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योनि में सूखापन: कारण, लक्षण और इलाज

योनि में सूखापन: कारण, लक्षण और इलाज

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Dr. Sonal Chouksey

MBBS, DGO

17+ Years of experience

Table of Contents

योनि में सूखापन यानी Vaginal Dryness एक ऐसी स्थिति है जिसमें योनि में प्राकृतिक नमी या चिकनाई कम हो जाती है, जिससे असहजता महसूस हो सकती है। यह समस्या केवल मेनोपॉज के दौरान ही नहीं होती, बल्कि हार्मोनल बदलाव, प्रेगनेंसी, स्तनपान, कुछ दवाओं या अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के कारण किसी भी उम्र में हो सकती है। योनि में सूखेपन के आम लक्षणों में खुजली, जलन, जलन या असहजता और संभोग के दौरान दर्द शामिल हैं। यह एक सामान्य और इलाज योग्य समस्या है, लेकिन इसका सही उपचार इसके कारण पर निर्भर करता है। इस लेख में जानें, योनि में सूखापन क्यों होता है, इसके सामान्य लक्षण क्या हैं और योनि का सूखापन कैसे दूर करें।

योनि में सूखापन क्या है?

योनि में सूखापन एक ऐसी स्थिति है, जिसमें योनि की दीवारों में प्राकृतिक लुब्रिकेशन यानी चिकनाई कम हो जाती है। याद रखें कि यह एक लक्षण है, बीमारी नहीं और आम तौर पर शरीर के हॉर्मोन में पैदा हुए असंतुलन की वजह से यह स्थिति उभरती है। इससे खुजली, जलन और दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इसलिए, योनि का सूखापन कैसे दूर करें, यह सवाल अगर आपके ज़ेहन में आता है, तो इसके लिए ज़रूरी है कि वैज्ञानिक तरीक़े से इसे देखा-समझा जाए।

इससे जुड़े कुछ अहम आंकड़े

  • नॉर्थ अमेरिकन मेनोपॉज सोसाइटी के मुताबिक़, मेनोपॉज़ यानी रजोनिवृत्ति के बाद 50% महिलाओं को योनि में सूखापन का सामना करना पड़ता है।
  • क्लाइमैटिक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक़, लगभग 17% युवा महिलाओं में भी यह समस्या पाई जाती है।

क्या कम उम्र में भी योनि में सूखापन हो सकता है?

हाँ, कम उम्र में भी योनि में सूखापन हो सकता है। यह समस्या केवल मेनोपॉज या बढ़ती उम्र से जुड़ी नहीं है। हार्मोनल बदलाव, तनाव, स्तनपान, गर्भावस्था, कुछ दवाओं का सेवन, पर्याप्त उत्तेजना न होना या योनि के आसपास सुगंधित साबुन और अन्य उत्पादों का इस्तेमाल इसके कारण हो सकते हैं। कुछ महिलाओं में PCOS या अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के कारण भी हार्मोन में बदलाव हो सकता है, जिससे योनि में प्राकृतिक नमी कम हो सकती है।

अगर योनि का सूखापन बार-बार हो रहा है, लंबे समय तक बना रहता है या इसके साथ खुजली, जलन, असामान्य डिस्चार्ज या संभोग के दौरान दर्द होता है, तो कारण जानने के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

योनि में सूखेपन के लक्षण

योनि में सूखेपन का इलाज या इसे रोकने के लिए इसके लक्षणों को शुरुआत में ही समझ लेना ज़रूरी है।

लक्षण विवरण संभावित असर
खुजली और जलन योनि के चारों ओर तकलीफ़ रोज़मर्रा की ज़िंदगी में परेशानी
यौन संबंध के दौरान दर्द (डिस्पेरुनिया) योनि में पर्याप्त लुब्रिकेशन की कमी यौन जीवन और रिश्तों पर असर
संक्रमण के जैसी स्थिति योनि के प्राकृतिक पीएच लेवल में असंतुलन बैक्टीरियल या यीस्ट संक्रमण का ख़तरा
योनि की कसावट योनि की दीवारों की लचीलेपन में कमी संभोग या ख़ास तरह की चिकित्सा जांच में कठिनाई

