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USG टेस्ट क्या होता है? प्रकार, प्रक्रिया, प्रेग्नेंसी में महत्व और खर्च

USG टेस्ट क्या होता है? प्रकार, प्रक्रिया, प्रेग्नेंसी में महत्व और खर्च

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Dr. Snehadarshini Karanth

MBBS, MS (Obstetrics & Gynaecology), FRM

8+ Years of experience

Table of Contents

आज की मेडिकल दुनिया में, डायग्नोसिस और इलाज की प्लानिंग में इमेजिंग टेस्ट बहुत ज़रूरी भूमिका निभाते हैं। ऐसा ही एक आम तौर पर बताया जाने वाला और बहुत भरोसेमंद टेस्ट USG है। चाहे पेट दर्द हो, पथरी (Kidney Stone) की शिकायत हो, फैटी लिवर हो, प्रेग्नेंसी की मॉनिटरिंग हो, या फर्टिलिटी का मूल्यांकन हो, डॉक्टर अक्सर यह टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं क्योंकि यह सुरक्षित, दर्द रहित और बहुत जानकारी देने वाला होता है।

इस ब्लॉग में, हम साफ़ तौर पर समझाएंगे कि USG क्या है, इसका पूरा नाम, यह कैसे काम करता है, डॉक्टर के पर्चे पर लिखे विभिन्न USG टेस्ट के कोड्स, पेट-किडनी-प्रेग्नेंसी की रिपोर्ट समझने का तरीका और इसका खर्च।

USG का पूरा नाम क्या है? (USG Full Form in Hindi)

  • USG का पूरा नाम: अल्ट्रासोनोग्राफी (Ultrasonography) है।
  • USG का मतलब: अल्ट्रासोनोग्राफी एक आधुनिक डायग्नोस्टिक इमेजिंग तकनीक (Diagnostic Imaging Technique) है जो शरीर के अंदरूनी अंगों, टिशू और खून के बहाव की रियल-टाइम इमेज बनाने के लिए हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स (ध्वनि तरंगों) का इस्तेमाल करती है। ये इमेज डॉक्टरों को बिना किसी हानिकारक रेडिएशन (जैसे एक्स-रे) के स्वास्थ्य स्थितियों का सटीक मूल्यांकन करने में मदद करती हैं।

रिपोर्ट में USG क्यों लिखा होता है?

आप अक्सर मेडिकल रिपोर्ट और प्रिस्क्रिप्शन में “USG” लिखा हुआ देख सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि यूएसजी एक स्टैंडर्ड मेडिकल शॉर्ट फॉर्म है जिसका इस्तेमाल दुनिया भर में अल्ट्रासाउंड जांच (Ultrasound Examination) के लिए किया जाता है।

डॉक्टर रिपोर्ट में यूएसजी लिखते हैं यह बताने के लिए:

  • किए गए इमेजिंग टेस्ट का प्रकार
  • जांचे गए अंग या क्षेत्र (उदाहरण के लिए, पेल्विक USG या पेट का अल्ट्रासाउंड)
  • अल्ट्रासाउंड इमेज के आधार पर ऑब्ज़र्वेशन और नतीजे

यूएसजी शब्द का इस्तेमाल करने से मेडिकल डॉक्यूमेंटेशन छोटा, स्टैंडर्ड और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स के लिए समझने में आसान रहता है।

डॉक्टर के पर्चे पर लिखे USG कोड्स का क्या मतलब है? (Prescription Decoder)

अक्सर डॉक्टर पर्चे पर केवल USG नहीं लिखते, बल्कि उसके साथ कुछ शॉर्ट फॉर्म जोड़ते हैं। इनका सही मतलब समझना बहुत ज़रूरी है:

टेस्ट का नाम (Code) पूरा नाम (Full Form) यह जांच किस अंग के लिए होती है?
USG W/A USG Whole Abdomen पूरे पेट के अंगों (लिवर, गॉलब्लैडर, पैंक्रियाज, किडनी, स्प्लीन) की जांच।
USG A+P USG Abdomen & Pelvis पूरे पेट के साथ-साथ पेल्विक एरिया (यूट्रस, ओवरी, यूरिनरी ब्लैडर) की संयुक्त जांच।
USG KUB USG Kidney, Ureter, Bladder गुर्दे, मूत्रनली और मूत्राशय में पथरी (Stone) या यूरिन इन्फेक्शन की जांच।
USG OBS USG Obstetrics Scan गर्भावस्था में भ्रूण के विकास, दिल की धड़कन और गर्भनाल की निगरानी।
USG FWB USG Fetal Well Being गर्भ में पल रहे शिशु के वजन, हलचल, ब्लड फ्लो और एमनियोटिक फ्लूइड की जांच।
USG TVS Transvaginal Sonography योनि के माध्यम से आंतरिक प्रजनन अंगों (यूट्रस, ओवरीज, फॉलिकल्स) की बारीक जांच।
HR-USG High-Resolution USG थायरॉयड, ब्रेस्ट, स्क्रोटम (अंडकोष) या मांसपेशियों की विस्तृत माइक्रो-इमेजिंग।

USG कैसे काम करता है? (How USG Works)

USG साउंड वेव रिफ्लेक्शन (इको) के सिद्धांत पर काम करता है। यहाँ एक आसान एक्सप्लेनेशन दिया गया है:

  1. जांच वाले हिस्से पर एक विशेष वाटर-बेस्ड जेल लगाया जाता है, जो प्रोब और त्वचा के बीच हवा को हटाता है।
  2. ट्रांसड्यूसर (Transducer / Probe) नाम का एक हाथ में पकड़ने वाला डिवाइस त्वचा पर रखा जाता है।
  3. ट्रांसड्यूसर शरीर में हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड वेव भेजता है।
  4. ये साउंड वेव अंगों या टिशू से टकराने के बाद वापस आती हैं।
  5. लौटने वाली इको (Echoes) को कंप्यूटर स्क्रीन पर रियल-टाइम इमेज में बदल देता है।

क्योंकि USG में साउंड वेव का इस्तेमाल होता है, न कि एक्स-रे का, इसलिए इसे प्रेग्नेंसी के दौरान भी एक बहुत सुरक्षित डायग्नोस्टिक टूल माना जाता है।

USG के मुख्य प्रकार (Types of USG Tests)

अलग-अलग तरह के U.S.G. टेस्ट होते हैं, जिनमें से हर एक खास डायग्नोस्टिक मकसद के लिए डिज़ाइन किया गया है:

1. एब्डोमिनल अल्ट्रासाउंड (Abdominal USG)

एब्डोमिनल अल्ट्रासाउंड पेट के अंदर के अंगों की जांच करता है, जैसे:

  • लिवर (फैटी लिवर)
  • गॉलब्लैडर (पित्त की थैली की पथरी)
  • किडनी (गुर्दे की पथरी व सूजन)
  • पैंक्रियाज (Pancreas)
  • स्प्लीन (Spleen)

यह अक्सर पेट दर्द, सूजन, किडनी स्टोन या पाचन संबंधी शिकायतों के लिए रिकमेंड किया जाता है।

2. पेल्विक यूएसजी (Pelvic USG)

पेल्विक USG का इस्तेमाल रिप्रोडक्टिव अंगों का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है:

  • यूट्रस (Uterus)
  • ओवरी (Ovaries)
  • फैलोपियन ट्यूब
  • प्रोस्टेट (पुरुषों में)

यह टेस्ट सिस्ट, फाइब्रॉइड (Fibroid), इन्फेक्शन और बिना किसी वजह के पेल्विक दर्द का पता लगाने में मदद करता है।

3. ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड (TVS Scan)

ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड एक खास पेल्विक स्कैन है जो वजाइना में एक विशेष प्रोब डालकर किया जाता है। यह यूट्रस और ओवरी की ज़्यादा साफ़ और डिटेल वाली इमेज देता है। यह आमतौर पर इसके लिए सलाह दी जाती है:

  • शुरुआती प्रेग्नेंसी (5–7 हफ्ते) का मूल्यांकन
  • असामान्य ब्लीडिंग का मूल्यांकन
  • फर्टिलिटी और एंडोमेट्रियल लाइनिंग की निगरानी

4. डॉपलर अल्ट्रासाउंड (Color Doppler USG)

डॉपलर USG ब्लड फ्लो पर फोकस करता है। यह डॉक्टरों को इन चीज़ों का मूल्यांकन करने में मदद करता है:

  • आर्टरी और वेन्स में ब्लड सर्कुलेशन
  • नसों में ब्लॉकेज या क्लॉट
  • प्रेग्नेंसी के दौरान प्लेसेंटल ब्लड फ्लो (Placental Blood Flow)

5. फॉलिक्युलर यूएसजी (Follicular Monitoring)

फॉलिक्युलर USG का इस्तेमाल फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में बड़े पैमाने पर किया जाता है। यह इन चीज़ों को ट्रैक करता है:

USG रिपोर्ट कैसे समझें? (Understanding General, Kidney & Pregnancy USG Terms)

अक्सर लोग अपनी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखकर उसमें लिखे मेडिकल शब्दों से घबरा जाते हैं। चाहे आपकी रिपोर्ट पेट/किडनी (Abdomen/KUB) की हो या प्रेग्नेंसी की, नीचे दिए गए शब्दों से आप अपनी रिपोर्ट आसानी से समझ सकते हैं:

1. पेट और किडनी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के मुख्य शब्द (Abdomen & Kidney USG Terms):

  • Calculus / Concretion (कैलकुलस): इसका मतलब पथरी (Stone) होता है। जैसे ‘Renal Calculus’ का मतलब गुर्दे की पथरी और ‘Gallbladder Calculus’ का मतलब पित्त की थैली की पथरी है।
  • Hydronephrosis (हाइड्रोनेफ्रोसिस): जब पथरी या रुकावट की वजह से किडनी से पेशाब नीचे नहीं उतर पाता और किडनी में पेशाब का दबाव/सूजन आ जाती है।
  • Fatty Infiltration / Hepatomegaly: लिवर में सामान्य से अधिक फैट जमा होना (फैटी लिवर) या लिवर का आकार बड़ा होना।
  • Cyst (सिस्ट): अंग के अंदर पानी या तरल पदार्थ की पतली थैली। (अधिकांश सामान्य सिस्ट हानिरहित होते हैं)।
  • Normal CMD (Corticomedullary Differentiation): यह दर्शाता है कि आपकी दोनों किडनियां पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनकी आंतरिक बनावट सामान्य है।
  • Echogenicity (इकोजेनिसिटी): अल्ट्रासाउंड इमेज में टिशू कितना सफेद (Hyperechoic) या काला (Hypoechoic) दिख रहा है।

2. प्रेग्नेंसी में अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के मुख्य शब्द (Pregnancy USG Terms):

  • GA (Gestational Age): गर्भ में बच्चे की वास्तविक उम्र (हफ्तों और दिनों में)।
  • EDD (Estimated Due Date): सोनोग्राफी के आधार पर संभावित डिलीवरी की तारीख।
  • FHR (Fetal Heart Rate): गर्भस्थ शिशु के दिल की धड़कन (सामान्य रेंज: 120–160 बीट्स प्रति मिनट)।
  • AFI (Amniotic Fluid Index): गर्भ में बच्चे के चारों ओर मौजूद पानी (Ammonic Fluid) की मात्रा (सामान्य: 8–18 सेमी)।
  • CRL (Crown-Rump Length): पहली तिमाही में सिर से लेकर कूल्हे तक बच्चे की लंबाई।
  • Placenta Position (प्लेसेंटा): गर्भनाल की स्थिति (Anterior – आगे की तरफ, Posterior – पीछे की तरफ, या Fundal – ऊपर की तरफ)।

प्रेग्नेंसी में USG का महत्व और स्कैन शेड्यूल (Pregnancy Ultrasound Timeline)

होने वाले माता-पिता के लिए प्रेग्नेंसी में USG का मतलब समझना बहुत ज़रूरी है। सामान्य गर्भावस्था में आमतौर पर 3 से 4 मुख्य अल्ट्रासाउंड स्कैन किए जाते हैं:

प्रेग्नेंसी में USG का महत्व और स्कैन शेड्यूल (Pregnancy Ultrasound Timeline)

