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योनि से चिपचिपा स्राव क्यों होता है (Sticky Vaginal Discharge in Hindi)

योनि से चिपचिपा स्राव क्यों होता है (Sticky Vaginal Discharge in Hindi)

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Dr. Aashita Jain

MBBS, Diploma in Gynaecology & Obstetrics, Diploma in IVF & Reproductive Medicine

12+ Years of experience

Table of Contents

स्टिकी वेजाइनल डिस्चार्ज यानी योनि से चिपचिपा स्राव होना एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। यह प्रजनन से संबंधित स्वास्थ्य के साथ-साथ महिला के संपूर्ण स्वास्थ्य को भी समझने-परखने का एक अहम संकेतक है। हालांकि, अक्सर इसे नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, लेकिन अगर योनि से चिपचपा पदार्थ आता है, तो घबराएं नहीं, पर इस पर नज़र ज़रूर रखें। इसके अलग-अलग रूपों को समझने से आपको कई ज़रूरी जानकारी मिल पाएगी और आप जान पाएंगी कि हार्मोन में होने वाले बदलाव, प्रजनन क्षमता और किसी संभावित स्वास्थ्य समस्याओं के साथ इसका क्या संबंध है।

जानकारी के अभाव में योनि से चिपचिपा स्राव के कारण कई महिलाएं चिंता में पड़ जाती हैं। कई बार यह चिंता वाज़िब हो सकती है, लेकिन हर मामले में परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। इसलिए, इस लेख में बताया गया है कि क्या यह एक सामान्य घटना है? इसके क्या कारण हैं? क्या इसका इलाज किया जाना चाहिए? साथ ही हम जानेंगे कि योनि से पानी कब आता हैऔर इसकी वैज्ञानिक व्याख्या क्या है।

वेजाइनल डिस्चार्ज क्या है?

वेजाइनल डिस्चार्ज (Vaginal Discharge) योनि से निकलने वाला एक प्राकृतिक तरल पदार्थ है, जो मुख्य रूप से योनि और गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) से बनता है। यह आमतौर पर पारदर्शी, सफेद या हल्के दूधिया रंग का हो सकता है। वेजाइनल डिस्चार्ज योनि को साफ और स्वस्थ रखने तथा संक्रमण से बचाव में मदद करता है। इसकी मात्रा, रंग और बनावट मासिक धर्म चक्र के अलग-अलग चरणों में हार्मोनल बदलावों के कारण बदल सकती है।

आमतौर पर हल्का सफेद या पारदर्शी डिस्चार्ज, जिसमें तेज़ या अप्रिय गंध न हो और जिसके साथ खुजली, जलन या दर्द जैसे लक्षण न हों, सामान्य माना जाता है। हालांकि, डिस्चार्ज के रंग, गंध, मात्रा या बनावट में अचानक बदलाव के साथ अन्य लक्षण दिखाई दें, तो यह संक्रमण या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है और ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।

नॉर्मल वेजाइनल डिस्चार्ज कैसा होता है?

नॉर्मल वेजाइनल डिस्चार्ज आमतौर पर पारदर्शी, सफेद या हल्के दूधिया रंग का होता है। इसकी बनावट कभी पतली और पानी जैसी, तो कभी थोड़ी गाढ़ी, क्रीमी या चिपचिपी हो सकती है। मासिक धर्म चक्र के दौरान हार्मोनल बदलावों के कारण इसकी मात्रा और बनावट में बदलाव होना सामान्य है। उदाहरण के लिए, ओव्यूलेशन के आसपास डिस्चार्ज अधिक साफ, गीला या खिंचने वाला हो सकता है।

आमतौर पर सामान्य डिस्चार्ज में तेज़ या अप्रिय गंध नहीं होती और इसके साथ खुजली, जलन, सूजन या दर्द जैसे लक्षण नहीं होते। हालांकि, हर व्यक्ति में डिस्चार्ज की मात्रा और बनावट अलग हो सकती है। अगर डिस्चार्ज में अचानक बदलाव आए या उसके साथ तेज़ गंध, असामान्य रंग, खुजली, जलन या दर्द हो, तो इसके कारण का पता लगाने के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

योनि स्राव के प्रकार और कारण क्या है?

