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ब्लाइटेड ओवम (Blighted Ovum) क्या है? कारण, लक्षण और उपचार

ब्लाइटेड ओवम (Blighted Ovum) क्या है? कारण, लक्षण और उपचार

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Dr. Payal Jaiswal

MBBS, DGO, FRM

15+ Years of experience

Table of Contents

यह पता चलना कि गर्भावस्था आगे नहीं बढ़ रही है, बहुत मुश्किल होता है खासकर तब, जब आपने अभी-अभी उम्मीद करना शुरू ही किया हो। ‘ब्लाइटेड ओवम’ (Blighted Ovum) गर्भावस्था के शुरुआती दौर में होने वाले नुकसान का एक ऐसा प्रकार है जो काफी उलझन पैदा कर सकता है; क्योंकि इसमें प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव आता है और शरीर भी ऐसा ही व्यवहार करता है जैसे कि महिला गर्भवती हो, लेकिन असल में कोई बच्चा विकसित नहीं हो रहा होता। इस लेख में बताया गया है कि ऐसा क्यों होता है, इसका पता कैसे चलता है, और आगे आप क्या कदम उठा सकती हैं।

ब्लाइटेड ओवम क्या है?

ब्लाइटेड ओवम यानि अंडाणु क्षति (जिसे ‘एन एम्ब्रियोनिक प्रेगनेंसी’ भी कहा जाता है) तब होता है जब एक फर्टिलाइज्ड एग गर्भाशय में जाकर एक ‘जेस्टेशनल सैक’ (गर्भावस्था की थैली) तो बना लेता है, लेकिन भ्रूण (embryo) या तो बहुत शुरुआती चरण में ही विकसित होना बंद कर देता है या फिर कभी बनता ही नहीं है। यह थैली कुछ समय तक बढ़ती रहती है और प्लेसेंटल टिश्यू प्रेगनेंसी हार्मोन बनाते रहते हैं। यही कारण है कि होम प्रेगनेंसी टेस्ट में भी रिजल्ट पॉजिटिव आ सकता है।

आपने शायद “ब्लाइटेड ओवम मिस्ड अबॉर्शन” शब्द भी सुना हो। मेडिकल भाषा में, “मिस्ड अबॉर्शन” का सीधा सा मतलब है कि गर्भावस्था का विकास रुक गया है, लेकिन शरीर ने अभी तक इसे बाहर नहीं निकाला है। इसका मतलब जानबूझकर की गई गर्भ समाप्ति (termination) से बिल्कुल नहीं है। आजकल कई डॉक्टर “मिस्ड मिसकैरेज” या “अर्ली प्रेगनेंसी लॉस” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं, क्योंकि ये सुनने में कम तकलीफदेह लगते हैं।

ब्लाइटेड ओवम कैसे होता है?

फर्टिलाइजेशन के बाद, अंडा विभाजित होता है और गर्भाशय (uterus) में पहुँचकर उसकी परत से जुड़ जाता है। सबसे पहले वे कोशिकाएं (cells) बनती हैं, जिनसे आगे चलकर प्लेसेंटा और थैली (sac) का निर्माण होता है। ब्लाइटेड ओवम के मामले में, जिन कोशिकाओं से भ्रूण (embryo) बनना होता है, वे या तो विकसित ही नहीं हो पातीं या फिर बनने के कुछ समय बाद ही उनका विकास रुक जाता है। बाहरी संरचनाएं कुछ हफ्तों तक बनी रहती हैं, इसलिए ऐसा लगता है कि गर्भावस्था आगे बढ़ रही है, लेकिन जब कोई स्कैन होता है या हार्मोन का स्तर गिरता है, तब असल स्थिति का पता चलता है।

ऐसा आमतौर पर गर्भावस्था के पहले पांच से छह हफ्तों के भीतर हो जाता है। अक्सर तब, जब महिला को किसी को यह बताने का मौका भी नहीं मिला होता कि वह गर्भवती है।

ब्लाइटेड ओवम के लक्षण क्या हैं?

