प्लेसेंटा क्या होता है? – Placenta Kya Hota Hai
प्रेगनेंसी के दौरान बच्चेदानी में विकसित होने वाला एक अस्थायी अंग है प्लेसेंटा। यह माँ और शिशु के बीच एक जीवन रेखा की तरह काम करता है। प्लेसेंटा शिशु को ऑक्सीजन और पोषण देता है और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।
इतना ही नहीं, प्लेसेंटा हार्मोन बनाकर प्रेगनेंसी को सुरक्षित बनाए रखता है और गर्भ में पल रहे शिशु को हानिकारक बैक्टीरिया एवं वायरस से बचाता है। शिशु के जन्म के बाद प्लेसेंटा शरीर से बाहर निकल जाता है, जिसे ‘आफ्टर बर्थ’ कहते हैं।
प्लेसेंटा का निर्माण कब और कैसे होता है?
- पहला चरण (गर्भाधान या कंसेप्शन के बाद): जब निषेचित अंडा बच्चेदानी की दीवार से जुड़ता है, तभी प्लेसेंटा बनना शुरू हो जाता है।
- पहली तिमाही (0-12 सप्ताह): इस दौरान प्लेसेंटा माँ की रक्त वाहिकाओं से जुड़ता है और शिशु को ऑक्सीजन एवं पोषण देना शुरू करता है। साथ ही, प्रेगनेंसी को सुरक्षित बनाए रखने के लिए हार्मोन का निर्माण करता है।
- दूसरी और तीसरी तिमाही (13-40 सप्ताह): इस दौरान प्लेसेंटा पूरी तरह से विकसित हो जाता है। यह गर्भनाल के जरिए शिशु तक सभी जरूरी चीजें पहुँचाता है।
- डिलीवरी के बाद: शिशु के जन्म के कुछ मिनटों बाद प्लेसेंटा भी बाहर निकल जाता है। इसे ‘आफ्टर बर्थ’ कहा जाता है।
प्लेसेंटा क्या काम करता है?
- ऑक्सीजन और पोषण देना: शिशु को आवश्यक पोषक तत्व और ऑक्सीजन पहुँचाना।
- अपशिष्ट निकालना: शिशु के शरीर से हानिकारक पदार्थ बाहर निकालना।
- हार्मोन बनाना: HCG, प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन उत्पन्न करना।
- इंफेक्शन से बचाव: हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस को रोकना।
- इम्यून सपोर्ट: माँ के शरीर से शिशु की सुरक्षा करना।
प्लेसेंटा के कितने प्रकार हैं?
- एंटीरियर प्लेसेंटा: यह बच्चेदानी की आगे की दीवार पर होता है।
- पोस्टीरियर प्लेसेंटा: यह बच्चेदानी की पीछे की दीवार पर होता है।
- फंडल प्लेसेंटा: यह बच्चेदानी के ऊपरी हिस्से में होता है।
- लो-लाइंग प्लेसेंटा: यह बच्चेदानी के निचले हिस्से में होता है।
प्लेसेंटा की सही स्थिति क्यों जरूरी है?
यह शिशु को सही मात्रा में ऑक्सीजन और पोषण देने में मदद करता है। गलत स्थिति, जैसे लो-लाइंग प्लेसेंटा, डिलीवरी को जटिल बना सकती है। प्लेसेंटा प्रीविया की स्थिति में सामान्य डिलीवरी संभव नहीं होती है। सही स्थिति न होने पर सी-सेक्शन की आवश्यकता पड़ सकती है।
प्लेसेंटा से जुड़ी समस्याएँ
- प्लेसेंटा प्रीविया: जब प्लेसेंटा बच्चेदानी के मुँह को ढक लेता है तो सामान्य डिलीवरी संभव नहीं होती है। इससे अधिक ब्लीडिंग का खतरा होता है और डिलीवरी के लिए आमतौर पर सी-सेक्शन की जरूरत पड़ती है।
- प्लेसेंटा एब्ड्रप्शन: जब प्लेसेंटा समय से पहले बच्चेदानी की दीवार से अलग हो जाता है तो शिशु को ऑक्सीजन और पोषण मिलना बंद हो सकता है। इसके कारण माँ को पेट में तेज दर्द और ब्लीडिंग हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।
- अपरिपक्व या असामान्य प्लेसेंटा: प्लेसेंटा पूरी तरह विकसित नहीं होने पर शिशु का विकास भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए समय-समय पर डॉक्टर से चेकअप कराना जरूरी होता है।
प्लेसेंटा की जाँच कैसे की जाती है?
- अल्ट्रासाउंड स्कैन: प्लेसेंटा की स्थिति और काम की जांच करता है।
- डॉप्लर स्कैन: प्लेसेंटा में रक्त प्रवाह को मापता है।
- एक्स्ट्रा टेस्ट: अगर कोई समस्या पाई जाती है, तो डॉक्टर और टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं।
प्लेसेंटा को स्वस्थ कैसे रखें?
प्लेसेंटा को स्वस्थ रखने के लिए आपको कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए, जैसे कि:
- पौष्टिक आहार लें: आयरन, फोलिक एसिड और प्रोटीन से भरपूर डाइट लें। हरी सब्जियाँ, फल और साबुत अनाज का सेवन करें।
- धूम्रपान और शराब से बचें: यह प्लेसेंटा के विकास को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इससे शिशु का वजन कम हो सकता है और अन्य समस्याएँ पैदा हो सकती हैं।
- नियमित व्यायाम करें: हल्का योग और टहलना प्लेसेंटा को स्वस्थ रख सकता है। अपनी डेली रूटीन में व्यायाम को शामिल करें।
- तनाव कम करें: अधिक तनाव प्लेसेंटा के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए तनाव को मैनेज करें।
- नियमित डॉक्टर से परामर्श लें: प्रेगनेंसी के दौरान समय-समय पर जाँच करवाएँ। किसी भी असामान्यता पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या प्लेसेंटा माँ और शिशु दोनों के लिए सुरक्षित है?
हाँ, जब तक प्लेसेंटा सही तरह से काम करता है, यह माँ और शिशु दोनों के लिए सुरक्षित होता है। हालाँकि, अगर इसमें कोई समस्या हो, तो यह खतरनाक हो सकता है।
एंटीरियर और पोस्टीरियर प्लेसेंटा में क्या अंतर है?
- एंटीरियर प्लेसेंटा: बच्चेदानी की आगे की दीवार पर होता है। इससे शिशु की हलचल महसूस करने में देर हो सकती है।
- पोस्टीरियर प्लेसेंटा: बच्चेदानी की पीछे की दीवार पर होता है। इससे शिशु की हलचल जल्दी महसूस होती है।
क्या प्लेसेंटा की स्थिति बदल सकती है?
हाँ, कई बार प्लेसेंटा गर्भावस्था के दौरान ऊपर खिसक जाता है। लेकिन अगर यह नीचे बना रहता है, तो डॉक्टर सी-सेक्शन की सलाह दे सकते हैं।
प्लेसेंटा की जाँच कितनी बार करवानी चाहिए?
डॉक्टर की सलाह के अनुसार अल्ट्रासाउंड करवाना जरूरी है। किसी भी समस्या के संकेत मिलने पर तुरंत जाँच करवाएँ। प्लेसेंटा का सही विकास और कार्य शिशु की अच्छी सेहत के लिए जरूरी है। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ और डॉक्टर से नियमित परामर्श लेते रहें।