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8 Month Pregnancy in Hindi – प्रेगनेंसी का आठवां महीना: लक्षण, शिशु का विकास और ज़रूरी सावधानियां

8 Month Pregnancy in Hindi – प्रेगनेंसी का आठवां महीना: लक्षण, शिशु का विकास और ज़रूरी सावधानियां

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Dr. Rakhi Goyal

MBBS, MD (Obstetrics and Gynaecology)

23+ Years of experience

Table of Contents

गर्भावस्था के 8 महीने पूरे होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब आप तीसरी तिमाही के बीच में होती हैं (आम तौर पर यह समय 32 से 35 सप्ताह के आसपास होता है) और आपका शिशु तेज़ी से बढ़ने, वजन बढ़ाने और जन्म के लिए सही स्थिति में आने पर ध्यान दे रहा होता है। यह महीना रोमांचक भी लग सकता है और थोड़ा असहज भी: शरीर पर वजन बढ़ता है, नींद लेना मुश्किल हो सकता है, और आपको शिशु की हलचल पहले से अधिक स्पष्ट और नियमित महसूस हो सकती है।

इस ब्लॉग में आप जानेंगी कि शिशु के विकास में क्या बदलाव हो रहे हैं, कौन-से लक्षण सामान्य हैं (और किन पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह ज़रूरी है), इस महीने कौन-से चेक-अप सुझाए जा सकते हैं, और कौन-सी व्यावहारिक सावधानियाँ आपको स्वस्थ और तैयार रखने में मदद करती हैं।

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8 महीने में शिशु की हलचल: क्या उम्मीद करें

आठवें महीने तक शिशु की किक्स (baby kicks), रोल और स्ट्रेच अक्सर अधिक तेज़ महसूस होते हैं, क्योंकि शिशु की मांसपेशियाँ मजबूत हो जाती हैं और गर्भ में जगह अपेक्षाकृत कम रह जाती है। कई लोगों को दिन का एक अनुमानित पैटर्न दिखता है, जैसे भोजन के बाद या शाम के समय अधिक गतिविधि। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप दूसरों से तुलना न करें, बल्कि अपने शिशु के सामान्य पैटर्न को समझें और किसी भी बदलाव पर ध्यान दें।

अगर आपको लगे कि 8 महीने में शिशु की हलचल स्पष्ट रूप से कम हो गई है, अचानक बदल गई है या बिल्कुल महसूस नहीं हो रही है, तो तुरंत अपनी मैटरनिटी यूनिट या डॉक्टर/हेल्थकेयर प्रोवाइडर से संपर्क करें, अगले दिन तक इंतज़ार न करें। कभी-कभी कम हलचल इस बात का संकेत हो सकती है कि शिशु को जाँच की आवश्यकता है, इसलिए समय पर सलाह लेना बेहतर रहता है।

शिशु की हलचल पर नज़र रखने का एक आम तरीका फीटल मूवमेंट काउंट (जिसे अक्सर किक काउंट कहा जाता है) है। एक सरल विधि यह है कि शिशु के सामान्य रूप से सक्रिय रहने वाले समय में यह ट्रैक करें कि आपको 10 हलचलें (किक, रोल, हल्का धक्का/स्विश) महसूस होने में कितना समय लगता है। यदि आपके शिशु के लिए हलचलें सामान्य से काफी कम हों, या आपको किसी भी समय चिंता महसूस हो, तो सलाह के लिए अपने डॉक्टर/हेल्थकेयर प्रोवाइडर से संपर्क करें।

आठवें महीने में भ्रूण का विकास

32 से 35 सप्ताह के बीच शिशु का वजन तेज़ी से बढ़ता है। इस चरण में कई अंग अपनी अंतिम परिपक्वता की ओर बढ़ रहे होते हैं और शरीर में फैट स्टोर्स बढ़ते हैं, जो जन्म के बाद तापमान नियंत्रित करने में मदद करते हैं। मस्तिष्क का विकास भी तेजी से जारी रहता है और शिशु का नर्वस सिस्टम अधिक समन्वित होता जाता है।