कई महिलाओं में कोई लक्षण नहीं दिखते और इसका पता केवल प्रारंभिक स्कैन में ही चलता है। लक्षण दिखने पर, इनमें शामिल हो सकते हैं:

  • हल्का रक्तस्राव या भूरा स्राव
  • पेट के निचले हिस्से में हल्का से मध्यम दर्द
  • योनि से रक्तस्राव जो धीरे-धीरे बढ़ता जाता है
  • गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों जैसे मतली या स्तन में कोमलता का कम होना
  • घर पर किया गया गर्भावस्था परीक्षण जो समय के साथ धुंधला या नकारात्मक हो जाता है

चूंकि स्वस्थ गर्भावस्था के शुरुआती दौर में भी रक्तस्राव और दर्द होते हैं, इसलिए केवल इन लक्षणों से अंडाणु क्षति की पुष्टि नहीं हो सकती। इसकी पुष्टि केवल अल्ट्रासाउंड और रक्त परीक्षण से ही हो सकती है।

ब्लाइटेड ओवम के क्या कारण होते हैं?

ब्लाइटेड ओवम के कारण अक्सर भ्रूण (embryo) की आनुवंशिक संरचना (genetic makeup) से जुड़े होते हैं, न कि माँ की किसी गतिविधि से। इसके सामान्य कारणों में शामिल हैं:

  • क्रोमोसोमल असामान्यताएं: यह इसका सबसे मुख्य कारण है। यदि अंडे या शुक्राणु (sperm) में क्रोमोसोम की संख्या गलत हो, तो भ्रूण का विकास ठीक से नहीं हो पाता। शरीर आमतौर पर इसे पहचान लेता है और गर्भावस्था को रोक देता है।
  • अंडे या शुक्राणु की खराब गुणवत्ता: निषेचन के दौरान कोशिकाओं का असामान्य विभाजन होने से एक ऐसी थैली (sac) बन सकती है जिसमें कोई विकसित होने योग्य भ्रूण नहीं होता। माँ की उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ जाता है।
  • गर्भाशय से जुड़े कारक: कुछ मामलों में फाइब्रॉएड, पॉलीप्स, स्कार टिश्यू या गर्भाशय का असामान्य आकार, भ्रूण के गर्भाशय की परत से जुड़ने (implantation) में बाधा डाल सकता है।
  • हार्मोनल या चिकित्सीय स्थितियां: थायरॉयड की समस्या (जो ठीक से नियंत्रित न हो), मधुमेह (diabetes) या अन्य मेटाबॉलिक समस्याएं भी इसका कारण बन सकती हैं।
  • संक्रमण और जीवनशैली से जुड़े कारक: कुछ तरह के संक्रमण, बहुत अधिक धूम्रपान, शराब का सेवन और पर्यावरण से जुड़े कुछ कारक शुरुआती गर्भावस्था के नुकसान (early loss) का खतरा बढ़ा सकते हैं।

यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि व्यायाम करना, काम का तनाव, मामूली रूप से गिर जाना, कोई भारी चीज़ उठाना या शारीरिक संबंध बनाने से ‘ब्लाइटेड ओवम’ नहीं होता है। जिन महिलाओं के साथ ऐसा होता है, उन्होंने आमतौर पर कुछ भी गलत नहीं किया होता है।

ब्लाइटेड ओवम और मिसकैरेज के बीच क्या अंतर है?