वेजाइनल डिसचार्ज बनावट, रंग और मात्रा में अलग-अलग हो सकता है। हर प्रकार आमतौर पर महिला के प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में कुछ खास संकेत देता है।

1. सामान्य योनि स्राव

इसमें शामिल हैं:

  • साफ़, सफ़ेद, या हल्का दूधिया स्राव
  • हल्की या कोई गंध नहीं
  • चिपचिपी, मलाईदार (Creamy), या थोड़ी खिंचने वाली बनावट

इसके सामान्य कारण:

  • हार्मोनल बदलाव
  • ओव्यूलेशन चक्र
  • यौन उत्तेजना

चिपचिपा स्राव

चिपचिपा स्राव अक्सर निम्न स्थितियों में दिखाई देता है:

  • ओव्यूलेशन से पहले या बाद में
  • मासिक धर्म चक्र के शुरुआती या बाद के चरण में

यह क्यों होता है:

  • हार्मोनल उतार-चढ़ाव (विशेषकर एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन)
  • प्राकृतिक चिकनाई प्रक्रिया

यह प्रकार आमतौर पर हानिरहित होता है, जब तक कि इसके साथ कोई असामान्य लक्षण न हों।

2. गाढ़ा सफ़ेद स्राव (यीस्ट इन्फेक्शन)

  • पनीर जैसी बनावट
  • खुजली या जलन

इसके संभावित कारण:

  • फंगल इन्फेक्शन (कैंडिडा)

पीला या हरा स्राव

  • गाढ़ा या झागदार हो सकता है
  • अक्सर इसमें दुर्गंध होती है

इसके संभावित कारण:

  • यौन संचारित संक्रमण (STIs)
  • बैक्टीरियल संक्रमण

3. दुर्गंधयुक्त योनि स्राव

यदि स्राव में तेज़, अप्रिय गंध है, तो यह संकेत हो सकता है:

  • बैक्टीरियल वैजिनोसिस
  • साफ़-सफ़ाई की कमी
  • संक्रमण

4. खूनी या भूरा स्राव

  • मासिक धर्म के दौरान या बाद में होता है
  • कभी-कभी चक्रों के बीच भी देखा जाता है

इसके संभावित कारण:

  • हार्मोनल असंतुलन
  • शुरुआती गर्भावस्था में हल्की ब्लीडिंग (स्पॉटिंग)
  • दुर्लभ मामलों में, कोई अंतर्निहित चिकित्सीय स्थिति

स्टिकी वेजाइनल डिस्चार्ज क्या है?

चिपचिपा योनि स्राव असल में योनि की दीवारों और गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) से निकलने वाला गाढ़ा, चिपचिपा तरल होता है। यह मुख्य रूप से गर्भाशय ग्रीवा के बलगम (म्यूकस), पानी, प्रोटीन, कोशिकाओं और लाभकारी बैक्टीरिया से बना होता है, जो योनि के स्वास्थ्य और पीएच संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। इसकी बनावट, रंग और मात्रा कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें हार्मोन में होने वाले बदलाव, पीरियड्स के चरण के साथ-साथ कई और बाहरी चीज़ें शामिल हैं।

योनि से होने वाले स्राव की अहमियत

योनि से होने वाला स्राव एक तरह का प्राकृतिक रक्षा तंत्र है जो:

  1. मृत कोशिकाओं और बैक्टीरिया को हटाकर योनि को साफ़ करता है।
  2. संक्रमण को रोकने के लिए अम्लीय पीएच बनाए रखता है।
  3. प्रजनन प्रक्रिया में सहायक होता है, खासकर प्रजनन के दौरान शुक्राणु की गति को आसान बनाता है।