  1. फर्स्ट ट्राइमेस्टर डेटिंग स्कैन (6 से 8 हफ्ते): भ्रूण की संख्या (सिंगल या ट्विन्स) और भ्रूण की धड़कन (Fetal Heartbeat) की पुष्टि करना तथा जेस्टेशनल उम्र का सटीक अनुमान लगाना।
  2. एनटी/एनबी स्कैन (NT/NB Scan – 11 से 13 हफ्ते): डाउन सिंड्रोम और अन्य क्रोमोसोमल असामान्यताओं के शुरुआती जोखिम की जांच।
  3. लेवल 2 एनोमली स्कैन / TIFFA (18 से 20 हफ्ते): यह प्रेग्नेंसी का सबसे महत्वपूर्ण स्कैन है, जिसमें बच्चे के मस्तिष्क, रीढ़, हृदय, अंगों और चेहरे की जन्मजात असामान्यताओं का विस्तृत पता लगाया जाता है।
  4. ग्रोथ और वेल-बीइंग स्कैन (28 से 36 हफ्ते): बच्चे की ग्रोथ, वजन, गर्भ में स्थिति (Position), प्लेसेंटा की जगह और एमनियोटिक फ्लूइड (Amniotic Fluid) के लेवल की जांच करना।

फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में USG की भूमिका

फर्टिलिटी के मूल्यांकन और ट्रीटमेंट में USG की मुख्य भूमिका होती है। डॉक्टर अल्ट्रासाउंड पर निर्भर रहते हैं:

  • ओवेरियन रिज़र्व (Ovarian reserve / AFC) का आकलन करने के लिए
  • फॉलिकुलर USG के माध्यम से अंडे के विकास की निगरानी करने के लिए
  • गर्भाशय के स्वास्थ्य और परत का मूल्यांकन करने के लिए
  • ओव्यूलेशन और एम्ब्रियो ट्रांसफर का सही समय जानने के लिए

USG के बिना, फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में सटीकता की कमी होगी। यह ट्रीटमेंट प्लान को कस्टमाइज़ करने में मदद करता है और सफल गर्भधारण की संभावनाओं को बेहतर बनाता है।

USG टेस्ट की तैयारी कैसे करें? (How to Prepare)

  • Whole Abdomen (W/A) व लिवर/गॉलब्लैडर USG के लिए: टेस्ट से 6 से 8 घंटे पहले खाली पेट (Fasting) रहना होता है ताकि पित्ताशय सिकुड़ा न रहे और स्पष्ट दिखे।
  • Kidney (KUB), Pelvic व Early Pregnancy USG के लिए: टेस्ट से 1 घंटा पहले भरपूर पानी पीना और पेशाब रोकना (Full Bladder) ज़रूरी होता है ताकि ब्लैडर और पेल्विक अंग साफ नजर आएं।
  • TVS स्कैन के लिए: टेस्ट से ठीक पहले पेशाब करके ब्लैडर खाली करना होता है।

भारत में USG टेस्ट का खर्च (USG Test Cost in India)

टेस्ट का प्रकार अनुमानित खर्च (रुपये में)*
बेसिक USG (Abdomen / Pelvis / KUB) ₹800 – ₹1,500
USG Whole Abdomen (W/A) ₹1,200 – ₹2,200
TVS अल्ट्रासाउंड ₹1,000 – ₹1,800
लेवल 2 एनोमली स्कैन (TIFFA) ₹2,000 – ₹3,500
कलर डॉपलर स्कैन ₹2,000 – ₹4,000
फॉलिक्युलर स्टडी (पूरा साइकिल) ₹2,500 – ₹4,500

*नोट: ये अनुमानित कीमतें हैं और अलग-अलग शहरों व डायग्नोस्टिक सेंटर्स के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।

क्या USG सुरक्षित है?

हाँ, USG को बहुत सुरक्षित माना जाता है। यह एक्स-रे या सीटी स्कैन की तरह आयनाइजिंग रेडिएशन का उपयोग नहीं करता है।

कई अध्ययनों और दशकों के मेडिकल उपयोग से पता चला है कि मेडिकल कारणों से किए जाने पर अल्ट्रासाउंड का वयस्कों, गर्भवती महिलाओं या अजन्मे बच्चों पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता है। यही कारण है कि USG स्कैन प्रेग्नेंसी मॉनिटरिंग प्रसव पूर्व देखभाल का एक नियमित हिस्सा है।