ब्लाइटेड ओवम एक तरह का शुरुआती मिसकैरेज है, लेकिन हर मिसकैरेज ‘ब्लाइटेड ओवम’ नहीं होता। इनके बीच का अंतर इस बात पर निर्भर करता है कि गर्भ में क्या विकसित हुआ है। एक सामान्य मिसकैरेज में, भ्रूण (embryo) बनता है और गर्भावस्था खत्म होने से पहले उसमें दिल की धड़कन भी दिख सकती है। वहीं, ‘ब्लाइटेड ओवम’ में एक थैली (sac) तो होती है, लेकिन उसके अंदर कोई भ्रूण नहीं होता।

जिन महिलाओं को ‘ब्लाइटेड ओवम’ की समस्या होती है, उन्हें लंबे समय तक गर्भवती होने का एहसास हो सकता है, क्योंकि कुछ समय तक शरीर में हार्मोन का स्तर ऊंचा बना रहता है। ऐसे मामलों में, ब्लीडिंग के बजाय अक्सर रूटीन स्कैन के दौरान ही पता चलता है कि गर्भपात हो गया है।

स्कैन में ‘ब्लाइटेड ओवम’ की पहचान कैसे की जाती है?

इसका पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट दोनों का इस्तेमाल किया जाता है। डॉक्टर इसे कन्फर्म करने से पहले बहुत सावधानी बरतते हैं, ताकि किसी स्वस्थ प्रेगनेंसी को गलती से कुछ और न समझ लिया जाए।

अल्ट्रासाउंड में क्या दिखता है?

शुरुआती जांच के लिए ‘ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड‘ (transvaginal ultrasound) सबसे स्पष्ट तस्वीर देता है। ‘ब्लाइटेड ओवम’ के मामले में, स्कैन में गर्भाशय (uterus) के अंदर एक ‘जेस्टेशनल सैक’ (gestational sac) तो दिखता है, लेकिन उसमें ‘योक सैक’ (yolk sac) या भ्रूण (embryo) नहीं होता। यह सैक असामान्य आकार का हो सकता है या अपनी सामान्य जगह से नीचे हो सकता है। डॉक्टर आमतौर पर तब इसे कन्फर्म मानते हैं जब सैक एक निश्चित आकार (लगभग 25 mm) तक बढ़ जाए, लेकिन फिर भी उसमें कोई भ्रूण न दिखे।

दोबारा अल्ट्रासाउंड कराने की जरूरत कब पड़ सकती है?

अगर सैक छोटा है या प्रेगनेंसी की तारीखें स्पष्ट नहीं हैं, तो हो सकता है कि अल्ट्रासाउंड बहुत जल्दी कर लिया गया हो। ऐसे में, लगभग एक-दो हफ्ते बाद दोबारा स्कैन कराने की सलाह दी जाती है। इस समय के अंतराल से डॉक्टर यह देख पाते हैं कि क्या सैक का आकार बढ़ा है और क्या उसमें भ्रूण दिखाई देने लगा है। इस दौरान इंतजार करना काफी मुश्किल और तनावपूर्ण हो सकता है, लेकिन ऐसा करने से गलत डायग्नोसिस (गलत पहचान) से बचा जा सकता है।

hCG टेस्ट की क्या भूमिका है?

प्रेगनेंसी टेस्ट में ‘ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन’ (hCG) नामक हार्मोन को मापा जाता है। एक स्वस्थ शुरुआती प्रेगनेंसी में, खून में इस हार्मोन का स्तर हर दो-तीन दिन में लगभग दोगुना हो जाता है। ‘ब्लाइटेड ओवम’ के मामले में, यह स्तर बहुत धीरे-धीरे बढ़ सकता है, एक जगह रुक सकता है, या फिर कम होने लग सकता है। 48 घंटे के अंतराल पर किए गए दो ब्लड टेस्ट से डॉक्टरों को यह समझने में मदद मिलती है कि हार्मोन का स्तर किस दिशा में जा रहा है। hCG के नतीजे स्कैन में दिखी बातों की पुष्टि करते हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल शायद ही कभी अकेले किया जाता है।

ब्लाइटेड ओवम के लिए उपचार के क्या विकल्प हैं?