आपको गर्भावस्था के 8 महीने में शिशु के वजन को लेकर जिज्ञासा हो सकती है। हालांकि सटीक आंकड़े जीन, पोषण और गर्भावस्था के समग्र स्वास्थ्य के अनुसार बदलते हैं, फिर भी इस महीने अधिकांश शिशु धीरे-धीरे और नियमित रूप से वजन बढ़ाते हैं। आपके लिए सबसे भरोसेमंद जानकारी आपके अल्ट्रासाउंड माप और डॉक्टर द्वारा किया गया आकलन होता है। यदि डॉक्टर शिशु की ग्रोथ पर अधिक नज़र रख रहे हों, तो वे अतिरिक्त स्कैन या कुछ टेस्ट की सलाह दे सकते हैं, खासकर तब, जब ग्रोथ रेस्ट्रिक्शन या अन्य जोखिम कारक मौजूद हों।

आठवें महीने में शिशु के फेफड़ों का विकास अभी भी जारी रहता है। इसी कारण हेल्थकेयर टीम समय से पहले प्रसव (प्रीटर्म लेबर) के संकेतों को गंभीरता से लेती है। साथ ही, जैसे-जैसे आप 36 सप्ताह के करीब पहुँचती हैं, कई शिशु सिर-नीचे (हेड-डाउन) स्थिति में आने लगते हैं, हालाँकि कुछ शिशु बाद में भी घूम सकते हैं।

आठवें महीने में आपके शरीर में होने वाले बदलाव

गर्भावस्था के 8 महीने में आपका गर्भाशय बड़ा होकर पेट के ऊपरी हिस्से तक आ जाता है, जिससे आसपास के अंगों पर दबाव पड़ सकता है। कई लोगों को बार-बार पेशाब आना, सांस फूलना, और पसलियों के नीचे असहजता महसूस होती है क्योंकि शिशु अधिक जगह घेरता है। आरामदायक नींद की पोज़िशन ढूँढना भी मुश्किल हो सकता है, और शरीर पर बढ़े हुए वजन व बाधित नींद के कारण थकान अधिक महसूस हो सकती है।

  • शरीर के गुरुत्व-केंद्र में बदलाव के कारण पोस्चर में परिवर्तन और पीठ दर्द
  • पैरों/टखनों में सूजन (हल्की सूजन सामान्य हो सकती है, लेकिन अचानक या बहुत अधिक सूजन पर चिकित्सकीय सलाह लें)
  • पेट ऊपर की ओर दबने से एसिडिटी/हार्टबर्न या रिफ्लक्स
  • शिशु के बढ़ने से पेल्विक प्रेशर और भारीपन
  • हार्मोन, असहजता और आने वाले बदलावों की वजह से मूड में उतार-चढ़ाव

आठवें महीने के सामान्य लक्षण

आठवें महीने में शारीरिक दबाव और नई अनुभूतियाँ दोनों हो सकती हैं। सामान्य लक्षणों में ब्रैक्‍स्टन हिक्स (प्रैक्टिस) संकुचन, सांस फूलना, कब्ज, बवासीर, पैरों में ऐंठन और नींद में परेशानी शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, योनि स्राव बढ़ना और कभी-कभी कोलोस्ट्रम (दूध जैसा शुरुआती तरल) का हल्का रिसाव भी हो सकता है, क्योंकि स्तन फीडिंग के लिए तैयार होने लगते हैं।

  • सांस फूलना: सीधा बैठें, तकियों का सहारा लेकर सोएँ, और चलते समय या सीढ़ियाँ चढ़ते समय बीच-बीच में आराम करें। बाद में गर्भ में शिशु के नीचे ‘सेटल’ होने पर यह कुछ हद तक बेहतर हो सकता है।
  • हार्टबर्न/एसिडिटी: थोड़ा-थोड़ा करके छोटे भोजन करें, खाने के तुरंत बाद न लेटें, और जरूरत हो तो सुरक्षित एंटासिड के बारे में डॉक्टर से बात करें।
  • ब्रैक्‍स्टन हिक्स संकुचन: पानी/तरल लें, पोज़िशन बदलें और आराम करें। प्रैक्टिस संकुचन अक्सर अनियमित होते हैं और चलने-फिरने, आराम या हाइड्रेशन से कम हो जाते हैं।
  • कब्ज: तरल और फाइबर (फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज) बढ़ाएँ, और यदि डॉक्टर अनुमति दें तो दिनचर्या में हल्की गतिविधि शामिल करें।
  • नींद में परेशानी: करवट लेकर सोने परघुटनों के बीच और पेट के नीचे तकिया रखकरहिप और पीठ पर दबाव कम हो सकता है।