अमेरिकन कॉलेज ऑफ़ ओब्स्टेट्रिशियन्स एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स (ACOG) के मुताबिक़, जब तक खुजली, गंध या असुविधा जैसे लक्षण न हों, स्राव में होने वाले बदलाव को सामान्य माना जाता है।

योनि से चिपचिपा स्राव के कारण

वेजाइनल डिसचार्ज को समझना मुश्किल हो सकता है, ख़ासकर अगर यह अचानक से बदल जाए। योनि से होने वाले चिपचिपे स्राव की वजह अलग-अलग हो सकती है। इसके पीछे शारीरिक, जीवनशैली से जुड़े या पैथोलॉजिकल (रोग से जुड़े) कारण हो सकते हैं।

1. हार्मोनल बदलाव

एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन की वजह से योनि से होने वाले स्राव के रंग-रूप पर काफ़ी ज़्यादा असर पड़ सकता है।

  • एस्ट्रोजन का उच्च स्तर: ओव्यूलेशन (डिंबोत्सर्जन) के दौरान गर्भाशय ग्रीवा का म्यूकस अधिक चिपचिपा और लचीला हो जाता है।
  • प्रोजेस्टेरोन का उच्च स्तर: मासिक धर्म यानी पीरियड से पहले स्राव ज़्यादा गाढ़ा और चिपचिपा हो जाता है।

2. प्रेगनेंसी

प्रेगनेंसी के शुरुआती दौर में गर्भाशय ग्रीवा के बलगम का उत्पादन बढ़ जाता है, ताकि एक तरह का सुरक्षात्मक प्लग बनाया जा सके।

3. पीरियड

पीरियड के अलग-अलग चरणों, यानी फ़ॉलिक्यूलर से लेकर ल्यूटियल तक, स्राव की बनावट और मात्रा में बदलाव आ सकता है।

4. तनाव और जीवनशैली

लंबे समय तक तनाव और अन्य जीवनशैली से जुड़े कारकों का शरीर पर असर पड़ सकता है, जिससे स्राव में बदलाव महसूस हो सकता है।

5. अन्य स्थितियां

बैक्टीरियल वेजिनोसिस, यीस्ट संक्रमण या यौन संचारित संक्रमण (STIs) जैसी स्थितियों के दौरान असामान्य चिपचिपा स्राव निकल सकता है।

ओव्यूलेशन के दौरान योनि से चिपचिपा स्राव

ओव्यूलेशन के दौरान, एस्ट्रोजन के स्तर में वृद्धि के कारण योनि स्राव (vaginal discharge) में बदलाव आता है। यह हार्मोन गर्भाशय ग्रीवा (cervix) को अधिक बलगम बनाने का संकेत देता है, जो निषेचन के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाने में मदद करता है। इसके परिणामस्वरूप, स्राव चक्र के अन्य चरणों की तुलना में अधिक स्पष्ट और बनावट में अलग हो जाता है।

ओव्यूलेशन स्राव की सामान्य विशेषताओं में शामिल हैं:

  • रंग में साफ या पारदर्शी
  • फिसलन भरा और खिंचने वाला (कच्चे अंडे की सफेदी जैसा)
  • मात्रा में अधिक
  • चिपचिपा या सूखा होने के बजाय चिकना

इस प्रकार का स्राव शुक्राणु को प्रजनन मार्ग से आसानी से आगे बढ़ने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है।

ओव्यूलेशन से पहले और बाद में, स्राव की बनावट वैसी नहीं हो सकती है। यह अक्सर थोड़ा चिपचिपा या मलाईदार दिखाई देता है, जो पूरी तरह से सामान्य भी है। ये बदलाव शरीर के प्राकृतिक चक्र का हिस्सा हैं और आपको अपनी प्रजनन अवधि (fertile window) पर नज़र रखने में मदद कर सकते हैं।

