
गर्भपात क्या है? कारण, लक्षण, निदान और देखभाल

मिसकैरेज (गर्भपात) का मतलब है प्रेग्नेंसी का स्वाभाविक रूप से खत्म हो जाना, इससे पहले कि भ्रूण गर्भाशय के बाहर जीवित रह सके। ज़्यादातर गर्भपात पहली तिमाही में होते हैं, यानी प्रेग्नेंसी के 20 हफ़्ते से पहले। शुरुआती प्रेग्नेंसी में गर्भपात, जिसमें 1 महीने की प्रेग्नेंसी में गर्भपात भी शामिल है, जितना लोग सोचते हैं, उससे कहीं ज़्यादा आम है।
मिसकैरेज, प्रेरित गर्भपात (induced abortion) से अलग होता है, क्योंकि यह बिना किसी मेडिकल दखल के स्वाभाविक रूप से होता है। कई मामलों में, महिलाओं को गर्भपात होने से पहले यह भी पता नहीं चलता कि वे प्रेग्नेंट हैं।
गर्भपात के लक्षण क्या हैं? What are The Symptoms of Miscarriage?
मिसकैरेज के लक्षण प्रेग्नेंसी के स्टेज के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन आम लक्षणों में शामिल हैं:
- वजाइनल ब्लीडिंग (vaginal bleeding): ब्लीडिंग सबसे आम लक्षण है। यह हल्की स्पॉटिंग से लेकर खून के थक्के के साथ भारी ब्लीडिंग तक हो सकती है। हालांकि, हल्की स्पॉटिंग का मतलब हमेशा गर्भपात नहीं होता।
- पेट में दर्द या ऐंठन (abdominal pain or cramps): पेट के निचले हिस्से में दर्द या पीठ में दर्द, जो पीरियड्स के गंभीर दर्द जैसा होता है, अक्सर गर्भपात से जुड़ा होता है।
- टिश्यू या फ्लूइड डिस्चार्ज (tissue or fluid discharge): वजाइना से टिश्यू, खून के थक्के या फ्लूइड निकलना प्रेग्नेंसी खत्म होने का संकेत हो सकता है।
- प्रेग्नेंसी के लक्षणों का अचानक खत्म होना (sudden loss of pregnancy symptoms): मतली, ब्रेस्ट में दर्द या थकान जैसे लक्षणों में अचानक कमी एक चेतावनी का संकेत हो सकता है।
- बुखार या ठंड लगना (fever or chills): कुछ मामलों में, इन्फेक्शन से होने वाले गर्भपात के कारण बुखार या ठंड लग सकती है।
अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
गर्भपात के क्या कारण हैं? What are The Causes of Miscarriage?
गर्भपात कई मेडिकल और लाइफस्टाइल से जुड़े कारणों से हो सकता है। अक्सर, इसका कारण किसी के कंट्रोल में नहीं होता।
- क्रोमोसोमल असामान्यताएं (Chromosomal abnormalities): यह सबसे आम कारण है। अगर भ्रूण में क्रोमोसोम कम या ज़्यादा होते हैं, तो वह ठीक से विकसित नहीं हो पाता।
- हार्मोनल असंतुलन (Hormonal imbalance): प्रोजेस्टेरोन का लेवल कम होने से गर्भाशय प्रेग्नेंसी को सपोर्ट नहीं कर पाता।
- माँ की स्वास्थ्य समस्याएं (Mother’s health problems): डायबिटीज, थायराइड डिसऑर्डर (thyroid disorder), ऑटोइम्यून बीमारियां (autoimmune diseases), या इन्फेक्शन जैसी स्थितियां गर्भपात का खतरा बढ़ा सकती हैं।
- गर्भाशय या सर्विक्स की समस्याएं (Problems with the uterus or cervix): गर्भाशय की बनावट में गड़बड़ी या कमजोर सर्विक्स (weak cervix) के कारण प्रेग्नेंसी खत्म हो सकती है।
- लाइफस्टाइल से जुड़े कारण (Lifestyle-related causes): धूम्रपान, शराब पीना, ड्रग्स का इस्तेमाल, बहुत ज़्यादा कैफीन लेना, और ज़्यादा तनाव का लेवल गर्भपात का खतरा बढ़ाते हैं।
- चोट या आघात (Injury or trauma): प्रेग्नेंसी के दौरान दुर्घटनाएं या गंभीर शारीरिक चोट भी गर्भपात का कारण बन सकती हैं।
गर्भपात के इलाज के क्या ऑप्शन हैं? What are The Treatment Options For Miscarriage?