असामान्य लक्षण और डॉक्टर को कब कॉल करें

कुछ लक्षण जटिलताओं का संकेत हो सकते हैं और तत्काल जाँच की आवश्यकता होती है। यदि नीचे दिए गए किसी भी चेतावनी संकेत का अनुभव हो, खासकर यदि लक्षण तेज़, अचानक या बढ़ते जा रहे हों तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

  • शिशु की हलचल कम होना या बदल जाना: तुरंत अपनी मैटरनिटी यूनिट या डॉक्टर/प्रोवाइडर से संपर्क करें।
  • योनि से रक्तस्राव, पानी/तरल का रिसाव, या झिल्ली फटने (पानी की थैली फटना) का संदेह
  • तेज़ सिरदर्द जो ठीक न हो, नज़र में बदलाव (धुंधलापन/धब्बे दिखना), या चेहरे/हाथों में अचानक सूजन (यह उच्च रक्तचाप से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है)
  • बुखार (लगभग 38C/100.4F या उससे अधिक) या ठंड लगना
  • तेज़ पेट दर्द या लगातार एक तरफ का दर्द
  • अचानक सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, या दिल की धड़कन बहुत तेज़ होना
  • पेशाब में जलन के साथ बुखार या पीठ दर्द (संक्रमण का संकेत हो सकता है)

8 महीने में समय से पहले प्रसव (प्रीटर्म लेबर) के संकेत

समय से पहले प्रसव (प्रीटर्म लेबर) का अर्थ है 37 सप्ताह से पहले प्रसव का शुरू होना। क्योंकि इस समय शिशु के फेफड़े और अन्य प्रणालियाँ अभी परिपक्व हो रही होती हैं, इसलिए 8 महीने में प्रीटर्म लेबर के संकेत पहचानना और होने पर जल्दी जाँच करवाना महत्वपूर्ण है।

  • नियमित संकुचन जो तेज़ हों, अंतर कम हो और आराम या पानी पीने से कम न हों
  • कमर के निचले हिस्से में लगातार हल्का दर्द या पेल्विक प्रेशर जो नया लगे या बढ़ता जाए
  • पीरियड जैसे ऐंठन/दर्द या पेट का बार-बार कसना
  • योनि से तरल का रिसाव या अचानक पानी जैसा बहना (पानी की थैली फटने का संकेत)
  • दर्द के साथ रक्तस्राव या स्पॉटिंग

यदि आपको प्रीटर्म लेबर का संदेह हो, तो तुरंत अपनी मैटरनिटी यूनिट या डॉक्टर/हेल्थकेयर प्रोवाइडर से संपर्क करें। वे संकुचनों का आकलन कर सकते हैं, शिशु की स्थिति की जाँच कर सकते हैं और तय कर सकते हैं कि मॉनिटरिंग या उपचार की आवश्यकता है या नहीं। लगातार लक्षणों को घर पर स्वयं संभालने की कोशिश न करें।

इस महीने सुझाए जाने वाले टेस्ट और चेक-अप

जैसे-जैसे आप तीसरी तिमाही में आगे बढ़ती हैं, आम तौर पर डॉक्टर आपकी जाँच अधिक बार करते हैं। इन विज़िट्स में वे आपका ब्लड प्रेशर, वजन, सूजन, शिशु की धड़कन, फंडल हाइट (ग्रोथ माप) देख सकते हैं और सिरदर्द, नज़र में बदलाव या शिशु की हलचल कम होने जैसे लक्षणों पर चर्चा कर सकते हैं।