हालाँकि, असामान्य संकेतों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। यदि आप निम्नलिखित बातें नोटिस करते हैं, तो आपको डॉक्टर से परामर्श करने पर विचार करना चाहिए:

  • तेज या अप्रिय गंध
  • पीला, हरा, या भूरा रंग
  • खुजली, जलन, या बेचैनी

ऐसे लक्षण असामान्य योनि स्राव या किसी संक्रमण का संकेत हो सकते हैं, जिसके लिए चिकित्सकीय ध्यान की आवश्यकता होती है।

वैज्ञानिक क्या कहते हैं

जर्नल फ़र्टिलिटी एंड स्टेरिलिटी (2016) में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि गर्भाशय ग्रीवा के म्यूकस पैटर्न पर नज़र रखने से ओव्यूलेशन और प्रजनन क्षमता का पता लगाना आसान हो सकता है।

अध्ययन में पाया गया कि:

  • प्रजनन के लिए उपयुक्त म्यूकस का संबंध ज़्यादा एस्ट्राडियोल (एस्ट्रोजन हार्मोन) से होता है।
  • जो महिलाएं गर्भाशय ग्रीवा के म्यूकस पर नज़र रखती हैं, वे अपनी फ़र्टिलिटी की अवधि को पहचान सकती हैं।

ओव्यूलेशन स्राव की पहचान

  • रंग: साफ़ या हल्का सफ़ेद
  • बनावट: चिपचिपा
  • मात्रा: अक्सर ज़्यादा

पीरियड्स के पहले योनि से चिपचिपा स्राव

पीरियड्स के दौरान योनि से होने वाले स्राव की रंगत और बनावट अलग नज़र आ सकती है। पीरियड्स के अलग-अलग चरण के दौरान हार्मोन में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर वेजाइनल डिसचार्ज पर भी पड़ता है। पीरियड्स से ठीक पहले के समय को ल्यूटियल कहा जाता है। इस दौरान चिपचिपा स्राव आम तौर पर प्रोजेस्टेरोन के बढ़ने की वजह से होता है।

माहवारी से पहले सामान्य और असामान्य स्राव

  • सामान्य: गाढ़ा, गोंद जैसा और हल्का सफ़ेद या क्रीम रंग का।
  • असामान्य: खुजली, तेज गंध या असामान्य रंग (जैसे हरा या भूरा) के साथ।

माहवारी से पहले चिपचिपा स्राव तब तक सामान्य हो सकता है, जब तक इसके साथ जलन, दर्द या अन्य असामान्य लक्षण न दिखें। अगर स्राव असामान्य है और लगातार बना हुआ है, तो डॉक्टर से संपर्क करें।

प्रेग्नेंसी के दौरान योनि से चिपचिपा स्राव

प्रेग्नेंसी के दौरान काफ़ी हार्मोनल बदलाव होते हैं और इस वजह से योनि के स्राव की मात्रा और गाढ़ापन में बदलाव आता है। आम तौर पर इसमें बढ़ोतरी होती है। इस समय चिपचिपा स्राव आमतौर पर शरीर में होने वाले प्राकृतिक बदलावों का हिस्सा हो सकता है।

प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले स्राव की विशेषताएं

  • रंग: साफ़, सफ़ेद या हल्का पीला
  • बनावट: गाढ़ा और चिपचिपा
  • मात्रा: एस्ट्रोजन और रक्त प्रवाह में वृद्धि के कारण संभावित बढ़ोतरी

प्रेग्नेंसी के दौरान डिस्चार्ज में बढ़ोतरी कई महिलाओं में सामान्य होती है। इसे अक्सर ल्यूकोरिया कहा जाता है।

हालांकि, अगर स्राव के साथ ख़ून, दुर्गंध या हरे रंग का टिंट हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

प्रेग्नेंसी से वेजाइनल डिस्चार्ज पर क्या असर पड़ता है?