एक बार निदान निश्चित हो जाने पर, गर्भावस्था के ऊतक को शरीर से बाहर निकलना आवश्यक होता है। सही तरीका आपकी सेहत, गर्भावस्था की अवधि, रक्तस्राव की मात्रा और आपकी अपनी पसंद पर निर्भर करता है।

प्रतीक्षा प्रबंधन

इसमें शरीर को ऊतक को प्राकृतिक रूप से बाहर निकालने की अनुमति दी जाती है। कई महिलाएं इस विकल्प को चुनती हैं, और यह अक्सर एक से तीन सप्ताह के भीतर काम करता है। इसमें रक्तस्राव और ऐंठन हो सकती है, जो कभी-कभी अधिक हो सकती है, इसलिए आपको यह जानना आवश्यक है कि सामान्य क्या है और कब सहायता लेनी चाहिए। यह उन महिलाओं के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता है जिन्हें पहले से ही अधिक रक्तस्राव की समस्या रही हो या जो प्रतीक्षा करने को लेकर चिंतित हों।

दवा

मिसोप्रोस्टोल जैसी गोलियां, जो कभी-कभी गर्भाशय को तैयार करने वाली किसी अन्य दवा के बाद ली जाती हैं, गर्भाशय ग्रीवा को नरम करने और गर्भाशय को संकुचित करने में मदद करती हैं ताकि ऊतक बाहर निकल जाए। यह आमतौर पर कुछ दिनों के भीतर काम करता है। मासिक धर्म से अधिक रक्तस्राव, ऐंठन और संभवतः मतली, दस्त या दवा से हल्का बुखार होने की संभावना रहती है। आपका डॉक्टर आमतौर पर यह सुनिश्चित करने के लिए फॉलो-अप स्कैन की योजना बनाएगा कि सब कुछ ठीक से निकल गया है।

शल्य चिकित्सा

यदि रक्तस्राव अधिक हो, संक्रमण के लक्षण हों, या अन्य विधियों से ऊतक न निकले, तो एक छोटी सी प्रक्रिया की आवश्यकता हो सकती है। सक्शन इवैक्यूएशन, या डाइलिटेशन और क्यूरेटेज (डी एंड सी), में एनेस्थीसिया देकर ऊतक को निकाला जाता है और यह प्रक्रिया आमतौर पर जल्दी पूरी हो जाती है। रिकवरी आमतौर पर तेजी से होती है, और कुछ दिनों तक हल्की ब्लीडिंग हो सकती है। दुर्लभ मामलों में संक्रमण या गर्भाशय की परत पर निशान पड़ने का खतरा होता है, इसलिए डॉक्टर से नियमित परामर्श लेना महत्वपूर्ण है।

ब्लाइटेड ओवम के बाद क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

शारीरिक और भावनात्मक, दोनों तरह की रिकवरी पर ध्यान देना ज़रूरी है।

  • दो हफ़्तों तक ब्लीडिंग हो सकती है, जो धीरे-धीरे कम होती जाएगी। टैम्पोन की जगह पैड का इस्तेमाल करें।
  • जब तक ब्लीडिंग बंद न हो जाए, तब तक शारीरिक संबंध बनाने और स्विमिंग करने से बचें (या जैसा आपके डॉक्टर सलाह दें), ताकि इन्फेक्शन का ख़तरा कम रहे।
  • जब भी हो सके आराम करें, और जैसे-जैसे आप बेहतर महसूस करें, अपनी सामान्य दिनचर्या में वापस लौटें।
  • डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयां या दर्द निवारक दवाएं बिल्कुल बताए गए तरीके से लें।
  • अगर आपका ब्लड ग्रुप Rh-नेगेटिव है, तो अपने डॉक्टर से पूछें कि क्या आपको ‘एंटी-D’ इंजेक्शन की ज़रूरत है।
  • यह पक्का करने के लिए कि गर्भाशय (uterus) पूरी तरह साफ़ हो गया है, डॉक्टर के पास फॉलो-अप के लिए ज़रूर जाएं।
  • खुद को दुख मनाने का समय दें। उदासी, अपराधबोध, गुस्सा और सुन्न महसूस करना सामान्य बातें हैं। अपने पार्टनर, किसी दोस्त या काउंसलर से बात करने से आपको मदद मिल सकती है।

ब्लाइटेड ओवम बाद दोबारा गर्भधारण करने की कोशिश कब करनी चाहिए?