यदि आपकी गर्भावस्था हाई-रिस्क हो या डॉक्टर को किसी विशेष बात की चिंता हो (जैसे शिशु की हलचल कम होना या ग्रोथ से जुड़ी चिंता), तो वे अतिरिक्त मॉनिटरिंग की सलाह दे सकते हैं। आपकी जरूरत के अनुसार इसमें फीटल मूवमेंट काउंट, नॉन-स्टेस टेस्ट (NST), बायोफिज़िकल प्रोफ़ाइल (BPP), या डॉप्लर अल्ट्रासाउंड (Doppler ultrasound) शामिल हो सकते हैं। अक्सर 32-34 सप्ताह के आसपास, जब यह आवश्यक माना जाए।

8 महीने में शिशु की स्थिति क्यों महत्वपूर्ण है?

जैसे-जैसे प्रसव का समय नज़दीक आता है, शिशु की पोज़िशन (स्थिति) अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। कई शिशु धीरे-धीरे सिर-नीचे (सेफेलिक/cephalic) स्थिति में आ जाते हैं, जो आम तौर पर नॉर्मल डिलीवरी के लिए अनुकूल मानी जाती है। इस चरण में कुछ शिशु ब्रीच (नितंब या पैर नीचे) हो सकते हैं या करवट/आड़ा (ट्रांसवर्स) लेट सकते हैं। इसलिए डॉक्टर आमतौर पर देर की गर्भावस्था में शिशु की स्थिति पर अधिक ध्यान देना शुरू करते हैं और अगले हफ्तों में इसे कन्फर्म करते हैं।

  • सिर-नीचे (Head-down/cephalic): यह स्थिति टर्म के आसपास सबसे सामान्य होती है और आमतौर पर प्रसव के लिए बेहतर मानी जाती है।
  • ब्रीच (Breech): इसमें शिशु के नितंब या पैर नीचे की ओर होते हैं। यदि बाद में भी शिशु ब्रीच बना रहे, तो डॉक्टर आगे की योजना और विकल्पों पर चर्चा करेंगे।
  • आड़ा/तिरछा (Transverse/oblique): शिशु करवट या तिरछा लेटा होता है; यदि यह स्थिति डिलीवरी के करीब तक न बदले, तो अक्सर मेडिकल प्लानिंग की आवश्यकता होती है।

आठवें महीने में अपनाने योग्य सावधानियाँ

इस महीने का लक्ष्य शिशु की स्थिर और स्वस्थ ग्रोथ को सपोर्ट करना, अनावश्यक असहजता को कम करना और किसी भी समस्या को शुरुआती स्तर पर पहचानना है। अधिकांश लोग अपनी सामान्य दिनचर्या जारी रख सकते हैं, लेकिन जहाँ ज़रूरत हो वहाँ गति धीमी रखना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना समझदारी है, खासकर यदि आपको हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, एनीमिया, प्लेसेंटा से जुड़ी समस्या या पहले प्रीटर्म लेबर का इतिहास रहा हो।

  • शिशु की हलचल का अपना पैटर्न समझें। यदि हलचल कम लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • पर्याप्त पानी/तरल लें। डिहाइड्रेशन से कब्ज बढ़ सकता है और गर्भाशय में टाइटनिंग/चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।
  • संतुलित भोजन करें। प्रोटीन, आयरन-युक्त खाद्य पदार्थ, कैल्शियम के स्रोत, साबुत अनाज और फाइबर पर ध्यान दें ताकि ग्रोथ और पाचन दोनों सपोर्ट हों।
  • हल्की गतिविधि करें, और पर्याप्त आराम लें। यदि डॉक्टर अनुमति दें, तो वॉकिंग या प्रीनेटल स्ट्रेचिंग जैसी हल्की एक्टिविटी रक्तसंचार और नींद में मदद कर सकती है। अत्यधिक थकान से बचें; एक्टिविटी के दौरान आप आराम से बात कर सकें, यह एक अच्छा संकेत है।
  • सूजन कम करने के उपाय करें। संभव हो तो पैरों को ऊँचा रखें, लंबे समय तक खड़े रहने से बचें, और अचानक सूजन होने पर डॉक्टर से बात करें।
  • जहाँ संभव हो, करवट लेकर सोएँ। साइड-लाइंग पोज़िशन कई लोगों के लिए आराम और सर्कुलेशन में मदद करती है; तकियों का सहारा लें।
  • सभी प्रीनेटल अपॉइंटमेंट्स नियमित रखें। तीसरी तिमाही की विज़िट्स समस्याएँ जल्दी पकड़ने और सुरक्षित डिलीवरी की योजना बनाने में मदद करती हैं।