प्रेग्नेंसी के दौरान, कई महिलाओं को वेजाइनल डिस्चार्ज में बढ़ोतरी महसूस होती है और ज़्यादातर मामलों में यह सामान्य होता है। ये बदलाव मुख्य रूप से एस्ट्रोजन के बढ़ते लेवल और पेल्विक एरिया में खून के बहाव में बढ़ोतरी के कारण होते हैं।

प्रेग्नेंसी के दौरान डिस्चार्ज में होने वाले आम बदलावों में निम्न शामिल हैं:

  • पतला, दूधिया-सफेद डिस्चार्ज
  • हल्की या लगभग न के बराबर गंध
  • सामान्य से ज़्यादा मात्रा
  • चिकना और थोड़ा चिपचिपा टेक्सचर

जैसे-जैसे प्रेग्नेंसी आगे बढ़ती है, डिस्चार्ज की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ सकती है। जब तक कोई असामान्य लक्षण न हों, तब तक यह आम तौर पर सामान्य होता है।

हालांकि, अगर आपको निम्न लक्षण दिखाई दें तो आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए:

  • तेज़, बदबूदार गंध
  • पीला, हरा या भूरा डिस्चार्ज
  • गाढ़ा, पनीर जैसा टेक्सचर
  • खुजली, जलन या बेचैनी

योनि से चिपचिपा स्राव के दूसरे कारण

चिपचिपे योनि स्राव के कई अन्य कारण हैं। इनमें से कुछ मुख्य वजहों के बारे में यहां बताया गया है:

1. संक्रमण

  • यीस्ट संक्रमण: कैंडिडा के अधिक बढ़ने से गाढ़ा और सफ़ेद स्राव हो सकता है।
  • बैक्टीरियल वेजिनोसिस: मछली जैसी गंध के साथ पतला, चिपचिपा स्राव हो सकता है।
  • STI: जैसे गोनोरिया या क्लैमाइडिया, असामान्य पीले या हरे स्राव का कारण बन सकते हैं।

2. दवाएं

एंटीबायोटिक्स और हार्मोनल उपचार जैसी कुछ दवाएं योनि के माइक्रोबायोम को प्रभावित कर सकती हैं और इस वजह से स्राव की बनावट बदल सकती है।

3. आहार और हाइड्रेशन

पर्याप्त पानी और संतुलित आहार शरीर के सामान्य स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं। हालांकि, केवल आहार के आधार पर असामान्य वेजाइनल डिस्चार्ज का इलाज नहीं किया जा सकता।

4. मेनोपॉज़

मेनोपॉज़ के दौरान एस्ट्रोजन की घटी मात्रा की वजह से योनि में सूखापन और डिस्चार्ज में बदलाव हो सकता है।

वेजाइनल डिस्चार्ज की जांच कैसे की जाती है?

अगर आपको कोई असामान्य बदलाव नज़र आता है, तो मेडिकल जांच से इसका कारण पता लगाने में मदद मिल सकती है। जांच के आम तरीकों में निम्न शामिल हैं:

  • शारीरिक जांच: डॉक्टर जलन, लालिमा या इन्फेक्शन के लक्षणों की जांच करते हैं।
  • सैंपल की जांच: डिस्चार्ज का एक छोटा सा सैंपल लिया जाता है और इसकी माइक्रोस्कोप के नीचे जांच की जा सकती है।
  • pH जांच: योनि के pH में बदलाव का पता लगाने में मदद करती है।
  • लैब टेस्ट: यीस्ट या STI जैसे इन्फेक्शन की पहचान करने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

निम्न स्थितियों में जांच करवाना उचित है:

  • लगातार बदबूदार वेजाइनल डिस्चार्ज होने पर
  • खुजली, जलन या दर्द होने पर
  • असामान्य रंग (हरा, पीला, भूरा) होने पर

वेजाइनल डिस्चार्ज का इलाज कैसे किया जाता है?