इलाज गर्भपात के प्रकार, प्रेग्नेंसी की उम्र और क्या प्रेग्नेंसी का टिश्यू गर्भाशय में बचा है, इस पर निर्भर करता है।
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एक्सपेक्टेंट मैनेजमेंट (Expectant Management)
- शुरुआती गर्भपात में, शरीर बिना किसी मेडिकल मदद के प्रेग्नेंसी के टिश्यू को अपने आप बाहर निकाल सकता है।
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मेडिकल मैनेजमेंट (Medical Management)
- गर्भपात को सुरक्षित रूप से पूरा करने में मदद के लिए दवाएं दी जा सकती हैं।
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सर्जिकल इलाज (Surgical Treatment)
- अगर बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग, इन्फेक्शन या अधूरा गर्भपात (incomplete abortion / miscarriage) होता है, तो प्रोसीजर की ज़रूरत पड़ सकती है।
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इमोशनल सपोर्ट (Emotional Support)
- काउंसलिंग और इमोशनल केयर भी उतनी ही ज़रूरी है, क्योंकि गर्भपात मानसिक रूप से परेशान करने वाला हो सकता है।
डॉक्टर व्यक्ति की स्थिति के आधार पर सबसे सुरक्षित इलाज का ऑप्शन तय करेगा।
गर्भपात के बाद की देखभाल | Post-Abortion Care
गर्भपात के बाद रिकवरी में शारीरिक ठीक होना और भावनात्मक रूप से ठीक होना शामिल है।
शारीरिक देखभाल (Physical care)
- पर्याप्त आराम करें और ज़्यादा मेहनत वाले काम करने से बचें
- इन्फेक्शन से बचने के लिए साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखें
- डॉक्टर के पास रेगुलर चेकअप के लिए जाएं
- गर्भपात के बाद पीरियड्स पर नज़र रखें, जो आमतौर पर 4-6 हफ़्तों में वापस आ जाते हैं
गर्भपात के बाद का आहार (Post-miscarriage diet)
गर्भपात के बाद स्वस्थ आहार ताकत वापस लाने और हार्मोन को संतुलित करने में मदद करता है। इसमें शामिल करें:
- आयरन से भरपूर खाना जैसे हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ और दालें
- अंडे, दालों और डेयरी उत्पादों से प्रोटीन
- ताज़े फल और सब्ज़ियाँ
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
- रिकवरी के दौरान शराब और धूम्रपान से बचें।
भावनात्मक रूप से ठीक होना (Being emotionally healthy)
- दुख, अपराधबोध या उदासी महसूस होना सामान्य है। अपनों या काउंसलर से बात करने से मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष
गर्भपात एक आम लेकिन भावनात्मक रूप से मुश्किल अनुभव है। गर्भपात के लक्षणों, कारणों, निदान और गर्भपात के बाद की देखभाल को समझने से महिलाएं रिकवरी की दिशा में सही कदम उठा पाती हैं। हालांकि 1 महीने की प्रेग्नेंसी में गर्भपात शारीरिक और भावनात्मक रूप से बहुत ज़्यादा परेशान करने वाला हो सकता है, लेकिन सही मेडिकल देखभाल, पोषण और भावनात्मक सहारा ठीक होने में अहम भूमिका निभाते हैं। सही गाइडेंस से ज़्यादातर महिलाएं भविष्य में स्वस्थ प्रेग्नेंसी कर सकती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
एक महिला को कितने महीनों तक गर्भपात हो सकता है?
गर्भपात प्रेग्नेंसी के 20 हफ़्तों तक हो सकता है, हालांकि ज़्यादातर पहले 12 हफ़्तों में होते हैं।
गर्भपात के बाद कितने दिनों तक ब्लीडिंग होती है?
ब्लीडिंग आमतौर पर 7 से 14 दिनों तक रहती है, लेकिन हल्की स्पॉटिंग कुछ हफ़्तों तक जारी रह सकती है।
आपको कैसे पता चलेगा कि आपका गर्भपात हुआ है?
लक्षणों में वजाइनल ब्लीडिंग, पेट दर्द, टिश्यू निकलना और प्रेग्नेंसी के लक्षणों का खत्म होना शामिल है। मेडिकल टेस्ट से निदान की पुष्टि होती है।
अगर गर्भपात या मिसकैरेज के बाद ब्लीडिंग न हो तो क्या होता है?
कुछ मामलों में, मिस्ड मिसकैरेज होता है जहाँ प्रेग्नेंसी खत्म हो जाती है, लेकिन ब्लीडिंग शुरू नहीं होती है। मेडिकल जाँच ज़रूरी है।
1 महीने में गर्भपात कैसे होता है?
1 महीने की प्रेग्नेंसी में गर्भपात आमतौर पर क्रोमोसोमल असामान्यताओं या हार्मोनल समस्याओं के कारण होता है, इससे पहले कि भ्रूण पूरी तरह से विकसित हो।
गर्भपात कब होता है?
गर्भपात सबसे आम तौर पर पहली तिमाही में होता है, अक्सर इससे पहले कि महिला को पता चले कि वह प्रेग्नेंट है।
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