डिलीवरी से पहले की तैयारी (पहले से पूरी करें)

पहले से तैयारी करने से आखिरी समय का तनाव कम होता है और आपको अधिक नियंत्रण महसूस होता है। भले ही डिलीवरी डेट दूर लगे, फिर भी कई डॉक्टर आठवें महीने में तैयारी शुरू करने की सलाह देते हैं ताकि यदि प्रसव अपेक्षा से पहले शुरू हो जाए, तो आप तैयार रहें।

  • अपना केयर पाथवे तय करें: मैटरनिटी यूनिट/क्लिनिक के संपर्क नंबर सेव करें और जानें कि इमरजेंसी आकलन की ज़रूरत होने पर कहाँ जाना है।
  • ज़रूरी सामान पैक करें: आईडी, (यदि लागू हो) बीमा/रजिस्ट्रेशन दस्तावेज़, आरामदायक कपड़े, टॉयलेटरीज़, फोन चार्जर और शिशु के लिए घर ले जाने वाला कपड़ा।
  • ट्रांसपोर्ट प्लान करें: तय करें कि दिन-रात किसी भी समय अस्पताल कैसे पहुँचेंगे, और एक बैकअप विकल्प भी रखें।
  • बर्थ प्रेफरेंसेज़ पर चर्चा करें: दर्द-नियंत्रण के विकल्प, सपोर्ट पर्सन और अपनी प्राथमिकताओं पर डॉक्टर से बात करें और यह भी समझें कि मेडिकल जरूरतों के अनुसार बदलाव करना पड़ सकता है।
  • सपोर्ट की व्यवस्था करें: बड़े बच्चों, पालतू जानवरों या घर के कामों के लिए डिलीवरी के बाद पहले सप्ताह में मदद की योजना बनाएं।
  • घर की बेसिक तैयारी: शिशु के लिए सुरक्षित सोने की जगह, डायपर, वाइप्स और फीडिंग की चीज़ें (चाहे ब्रेस्टफीडिंग हो या फॉर्मूला) तैयार रखें।

आठवें महीने के बारे में मिथक बनाम तथ्य

मिथक तथ्य
अंत में शिशु कम हिलता है क्योंकि अंदर जगह नहीं रहती। आपको प्रसव तक (और प्रसव के दौरान भी) शिशु की हलचल महसूस होती रहनी चाहिए। यदि हलचल कम हो, रुक जाए या शिशु के सामान्य पैटर्न से स्पष्ट रूप से बदल जाए, तो तुरंत डॉक्टर/हेल्थकेयर प्रोवाइडर से संपर्क करें।
हर संकुचन का मतलब है कि लेबर शुरू हो गया है। तीसरी तिमाही में ब्रैक्‍स्टन हिक्स संकुचन आम हैं। ये अक्सर अनियमित होते हैं और पानी/आराम से कम हो सकते हैं। लेकिन यदि संकुचन लगातार, नियमित और बढ़ते हुए हों, तो जाँच कराना जरूरी है।
देर की गर्भावस्था में सूजन हमेशा सामान्य होती है। हल्की सूजन सामान्य हो सकती है, लेकिन चेहरे/हाथों में अचानक सूजन, तेज़ सिरदर्द या नज़र में बदलाव चेतावनी संकेत हो सकते हैंऐसे में तुरंत चिकित्सकीय जाँच आवश्यक है।
अगर चिंता हो, तो इंतज़ार करके देखना बेहतर है। चेतावनी संकेतों, खासकर शिशु की हलचल में बदलावपर तुरंत मदद लेना बेहतर माना जाता है, क्योंकि समय पर आकलन आपके और शिशु दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