वेजाइनल डिस्चार्ज का इलाज उसके कारण पर निर्भर करता है। अगर डिस्चार्ज सामान्य है और इसके साथ खुजली, जलन, दर्द या तेज़ गंध जैसे लक्षण नहीं हैं, तो आमतौर पर किसी विशेष इलाज की जरूरत नहीं होती।

अगर असामान्य डिस्चार्ज किसी संक्रमण के कारण हो, तो डॉक्टर जांच के बाद उचित उपचार की सलाह दे सकते हैं। यीस्ट इंफेक्शन में एंटीफंगल दवाएं, जबकि कुछ बैक्टीरियल इंफेक्शन में एंटीबायोटिक्स दिए जा सकते हैं। अगर डिस्चार्ज किसी यौन संचारित संक्रमण (STI) से जुड़ा है, तो संक्रमण के अनुसार विशेष उपचार की जरूरत हो सकती है।

इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या एंटीफंगल दवा लेने से बचना चाहिए।

आपको डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

आम तौर पर योनि स्राव सामान्य होता है, लेकिन कुछ ख़ास स्थितियों में असामान्य बदलाव देखे जाने पर इसे गंभीरता से लेना ज़रूरी है।

किसे चेतावनी समझें?

  • असामान्य रंग: हरा, ग्रे या कोई अन्य असामान्य रंग
  • तेज़ गंध: लगातार तेज़ या मछली जैसी गंध
  • साथ में अन्य लक्षण: जलन, खुजली या पेल्विक में दर्द
  • गाढ़ापन में बदलाव: मोटा, गांठदार डिस्चार्ज, जिसमें तकलीफ़ हो
  • सूजन: दर्द के साथ योनि में सूजन
  • असामान्य रक्तस्राव: पीरियड के अलावा रक्तस्राव

कोई भी असामान्य लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

योनि के स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखने के आसान नुस्खे

  • स्वच्छता बनाए रखें: बाहरी हिस्से को पानी से साफ रखें।
  • ढीले कपड़े पहनें: सूती अंडरवियर चुनें।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
  • केमिकल से बचें: योनि के आस-पास परफ़्यूम, सुगंधित साबुन, स्प्रे या अन्य सुगंध वाले प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से परहेज करें।
  • डौचिंग से बचें: इससे योनि के प्राकृतिक बैक्टीरियल संतुलन पर असर पड़ सकता है।
  • सुरक्षित यौन संबंध बनाएँ।

योनि खुद-ब-खुद साफ होती रहती है। अत्यधिक सफाई या तेज़ केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से जलन और असामान्य लक्षण हो सकते हैं।

स्टिकी वेजाइनल डिस्चार्ज से जुड़े मिथ्स और फ़ैक्ट्स

मिथ्स

फ़ैक्ट्स

स्टिकी डिस्चार्ज हमेशा संक्रमण का संकेत है। स्टिकी डिस्चार्ज अक्सर हार्मोनल बदलावों की वजह से होने वाली एक सामान्य प्रक्रिया हो सकता है।
योनि से होने वाले स्राव में कोई गंध नहीं होनी चाहिए। हल्की गंध सामान्य हो सकती है। तेज़ या मछली जैसी गंध समस्या का संकेत हो सकती है।
हर तरह के स्राव का इलाज ज़रूरी है। सामान्य स्राव के लिए इलाज ज़रूरी नहीं होता।

क्या डाइट का वेजाइनल हेल्थ पर असर पड़ता है?

संतुलित आहार और पर्याप्त पानी शरीर के सामान्य स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। प्रोबायोटिक युक्त खाद्य पदार्थ जैसे दही, फल, सब्ज़ियां और पर्याप्त पानी स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा हो सकते हैं।

हालांकि, असामान्य वेजाइनल डिस्चार्ज या संक्रमण का इलाज केवल डाइट से नहीं किया जा सकता। ऐसे लक्षण होने पर उचित चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