शारीरिक रूप से, कई महिलाएं अपने अगले सामान्य पीरियड के तुरंत बाद फिर से गर्भधारण कर सकती हैं। कुछ डॉक्टर एक या दो रेगुलर साइकिल तक इंतजार करने की सलाह देते हैं, ताकि अगली गर्भावस्था की अवधि (dating) का पता लगाना आसान हो जाए और गर्भाशय की परत (uterine lining) ठीक से सेट हो सके। ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि कई महीनों तक इंतजार करने से परिणाम बेहतर होते हैं।

भावनात्मक रूप से तैयार होना भी उतना ही जरूरी है, जितना कि चिकित्सकीय रूप से तैयार होना। अगर आपको अभी लगता है कि आप तैयार नहीं हैं, तो यह बिल्कुल ठीक है। अपनी उम्र, स्वास्थ्य और मेडिकल हिस्ट्री के हिसाब से सही समय के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।

क्या ब्लाइटेड ओवम दोबारा हो सकता है?

एक बार ब्लाइटेड ओवम होने का मतलब यह नहीं है कि ऐसा दोबारा भी होगा। चूंकि इसका सबसे आम कारण क्रोमोसोम से जुड़ी कोई रैंडम गड़बड़ी होती है, इसलिए अगली गर्भावस्था में इसके दोबारा होने की संभावना कम होती है, और ज्यादातर महिलाओं की आगे की गर्भावस्था स्वस्थ रहती है। अगर लगातार दो या तीन बार शुरुआती गर्भावस्था में गर्भपात (early loss) हुआ है, तो डॉक्टर आमतौर पर हार्मोन प्रोफाइल, गर्भाशय की जांच, और जेनेटिक या क्लॉटिंग स्टडी जैसे टेस्ट कराने की सलाह देते हैं, ताकि किसी ऐसे कारण का पता लगाया जा सके जिसका इलाज संभव हो।

ब्लाइटेड ओवम के बाद आपको डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

अगर आपको नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो तुरंत अपने डॉक्टर को फोन करें या इमरजेंसी मेडिकल मदद लें:

  • दो घंटे तक, हर घंटे दो या उससे ज़्यादा पैड भर जाने जितना ब्लीडिंग होना
  • खून के बड़े थक्के आना, या चक्कर आना और बेहोश हो जाना
  • बुखार आना, ठंड लगना या योनि से बदबूदार डिस्चार्ज होना
  • पेट में बहुत तेज़ दर्द होना या दर्द का लगातार बढ़ना
  • दवा लेने या इंतज़ार करने का फैसला लेने के कई हफ़्तों बाद भी ब्लीडिंग न होना
  • प्रेग्नेंसी खत्म होने के कई हफ़्तों बाद भी प्रेग्नेंसी टेस्ट का पॉजिटिव आना
  • बहुत ज़्यादा उदासी या निराशा महसूस होना, जो कम न हो रही हो

निष्कर्ष

ब्लाइटेड ओवम प्रेग्नेंसी के शुरुआती दौर में होने वाला एक आम नुकसान है। ज़्यादातर मामलों में, ऐसा क्रोमोसोमल (गुणसूत्र) समस्याओं की वजह से होता है, जो किसी के भी नियंत्रण में नहीं होतीं। इसका पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है, और ज़रूरत पड़ने पर hCG ब्लड टेस्ट भी किए जा सकते हैं। चाहे आप इंतज़ार करने का फैसला करें, दवा लें या कोई छोटी मेडिकल प्रक्रिया अपनाएं, ज़्यादातर महिलाएं अच्छी तरह रिकवर हो जाती हैं और तैयार महसूस करने पर दोबारा कोशिश कर सकती हैं। खुद के प्रति नरम रहें, सवाल पूछें, और अपने डॉक्टर तथा करीबी लोगों से मदद लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. ब्लाइटेड ओवम क्या है?