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निष्कर्ष

आठवाँ महीना वह समय है जब सब कुछ बहुत वास्तविक लगने लगता है: शिशु तेजी से बढ़ रहा होता है, आपका शरीर पहले से अधिक मेहनत कर रहा होता है, और डिलीवरी की तैयारी टू-डू लिस्ट से लगभग तैयार की ओर बढ़ जाती है। पर्याप्त आराम, हाइड्रेशन, संतुलित पोषण और हल्की गतिविधि पर ध्यान दें,और जो भी लक्षण आपको चिंतित करें, उनके बारे में अपनी केयर टीम को ज़रूर बताएं। सबसे महत्वपूर्ण बात: 8 महीने में शिशु की हलचल में बदलाव या अन्य चेतावनी संकेतों के बारे में अपने अंतर्ज्ञान पर भरोसा करें। समय पर मदद लेना आपके और शिशु दोनों के लिए बड़ा फर्क ला सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

हाल ही में मुझे पहले से ज्यादा थकान महसूस हो रही है। क्या यह सामान्य है?

हाँ, गर्भावस्था के 8 महीने में थकान बढ़ना आम है। आपका शरीर अधिक वजन उठा रहा होता है, नींद बाधित हो सकती है, और शिशु की तेजी से ग्रोथ के लिए ऊर्जा की आवश्यकता भी बढ़ती है। छोटे-छोटे रेस्ट ब्रेक लें, भोजन नियमित रखें, और यदि थकान बहुत ज्यादा हो या चक्कर/सांस फूलने के साथ हो, तो आयरन (हीमोग्लोबिन) की जाँच के बारे में डॉक्टर से बात करें।

मुझे कब अस्पताल जाना चाहिए?

यदि शिशु की हलचल स्पष्ट रूप से कम हो जाए या बंद लगे, योनि से रक्तस्राव हो, पानी/तरल का रिसाव हो, तेज़ सिरदर्द या नज़र में बदलाव हो, तेज़ पेट दर्द हो, तेज़ बुखार हो, या नियमित/बढ़ते हुए संकुचन होंतो तुरंत अस्पताल/मैटरनिटी यूनिट से संपर्क करें या वहाँ जाएँ। अगर आप असमंजस में हैं, तो ‘सावधानी’ के पक्ष में निर्णय लेना बेहतर है और जल्दी सलाह लेना ठीक रहता है।

क्या मैं इस समय यात्रा कर सकती/सकता हूँ?

कई मामलों में हल्की यात्रा संभव होती है, लेकिन यह आपकी गर्भावस्था के जोखिम, दूरी, और यात्रा के साधन पर निर्भर करती है। यात्रा करने से पहले अपने डॉक्टर से अनुमति लें, खासकर यदि आपको हाई ब्लड प्रेशर, ब्लीडिंग, प्रीटर्म लेबर का इतिहास, या कोई अन्य जटिलता हो। यदि अनुमति मिले, तो लंबे सफर में ब्रेक लें, पर्याप्त पानी पिएँ, हल्का-फुल्का चलें, और अपनी मेडिकल फ़ाइल/कॉन्टैक्ट नंबर साथ रखें।

क्या मुझे पहले से सी-सेक्शन (C-section) की योजना बनानी चाहिए?

यह आपकी मेडिकल स्थिति, शिशु की पोज़िशन, प्लेसेंटा की स्थिति, पिछले डिलीवरी इतिहास और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है। कई बार सी-सेक्शन की जरूरत का निर्णय डिलीवरी के करीब या लेबर के दौरान भी हो सकता है। बेहतर यह है कि आप अपने डॉक्टर से संभावित संकेतों, विकल्पों और कंटिन्जेंसी प्लान, (यदि जरूरत पड़े तो क्या होगा) पर पहले से चर्चा कर लें। ताकि आप मानसिक रूप से तैयार रहें।

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