इस तरह के लक्षण से अलग-अलग उम्र की करोड़ो महिलाएं गुज़र रही हैं। योनि का सूखापन स्त्री की ज़िंदगी से जुड़ी एक सामान्य स्थिति है जो असुविधा का कारण बनती है और एक महिला के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। कारणों, लक्षणों और उपचार के तौर-तरीकों को समझकर इस समस्या को आसानी से दूर किया जा सकता है।

योनि में सूखापन के कारण

यौन संबंध बनाने से पहले प्राकृतिक रूप से आपकी योनि में नमी पैदा होती है। हालांकि, कुछ कारणों से अगर यह नमी पैदा न हो, तो आपकी योनि में सूखापन आ जाता है।

कुछ मामलों में डायबिटीज या स्जोग्रेन सिंड्रोम के कारण भी योनि में सूखेपन की समस्या को देखा गया है। इस दौरान शरीर में द्रव पैदा करने वाली ग्रंथियों के साथ इम्यून सिस्टम का इंटरैक्शन होता है जिसके कारण वे सही से काम नहीं कर पाती हैं। आइए जानते हैं इसकी मुख्य वजहें क्या-क्या हैं:

हार्मोनल बदलाव

महिलाओं के शरीर में पैदा होने वाले हार्मोन, ख़ास तौर पर एस्ट्रोजन, योनि को स्वस्थ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। एस्ट्रोजन के स्तर में कमी आना, इसका सबसे सामान्य कारण है। इसके पीछे ये कारण हो सकते हैं:

  • मेनोपॉज़ या रजोनिवृत्ति: मेनोपॉज़ के दौरान एस्ट्रोजन बनना कम हो जाता है, जिससे योनि की दीवारें पतली हो जाती हैं।
  • प्रेगनेंसी या उसके बाद की अवस्था: इस दौरान हार्मोन में होने बदलाव से कुछ समय के लिए योनि में सूखापन आ सकता है।
  • गर्भनिरोधक गोलियां: ऐसी गर्भनिरोधक गोलियां जिनमें एस्ट्रोजन होता है, उससे भी योनि की नमी कम हो सकती है और सूखापन बढ़ सकता है।

मेडिकल इलाज और स्वास्थ्य की ख़ास स्थिति

  • कैंसर का उपचार: कीमोथेरेपी और रेडिएशन से भी हार्मोन में असंतुलन पैदा हो सकता है।
  • ऑटोइम्यून विकार: सोग्रिन सिंड्रोम जैसी बीमारियां पूरे शरीर में नमी पैदा करने वाली ग्रंथियों पर असर डाल सकती हैं।
  • दवाइयां: एंटीहिस्टामिन और डीकंजेस्टेंट जैसे एंटी-डिप्रेसेंट शरीर की नमी कम कर सकते हैं।

जीवनशैली

  • धूम्रपान: यह रक्त प्रवाह को कम करता है और एस्ट्रोजेन के स्तर पर असर डालता है।
  • तनाव: लंबे समय तक तनाव की वजह हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है।
  • शरीर में पानी की कमी: पर्याप्त पानी न पीने से शरीर में नमी कम हो सकती है और इसकी वजह से वेजाइनल ड्राइनेस की स्थिति पैदा हो सकती है।

इसके अलावा, प्रसव के बाद और स्तनपान के दौरान भी ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है। कुछ शोधपत्रों के मुताबिक़ डायबिटीज़ भी इसका एक कारण है। ओवरी को हटाने की सर्जरी से गुज़रने वाली महिलाओं में भी योनि में सूखेपन की समस्या पैदा हो सकती है। अगर कोई महिला यौन रूप से उत्तेजित नहीं है, तो संभोग के दौरान यह समस्या आम तौर पर देखी जा सकती है। योनी को सुगंधित साबुन से साफ़ करने या फिर उस पर परफ़्यूम और डेयोडोरेंट छिड़कने से भी सूखेपन की स्थित पैदा हो सकती है।

योनि में सूखापन से जुड़े वैज्ञानिक तथ्य

नेचर माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक़, एस्ट्रोजेन की कमी से योनि माइक्रोबायोम पर असर पड़ता है और इस वजह से संक्रमण और सूजन का ख़तरा बढ़ जाता है।