USG के बारे में आम गलतफहमियाँ

सुरक्षित होने के बावजूद, कुछ गलतफहमियाँ अभी भी हैं। आइए उन्हें दूर करते हैं:

  • मिथक: USG बच्चे को नुकसान पहुँचाता है
    • तथ्य: अल्ट्रासाउंड केवल सुरक्षित ध्वनि तरंगों (Sound Waves) का इस्तेमाल करता है।
  • मिथक: बहुत ज़्यादा अल्ट्रासाउंड से साइड इफेक्ट होते हैं
    • तथ्य: डॉक्टर की सलाह पर किए गए स्कैन से माँ, बच्चे या आंतरिक अंगों को कोई नुकसान नहीं होता।
  • मिथक: USG सिर्फ़ प्रेग्नेंसी के लिए है
    • तथ्य: USG का इस्तेमाल पेट, किडनी की पथरी, फैटी लिवर, थायरॉयड और पुरुषों के प्रोस्टेट जैसी कई मेडिकल स्थितियों के लिए किया जाता है।
  • मिथक: अल्ट्रासाउंड के नतीजे हमेशा गलत होते हैं
    • तथ्य: जब सही और अनुभवी सोनोलॉजिस्ट द्वारा किया जाता है, तो USG अत्यंत भरोसेमंद डायग्नोस्टिक जानकारी देता है।

निष्कर्ष

USG, या अल्ट्रासोनोग्राफी, मॉडर्न मेडिसिन में सबसे ज़रूरी डायग्नोस्टिक टूल्स में से एक है। पेट दर्द और पथरी जैसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्याओं का पता लगाने से लेकर प्रेग्नेंसी की निगरानी करने और फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में मदद करने तक, इसके इस्तेमाल बहुत ज़्यादा और कीमती हैं।

यह समझकर कि USG क्या है, इसके प्रकार और इसका मेडिकल महत्व क्या है, मरीज़ों को यह टेस्ट करवाने की सलाह दिए जाने पर ज़्यादा आत्मविश्वास और जानकारी महसूस हो सकती है। सुरक्षित, दर्द रहित और बहुत असरदार, USG सही डायग्नोसिस और निवारक स्वास्थ्य देखभाल का एक मुख्य आधार बना हुआ है।

यदि आप फर्टिलिटी परामर्श, प्रेग्नेंसी स्कैन या अन्य डायग्नोस्टिक जांच करवाना चाहते हैं, तो आज ही बिर्ला फर्टिलिटी & आईवीएफ (Birla Fertility & IVF) से संपर्क करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या USG और अल्ट्रासाउंड में कोई अंतर है?

नहीं, USG (Ultrasonography), अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) और सोनोग्राफी (Sonography) तीनों एक ही टेस्ट के अलग-अलग नाम हैं।

किडनी के लिए डॉक्टर कौन सा USG टेस्ट लिखते हैं?

किडनी, यूरिनरी ब्लैडर और पथरी की जांच के लिए डॉक्टर आमतौर पर USG KUB (Kidney, Ureter, Bladder) या USG Whole Abdomen (W/A) लिखते हैं।

प्रेग्नेंसी के दौरान कितने अल्ट्रासाउंड स्कैन ज़रूरी होते हैं?

नॉर्मल प्रेग्नेंसी में आमतौर पर 3 से 4 मुख्य अल्ट्रासाउंड स्कैन (डेटिंग, NT स्कैन, लेवल 2 एनोमली और ग्रोथ स्कैन) की सलाह दी जाती है। हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में डॉक्टर की सलाह पर यह संख्या बढ़ सकती है।

USG W/A टेस्ट क्या होता है?

USG W/A का फुल फॉर्म ‘USG Whole Abdomen’ होता है। यह पूरे पेट के आंतरिक अंगों जैसे लिवर, किडनी, गॉलब्लैडर, पैंक्रियाज और स्प्लीन की संपूर्ण जांच के लिए किया जाता है।

क्या अल्ट्रासाउंड से बच्चे के लिंग (Gender) की जांच भारत में वैध है?

नहीं। भारत में प्री-कंसेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (PCPNDT) एक्ट के तहत अल्ट्रासाउंड द्वारा जन्म से पहले बच्चे के लिंग का निर्धारण या खुलासा करना गैर-कानूनी और सख्त दंडनीय अपराध है।

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