निष्कर्ष

योनि से चिपचिपा स्राव आना कई बार सामान्य शारीरिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है और यह मासिक धर्म चक्र, ओव्यूलेशन, हार्मोनल बदलाव या प्रेग्नेंसी जैसे कारणों से बदल सकता है। हालांकि, अगर डिस्चार्ज के रंग, गंध, मात्रा या बनावट में अचानक बदलाव आए या इसके साथ खुजली, जलन, दर्द या असामान्य रक्तस्राव हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

अपनी शारीरिक प्रक्रियाओं को समझकर और असामान्य बदलावों पर ध्यान देकर आप अपने योनि स्वास्थ्य के प्रति बेहतर जागरूक रह सकती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या चिपचिपा स्राव अलग-अलग महिलाओं में अलग-अलग तरह का हो सकता है?

हां, स्राव के पैटर्न उम्र, हार्मोन के स्तर और किसी व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं।

क्या चिपचिपा स्राव का संबंध हमेशा पीरियड से होता है?

नहीं, प्रेगनेंसी, ओव्यूलेशन, हार्मोनल बदलाव, संक्रमण या अन्य कारणों से भी स्राव में बदलाव हो सकता है।

क्या खान-पान का असर योनि के स्वास्थ्य पर पड़ता है?

संतुलित आहार और पर्याप्त पानी सामान्य स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, असामान्य वेजाइनल डिस्चार्ज का इलाज केवल खान-पान से नहीं किया जा सकता।

क्या वेजाइनल डिस्चार्ज सिर्फ़ पीरियड्स से जुड़ा होता है?

नहीं, वेजाइनल डिस्चार्ज पूरे मेंस्ट्रुअल साइकिल के दौरान हो सकता है। यह ओव्यूलेशन, हार्मोनल बदलाव, प्रेग्नेंसी और अन्य कारणों से भी प्रभावित हो सकता है।

क्या प्रेग्नेंसी के दौरान वेजाइनल डिस्चार्ज का बढ़ना नॉर्मल है?

हाँ, प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल बदलावों की वजह से डिस्चार्ज बढ़ना आम बात है। हालांकि, अगर इसके साथ तेज़ गंध, असामान्य रंग, खुजली, जलन या दर्द हो, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

डिस्चार्ज का कौन सा रंग होने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

अगर डिस्चार्ज हरा, पीला या ग्रे हो, या पीरियड के अलावा खूनी डिस्चार्ज हो और इसके साथ अन्य लक्षण भी हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

क्या ओव्यूलेशन के दौरान डिस्चार्ज का बढ़ना नॉर्मल है?

हाँ, ओव्यूलेशन के दौरान डिस्चार्ज बढ़ सकता है और यह अधिक साफ, चिकना तथा खिंचने वाला हो सकता है। यह मासिक धर्म चक्र में होने वाले सामान्य बदलावों का हिस्सा है।

क्या बर्थ कंट्रोल की वजह से वेजाइनल डिस्चार्ज में बदलाव आता है?

हाँ, हार्मोनल बर्थ कंट्रोल की वजह से हार्मोन के स्तर में बदलाव हो सकता है, जिससे डिस्चार्ज की बनावट और मात्रा बदल सकती है।

मेनोपॉज़ वेजाइनल डिस्चार्ज पर कैसे असर डालता है?

मेनोपॉज़ के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से योनि में सूखापन और डिस्चार्ज में बदलाव हो सकता है।

क्या कुछ दवाइयों की वजह से डिस्चार्ज में बदलाव आ सकता है?

हाँ, कुछ दवाइयां, विशेष रूप से एंटीबायोटिक्स और हार्मोनल दवाएं, योनि के माइक्रोबायोम या हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे डिस्चार्ज में बदलाव आ सकता है।

वेजाइनल डिस्चार्ज कब किसी इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है?

अगर डिस्चार्ज के साथ तेज़ गंध, खुजली या जलन, पेशाब करते समय या सेक्स के दौरान दर्द, पेल्विक दर्द या असामान्य रंग और बनावट जैसे लक्षण हों, तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है और डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।

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