असली ज़िंदगी से जुड़ा उदाहरण: 52 साल की मीरा को मेनोपॉज़ के बाद से योनी में जलन और संक्रमण की शिकायत थी। उनकी गायनोकोलॉजिस्ट ने एस्ट्रोजन थेरेपी और रोज़ाना इस्तेमाल के लिए मॉस्चराइज़र का सुझाव दिया। तीन महीने के अंदर मीरा को काफ़ी राहत महसूस हुई और संक्रमण भी कम हो गया।

योनि में सूखापन के पीछे वेजाइनल माइक्रोबायोम की भूमिका

वेजाइनल यानी योनि माइक्रोबायोम मुख्य रूप से लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया से बनता है, जो लैक्टिक एसिड पैदा करते हैं और योनि के पीएच स्तर को 3.8 से 4.5 के बीच बनाए रखते हैं।

माइक्रोबायोम की स्थिति विशेषता संभावित असर
संतुलित (लैक्टोबैसिलस-डॉमिनेटेड) ऐसिडिक पीएच, प्रोटेक्टिव म्यूकोसा संक्रमण का कम जोखिम
अंतुलित (शुष्क स्थिति) न्यूट्रल या अल्कलाइन पीएच, पतली म्यूकोसा संक्रमण का ज़्यादा जोखिम

योनि में सुखेपन की क्या जटिलताएँ हैं?

अगर योनि में सूखापन का इलाज न किया जाए, तो इससे कई जटिलताएँ हो सकती हैं जो शारीरिक और भावनात्मक, दोनों तरह के स्वास्थ्य पर असर डालती हैं:

  1. संभोग के दौरान दर्द: लगातार सूखापन यौन गतिविधि को असहज या यहाँ तक कि दर्दनाक बना सकता है, जिससे लोग इससे बचने लगते हैं और रिश्तों में तनाव आ जाता है।
  2. संक्रमण का बढ़ता जोखिम: योनि का वातावरण एक संतुलित pH और नमी के स्तर पर निर्भर करता है। सूखापन इस संतुलन को बिगाड़ सकता है, जिससे इन चीज़ों का जोखिम बढ़ जाता है:
    • योनि संक्रमण (Vaginal infections)
    • मूत्र मार्ग संक्रमण (UTIs)
  3. योनि में टियर या जलन: योनि के पतले और सूखे ऊतक (tissues) आसानी से उसमें टियर यानि फटने की समस्या हो सकती है। खासकर संभोग या शारीरिक गतिविधि के दौरान।
  4. भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव: लगातार असुविधा और यौन स्वास्थ्य में बदलाव से ये समस्याएँ हो सकती हैं:
    • आत्म-विश्वास में कमी
    • चिंता या तनाव
    • रिश्तों में चुनौतियाँ
  5. जीवन की गुणवत्ता में कमी: रोज़ाना होने वाली असुविधा, खुजली और जलन, रोज़मर्रा के कामों और समग्र स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है।

योनि में सूखापन का निदान कैसे किया जाता है?

योनि में सूखापन का निदान करने में आमतौर पर मेडिकल इतिहास, लक्षणों का मूल्यांकन और शारीरिक जांच का मेल शामिल होता है।

  1. मेडिकल इतिहास की समीक्षा

एक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता इन बातों के बारे में पूछेगा:

  • लक्षण और उनकी अवधि
  • मासिक धर्म और प्रजनन संबंधी इतिहास
  • इस्तेमाल की जा रही दवाएँ
  • जीवनशैली की आदतें
  1. शारीरिक जांच

पेल्विक जांच से इन बातों का मूल्यांकन करने में मदद मिलती है:

  • योनि के ऊतकों की मोटाई
  • नमी का स्तर
  • सूजन या संक्रमण के संकेत
  1. हार्मोनल मूल्यांकन

कुछ मामलों में, हार्मोन के स्तर (विशेष रूप से एस्ट्रोजन) का मूल्यांकन करने के लिए रक्त जांच की सिफारिश की जा सकती है।

  1. pH जांच

योनि के pH स्तर को मापा जा सकता है, क्योंकि इसमें असंतुलन किसी अंतर्निहित समस्या का संकेत हो सकता है।

  1. अतिरिक्त जांचें

यदि संक्रमण या अन्य स्थितियों का संदेह हो, तो अन्य कारणों को खारिज करने के लिए आगे की जांचें की जा सकती हैं।

जल्दी निदान यह सुनिश्चित करता है कि उपचार का सही तरीका चुना जाए और जटिलताओं से बचा जा सके।

