह से हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है।
  • सॉफ्ट ड्रिंक्स: इनमें चीनी और आर्टिफिशियल चीज़ें बहुत ज़्यादा मात्रा में होती हैं।

निष्कर्ष

टेस्टोस्टेरोन एक बहुत ज़रूरी हार्मोन है जो एक पुरुष की सेहत के लगभग हर पहलू पर असर डालता है—शारीरिक ताकत से लेकर मानसिक सेहत तक। टेस्टोस्टेरोन के काम को समझने से आपको अपनी जीवनशैली के बारे में बेहतर फ़ैसले लेने में मदद मिलती है।

सही खान-पान अपनाकर, एक्टिव रहकर और नुकसानदायक आदतों से बचकर, आप अपने हार्मोन के लेवल को नैचुरली संतुलित रख सकते हैं। अगर आप टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के लिए खाना चाहते हैं, तो साबुत, पोषक तत्वों से भरपूर खाने और एक संतुलित जीवनशैली पर ध्यान दें।

याद रखें, रोज़ की छोटी-छोटी आदतें आपकी लंबे समय की सेहत में बहुत बड़ा फ़र्क ला सकती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ने पर क्या होता है?

जब टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ता है, तो पुरुषों में मांसपेशियों का विकास, ज़्यादा ऊर्जा, बेहतर मूड और कामेच्छा (libido) में वृद्धि देखी जा सकती है। हालाँकि, इसका स्तर बहुत ज़्यादा होने पर आक्रामकता, मुँहासे और स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य समस्याएँ हो सकती हैं।

कुल टेस्टोस्टेरोन का स्तर कितना होना चाहिए?

पुरुषों में कुल टेस्टोस्टेरोन का सामान्य स्तर आमतौर पर 300 से 1000 ng/dL के बीच होता है। हालाँकि, उम्र और व्यक्ति के स्वास्थ्य के आधार पर यह आदर्श सीमा अलग-अलग हो सकती है।

मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरा टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम है?

इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • ऊर्जा की कमी
  • कामेच्छा में कमी
  • वज़न बढ़ना
  • मूड में बदलाव
  • मांसपेशियाँ बनाने में कठिनाई

टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने की पुष्टि करने का सबसे सटीक तरीका रक्त परीक्षण (Blood test) है।

कौन सी आदतें टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम करती हैं?

  • नींद की कमी
  • लंबे समय तक तनाव रहना
  • खराब खान-पान
  • शराब का अत्यधिक सेवन
  • सुस्त जीवनशैली (शारीरिक गतिविधि की कमी)

कौन से व्यायाम टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ाते हैं?

  • वेट ट्रेनिंग (वज़न उठाने वाले व्यायाम)
  • हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (HIIT)
  • स्क्वाट्स और डेडलिफ्ट्स
  • स्प्रिंटिंग (तेज़ दौड़ना)

नियमित व्यायाम हार्मोन के संतुलन को स्वाभाविक रूप से बनाए रखने में मदद कर सकता है।

टेस्टोस्टेरोन का स्तर बहुत ज़्यादा होने के क्या नुकसान हैं?

टेस्टोस्टेरोन का स्तर अत्यधिक होने पर ये समस्याएँ हो सकती हैं:

  • मुँहासे और तैलीय त्वचा
  • मूड में अचानक बदलाव (Mood swings)
  • हृदय संबंधी समस्याओं का बढ़ता जोखिम
  • नींद से जुड़ी समस्याएँ

बेहतर स्वास्थ्य के लिए संतुलन बनाए रखना ही सबसे ज़रूरी है।

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