यह गर्भावस्था की एक प्रारंभिक अवस्था है जिसमें गर्भाशय में एक गर्भनाल तो बन जाती है, लेकिन उसमें कोई भ्रूण विकसित नहीं होता। इसे भ्रूणरहित गर्भावस्था भी कहा जाता है।

2. स्कैन में ब्लाइटेड ओवम की पहचान कैसे होती है?

ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड में गर्भाशय में खाली गर्भनाल दिखाई देती है, जिसमें न तो जर्दी की थैली होती है और न ही भ्रूण। यदि थैली छोटी है, तो डॉक्टर पुष्टि के लिए एक या दो सप्ताह बाद स्कैन दोहराते हैं।

3. क्या ब्लाइटेड ओवम में गर्भावस्था के लक्षण होते हैं?

हाँ, शुरुआत में। हार्मोन का स्तर कुछ समय तक अधिक रहता है, इसलिए मतली और स्तन में दर्द हो सकते हैं। ये लक्षण आमतौर पर धीरे-धीरे कम हो जाते हैं, और इसके बाद हल्की ब्लीडिंग या ऐंठन हो सकती है।

4. ब्लाइटेड ओवम के मुख्य कारण क्या हैं?

भ्रूण में गुणसूत्र संबंधी असामान्यताएं इसका प्रमुख कारण हैं। अंडे या शुक्राणु की गुणवत्ता, गर्भाशय की समस्याएं, हार्मोनल स्थितियां और कुछ संक्रमण भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं।

5. क्या ब्लाइटेड ओवम अपने आप ठीक हो सकता है?

हाँ। कई महिलाओं में यह ऊतक कुछ हफ्तों में प्राकृतिक रूप से निकल जाता है। आपके डॉक्टर यह सुनिश्चित करने के लिए आपकी निगरानी करेंगे कि सब कुछ ठीक हो गया है।

6. ब्लाइटेड ओवम का इलाज कैसे किया जाता है?

विकल्पों में प्राकृतिक रूप से निकलने का इंतजार करना, गर्भाशय को खाली करने में मदद करने के लिए दवा लेना या एक छोटी सर्जरी शामिल हैं। चुनाव आपके स्वास्थ्य, लक्षणों और पसंद पर निर्भर करता है।

7. क्या ब्लाइटेड ओवम को गर्भपात माना जाता है?

हाँ, यह प्रारंभिक गर्भपात का एक रूप है। अंतर यह है कि थैली के भीतर कोई भ्रूण विकसित नहीं हुआ।

8. ब्लाइटेड ओवम के बाद दोबारा गर्भधारण कब किया जा सकता है?

अक्सर एक या दो सामान्य मासिक धर्म के बाद, जब रक्तस्राव बंद हो जाए और आप भावनात्मक रूप से तैयार महसूस करें। आपके डॉक्टर समय के बारे में सलाह दे सकते हैं।

9. क्या ब्लाइटेड ओवम दोबारा हो सकता है?

इसकी संभावना कम है। अधिकांश ब्लाइटेड ओवम एक बार होने वाली घटना है जो यादृच्छिक गुणसूत्र संबंधी त्रुटियों के कारण होती है। बार-बार गर्भपात होने पर जांच करानी चाहिए।

10. क्या अंडाणु क्षति के बाद स्वस्थ गर्भावस्था संभव है?

हाँ। अंडाणु क्षति से पीड़ित अधिकांश महिलाएं स्वस्थ गर्भावस्था और शिशु को जन्म देती हैं।

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