योनि के सूखेपन का इलाज

ऐसी स्थिति पैदा होने के बाद हर किसी के ज़ेहन में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि योनि के सूखेपन का निदान कैसे किया जाता है। तो, योनि सूखापन का उपचार तलाशने वाली महिलाओं को सलाह दी जाती है कि सबसे पहले इसे गंभीरता से लें।

सामाजिक रूढ़ियों की वजह से संकोच के मारे डॉक्टर के पास जाने से कतराएं नहीं। जैसा कि आपने ऊपर देखा कि कई कारणों से योनि में सूखापन की समस्या पैदा होती है। इन कारणों की जानकारी हर महिला के पास होनी चाहिए। अगर आप इन सभी संभावित कारणों के बारे में पहले से ही जानती हैं, तो मात्र कुछ सावधानियों को बरतने के बाद आप ख़ुद को ज़्यादा परेशानी में फंसने से बचा सकती हैं। तो आइए जानते हैं योनि का सुखापन कैसे दूर करें और कैसे इससे ख़ुद को बचाएं:

1. मॉस्चराइज़र और लुब्रिकेंट

ये आसानी से मेडिकल स्टोर पर मिल जाते हैं। मॉइस्चराइज़र को योनि के टिशू को लंबे समय तक नमी देने के लिहाज़ से डिज़ाइन किया जाता है। सूखेपन को कम करने के लिए इन्हें नियमित रूप से लगाया जा सकता है। इससे लंबे समय तक हाइड्रेशन मिलता है। वहीं, लुब्रिकेंट आपको यौन संबंध के दौरान तुरंत राहत पहुंचाते हैं। ये तेल-आधारित, सिलिकॉन-आधारित या पानी-आधारित हो सकते हैं।

2. हार्मोनल उपचार

टॉपिकल एस्ट्रोजेन क्रीम का असर योनि के टिशू पर पड़ता है और यह काफ़ी कारगर उपचार है। इसी तरह मेनोपॉज़ की स्थिति के बाद डॉक्टर सिस्टमेटिक हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) का भी सुझाव देते हैं।

3. जीवनशैली में सुधार

पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करने और सुगंधित और सफ़ाई के कठोर उत्पादों के इस्तेमाल से पहरेज बरतने के साथ-साथ नियमित रूप से पेल्विक फ़्लोर व्यायाम करना भी काफ़ी मददगार साबित हो सकता है।

4. आधुनिक उपचार

उत्तर अमेरिकन मेनोपॉज़ सोसाइटी के शोधपत्र मेनोपॉज में प्रकाशित एक रिसर्च, प्लेटलेट-रिच प्लाज़्मा को इंजेक्ट करके इसका समाधान तलाशने की अहमियत पर प्रकाश डालता है।

योनि का सूखापन दूर करने के घरेलू उपाय

ज़्यादातर महिलाएं योनि का सूखापन कैसे दूर करें, यह जानना चाहती हैं। योनि के सूखेपन से राहत के लिए वेजाइनल मॉइस्चराइज़र और लुब्रिकेंट का इस्तेमाल मददगार हो सकता है। पर्याप्त पानी पीना, धूम्रपान से बचना और विटामिन व स्वस्थ वसा से भरपूर संतुलित आहार लेना भी समग्र स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा, तनाव और चिंता को कम करने की कोशिश करें और सुगंधित साबुन, स्प्रे या अन्य ऐसे उत्पादों से बचें, जो योनि के आसपास जलन पैदा कर सकते हैं।

योनि के आसपास किसी भी तेल, क्रीम या एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करने से पहले सावधानी बरतें, क्योंकि कुछ उत्पाद जलन या संक्रमण का कारण बन सकते हैं। अगर योनि का सूखापन लगातार बना रहता है, संभोग के दौरान दर्द होता है या अन्य लक्षण दिखाई देते हैं, तो कारण जानने के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

दुनिया भर में क्या है कहानी

प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द लैंसेट ने दुनिया के अलग-अलग इलाक़ों का सिलसिलेवार और विस्तृत अध्ययन किया और पाया कि वेजाइनल ड्राइनेस के मामले में:

  • पश्चिमी देशों में ज़्यादा जागरुकता है और वहां इलाज की दर भी ज़्यादा है
  • एशिया में सांस्कृतिक और सामाजिक रूढ़ियों की वजह से कम लोग डॉक्टर के पास जाते हैं।
  • भारत में स्वास्थ्य व्यवस्था की सीमित पहुंच की वजह से ज़्यादातर लोग घरेलू उपचार तक ही सीमित रहते हैं।

इस रिपोर्ट के मुताबिक़ उत्तरी अमेरिका में 50% महिलाएं डॉक्टर से योनि में सूखेपन की रिपोर्ट करती हैं। यूरोप में यह आंकड़ा 45%, एशिया में 25% और अफ़्रीका में 20% है।

मिथ्स बनाम फ़ैक्ट्स

मिथ्स

फ़ैक्ट्स

सिर्फ़ बुज़ुर्ग महिलाओं में ही योनि मे सूखेपन की समस्या आती हैं। हर उम्र की महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन या मेडिकल स्थिति की वजह से योनि में सूखापन आ सकता है।
योनि का सूखापन साफ़-सफ़ाई से जुड़ा मामला है। यह स्वच्छता से नहीं, बल्कि मुख्य रूप से शारीरिक या हार्मोनल बदलावों की वजह से होता है।
प्राकृतिक उपचार इसे ठीक करने के लिए पर्याप्त हैं। गंभीर मामलों में डॉक्टर से मिलना और इलाज कराना ज़रूरी हो जाता है।

किन महिलाओं को ज़्यादा खतरा होता है?

जिन महिलाओं को वजाइनल ड्राइनेस (योनि में सूखापन) होने की संभावना ज़्यादा होती है, उनमें शामिल हैं:

  • वे महिलाएं जो मेनोपॉज़ या पेरिमेनोपॉज़ से गुज़र रही हैं
  • स्तनपान कराने वाली माताएं
  • वे महिलाएं जिनका कैंसर का इलाज हुआ है
  • वे महिलाएं जो कुछ खास दवाएं ले रही हैं, जैसे एंटीहिस्टामाइन या एंटीडिप्रेसेंट
  • हार्मोनल विकार वाली महिलाएं

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या वजाइनल ड्राइनेस से फर्टिलिटी पर असर पड़ता है?

वजाइनल ड्राइनेस सीधे तौर पर बांझपन का कारण नहीं बनती, लेकिन यह गर्भधारण पर परोक्ष रूप से असर डाल सकती है। लुब्रिकेशन की कमी से सेक्स करना असहज हो सकता है, जिससे इसकी फ्रीक्वेंसी कम हो सकती है। इसके अलावा, वजाइना का सूखा वातावरण स्पर्म की गति के लिए आदर्श नहीं हो सकता है। हालांकि, सही इलाज और लुब्रिकेशन की मदद से, इस समस्या को अक्सर प्रभावी ढंग से मैनेज किया जा सकता है।

PCOS और वजाइनल ड्राइनेस के बीच क्या संबंध है?

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) एक हार्मोनल विकार है, जिससे कभी-कभी एस्ट्रोजन और एंड्रोजन हार्मोन में असंतुलन हो सकता है। हालांकि PCOS को आमतौर पर अनियमित पीरियड्स और ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्याओं से जोड़ा जाता है, लेकिन कुछ महिलाओं को हार्मोनल उतार-चढ़ाव या इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ खास दवाओं के कारण वजाइनल ड्राइनेस का अनुभव हो सकता है।

क्या योनि में सूखापन उपचार के बिना ठीक हो सकता है?

कम गंभीर मामले स्वाभाविक रूप से ठीक हो सकते हैं, लेकिन अगर सूखापन लगातार बना हुआ है, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

क्या वेजाइनल एस्ट्रोजन थेरेपी के दुष्प्रभाव हो सकते हैं?

हल्का-फुल्का जलन हो सकता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह मानें और उसी हिसाब से एहतियात बरतें।

स्तनपान की वजह से योनि में सूखापन आता है?

दूध के उत्पादन को बढ़ावा देने वाले हार्मोन प्रोलैक्टिन की वजह से अस्थाई रूप से एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है और इससे योनि में कुछ समय के लिए सूखापन आ सकता है। योनि के सूखापन को दूर करने के लिए यह ज़रूरी है कि आपके पास इससे जुड़ी सही जानकारी हो। अगर समस्या गंभीर है, तो डॉक्टर से संपर्क करने में देर न करें।

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